
आंदोलन तेज, क्रमिक अनशन शुरू
- पंचायतीराज सेवा परिषद का आंदोलन
- फिर गूंजा साडा हक ऐत्थे रख
श्रीगंगानगर। साडा हक ऐत्थे रख नारों से उस समय खलबली मच गई जब जिला परिषद परिसर में पंचायतीराज के अधिकांश कर्मचारी हड़ताल पर आ गए। अब तक पिछले बीस दिनों से सामूहिक अवकाश लेकर आंदोलन चला रहे इन कार्मिकों ने अब जिला परिषद में टैँट लगाकर धरना शुरू कर दिया। गुरुवार को क्रमिक अनशन पर ग्राम सेवक संघ के जिलाध्यक्ष रामधन लिम्बा के अलावा ग्रामीण विकास सेवा के विनोद कुमार, पंचायत प्रसार अधिकारी सेवा संघ के जिलाध्यक्ष धर्मपाल मौर्य,उपशाखा अध्यक्ष बलतेज सिंह और योगेश गौड़ बैठे। इस मौके पर जिले भर से आए पंचायत राज कार्मिकेां का कहना था कि सरकार ने कई बार लिखित समझौते किए है लेकिन हर बार आश्वासन देकर समझौते को लागू नहीं करवा रही है। इन कार्मिकों के समर्थन में कई सरपंचों के अलावा विभिन्न संगठनों के पदाधिकारियों ने आकर आर पार की लड़ाई लडने की बात कही।
जिलाध्यक्ष लिम्बा का कहना था कि सरकार से चौबीस घंटे पहले भी वार्ता के प्रयास हुए थे लेकिन जब तक क्रियान्विति का निर्णय नहीं होता तब तक बात करना बेमानी हो गया है।
पात्र ग्रामीण अब चक्कर काटने को मजबूर
सामूहिक अवकाश पर जाने के कारण पंचायतों में विभिन्न प्रकार के कार्य प्रभावित हो रहे है। ग्राम स्तर के कार्य को करवाने के लिए ग्रामीणों को पंचायत बंद मिलने से समस्याएं देखनेी पड रही है। साथ ही सरकारी योजनाओं समेत कई कार्य कार्य सरकार के भी लंबित है। इसमें जन्म मृत्यु प्रमाण पत्र, विवाह पंजीयन कार्य, निर्माण कार्य, तकनीकी और प्रशासनिक वितीय कार्य, पट़टा बनाने का कार्य, सूचना के अधिकार का कार्य, संपर्क पोटर्ल, खाद्य सुरक्षा योजना, डिजीटल, स्वच्छता अभियान, आवास योजना के कार्य, राशन कार्ड का कार्य, भामाशाह योजना, जनधन योजना के कार्य, पेंशन का कामकाज प्रभावित हो रहा है। इसके साथ साथ मनरेगा कार्य भी अब ठप जैसी हालात है।
जिले में सामूहिक हड़ताल के कारण केवल पचास ग्राम विकास अधिकारी ही डयूटी पर कार्यरत है। ये वे ही जिनका अभी परीवीक्षिाकाल पूरा नहीं हुआ है। जिस कारण संगठन ने भी इन्हें हड़ताल में शामिल नहीं किया गया है। लेकिन इससे पूरे जिे की व्यवस्थाएं नहीं बन पा रही है।
ये है ग्राम विकास अधिकारियों की प्रमुख मांगें
- 2006 से बीडीओ के प्रमोशन की कोई प्रक्रिया नहीं।
- पंचायत प्रसार अधिकारियों के प्रमोशन की मांग
- ग्राम विकास अधिकारी की 2016 में 3642 पदों पर भर्ती हुई थी, उनमें से 1062 पदों की चेटिग लिस्ट चार माह पहले जारी होने के बावजूद जिले आंवटित नहीं हो रहे है।
- ग्राम विकास अधिकार पद के लिए पांच साल में एक बार भी डीपीसी नहीं हुई।
- ग्राम विकास अधिकारियों के बेसिक पे ग्रेड सुधार किया जाएं।
हमारी मांगों की अनदेखी क्येां
सरकार को कई बार हमने ज्ञापन दिए। जिले के विकास में ग्राम विकास अधिकारियों की अहम भूमिका रहती है। कई योजनाओं की क्रियििान्वत ग्राम विकास अधिकारियों की बदौलत ही संभव हैलेकिन सरकार बार बार नजर अंदाज करती रही है। इस कारण इस बार संगठन ने पूरे प्रदेश में सामूहिक अवकाश निर्णय किया है।
- रामधन लिम्बा, जिलाध्यक्ष ग्राम विकास अधिकारी संघ श्रीगंगानगर।
Published on:
04 Oct 2018 02:34 pm
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