
जैतसर.
पिछले करीब एक पखवाड़े से बदलते मौसम के मिजाज ने किसानों को खुश करने के साथ-साथ थोड़ी चिंता भी बढा दी है। पकाव बिन्दु पर पहुंच चुकी रबी की फसल को एक तरफ जहां मौसम में आयी नमी से पकाव में लाभ मिलेगा वहीं तापमान में गिरावट से फसलों में कृमि रोग बढने की भी संभावना कृषि एवं उद्यान विभाग की ओर से व्यक्त की जा रही है।
कृषि विभाग के अधिकारियों की माने तो बदलते मौसम के दरमयान एक ओर जहां मौसत की नमी फसलों के पकाव में मददगार साबित होगी वहीं किसानों को अब पकाव पर पहुंच चुकी अपनी फसल का तेला, चेपा, सूंडी व जौ में कंडवा रोग व गेहूं में यलोरेस्ट (पीलापन या पीली पती रोग) से बचाव के लिए विशेष ध्यान रखना चाहिए।
कृषि पर्यवेक्षक गुरमीत सिंह एवं जल उपयोक्ता संगम अध्यक्ष देवेन्द्र शर्मा ने बताया कि फरवरी महीने से लेकर मार्च महीने के अंत तक रबी की फसल अपने पूर्ण पकाव पर होती है। मार्च महीने के अंतिम सप्ताह से किसान अपनी फसलों की कटाई प्रारंभ कर देंगे। ऐसे में उन्हें पकाव पर पहुंच चुकी फसलों को कृमि रोग से बचाने के लिए भी आवश्यक इंतजाम करने चाहिए।
करीब 15 हजार हेक्टेयर में है बिजान
जानकारी के अनुसार स्थानीय कृषि पर्यवेक्षक कार्यालय क्षेत्राधिकार अंतर्गत करीब 15 हजार हैैक्टेयर क्षेत्र में रबी की फसल का बीजान किया गया है। जहां फसलें पकाव पर है। क्षेत्र में प्रतिवर्ष की अपेक्षा इस बार बीजान भी अधिक होने एवं फसलों की स्थिति सुदृढ होने के कारण उत्पादन अधिक होने की उम्मीद है। मार्च महीने के अंतिम सप्ताह से किसान अपनी फसलों की कटाई प्रारंभ कर देंगे। ऐसे में उन्हें पकाव पर पहुंच चुकी फसलों को कृमि रोग से बचाने के लिए भी आवश्यक इंतजाम करने चाहिए।
Published on:
25 Feb 2018 06:57 am
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