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SriGanganagar दीपावली पर बनाई राधेश्याम कोठी रोड फिर तोड़ी

Radheshyam Kothi road built on Diwali was broken again- चैम्बर्स ढूंढने के लिए खोद डाली सड़क, वहां बनी नहीं

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SriGanganagar दीपावली पर बनाई राधेश्याम कोठी रोड फिर तोड़ी

SriGanganagar दीपावली पर बनाई राधेश्याम कोठी रोड फिर तोड़ी

श्रीगंगानगर। आरयूआईडीपी की ओर से इलाके में सीवर लाइन और पेयजल पाइप लाइनों को फिर से जोड़ने का काम शुरू किया गया है। दीपावली पर्व पर पूर्व मंत्री राधेश्याम गंगानगर कोठी रोड पर सीवर ठेका कंपनी एलएंडटी की ओर से पेचवर्क लगाए गए थे लेकिन गुरुवार को फिर इस रोड की खुदाई होने लगी। सीवर लाइन और पेयजल पाइप लाइन के लिए नए चैम्बर लगाने की प्रक्रिया शुरू की गई।

वहीं पुराने चैम्बर पर पेचवर्क लगाने के दौरान पता नहीं लगा तो वहां कारीगरों ने जगह जगह सड़क की खुदाई कर दी। नए चैम्बर्स से पाइप लाइन जोड़ने और पानी निकासी के संबंध में टेस्टिंग भी कराई जाएगी। भाटिया पेट्रोल पंप से पूर्व मंत्री राधेश्याम कोठी तक वाहनों की आवाजाही रोक दी गई। इधर, आरयूआईडीपी के अधिकारियों का कहना है कि इस मार्ग पर पीडब्ल्यूडी की ओर से नई सड़क बनाने की प्लानिंग है, इस कारण पेयजल और सीवर लाइनों का मिलान की प्रक्रिया काम शुरू कराया गया है ताकि नई सड़क से पहले यह काम पूरा हो सके।
वहीं पुराने चैम्बर की पहचान कर पाइप लाइन को साफ कराने के लिए कारीगरों की टीम लगाई है। यह रोड मार्केट का रूप ले चुकी है, ऐसे में बार बार चैम्बर्स और पाइप लाइन के कारण दुकानदारी प्रभावित होने लगी है।
इधर, जवाहरनगर सैक्टर सात और आठ की सांझा रोड पर पेयजल पाइप लाइन बिछाने के बाद ठेका कंपनी ने पेचवर्क नहीं कराया। वहीं जवाहरनगर सैक्टर सात में भी सड़क की मरम्मत कराने के लिए ठेका कंपनी के प्रतिनिधियों ने पिछले तीन महीने से सुध नहीं ली। वहीं ब्लॉक एरिया की कई गलियों में भी पेयजल पाइप लाइन बिछाने के बाद वहां पेचवर्क लगाने के लिए कोई अधिकारी नहीं आया।
इस बीच, आरयूआईडीपी के कार्यवाहक एसई केके अग्रवाल ने बताया कि पूरे शहर में 450 किमी सीवर लाइन बिछाने का लक्ष्य था, इसमें से 390 किमी लाइन बिछाई जा चुकी है। इसी तरह पेयजल पाइप लाइन बिछाने के लिए 325 किमी का लक्ष्य निर्धारित किया गया था, इसमें से करीब 290 किमी लाइन बिछाई गई है। दोनों लाइनों के बिछाने का काम नब्बे फीसदी हो चुका है। लेकिन कई जगह लाइनों का मिलान करने का काम शेष पड़ा है। इसे अब कराने के लिए युद्धस्तर पर टीमें लगाई गई है।