सूरतगढ़ (श्रीगंगानगर). रेलवे प्रशासन की ओर से श्रीगंगानगर जैसलमेर ट्रेन बंद करने के बाद नागरिकों का पारा सातवें आसमान पर है। नागरिक संघर्ष समिति (रेल) ने रेलवे स्टेशन पर बड़ा प्रदर्शन करते हुए स्टेशन अधीक्षक का घेराव किया गया। नागरिकों ने स्टेशन अधीक्षक को उत्तर पश्चिम रेलवे के महाप्रबंधक के नाम ज्ञापन सौंपकर रेलवे पर जानबूझकर श्रीगंगानगर जैसलमेर ट्रेन बंद करने का आरोप लगाया। नागरिकों ने कहा कि रेलवे की नीयत कभी इस ट्रेन को चलाने की थी ही नहीं।
नागरिकों के दबाव में ट्रेन को शुरू तो कर दिया गया लेकिन जानबूझकर समय सारणी ऐसी बनाई गई कि ट्रेन को यात्री भारी नहीं मिले और इसे राजस्व का हवाला देकर बंद कर दिया जाए। जबकि नागरिक ट्रेन के शुरू होने के प्रथम दिन से ही इसके समय परिवर्तन की मांग कर रहे थे। रेलवे के मुख्य वाणिज्य प्रबंधक को भी नागरिकों ने ट्रेन के समय को व्यवहारिक बताते हुए टाइम टेबल बदलने की मांग की थी। लेकिन पिछले 6 माह में रेलवे ने समय परिवर्तन पर ध्यान नहीं दिया और अब रेल प्रशासन ने यात्री भार का बहाना बनाकर इस रेलगाड़ी को बेपटरी कर दिया। रेल संघर्ष समिति संयोजक लक्ष्मण शर्मा ने कहा कि रेल मंत्री ने बजट भाषण के दौरान कहा था कि यात्री ट्रेनों का संचालन नागरिकों की सुविधा के लिए किया जाता है ना कि व्यापार के लिए। अधिकांश ट्रेनें राजस्व घाटे में चलती हैं। इसके बावजूद रेलवे ने श्रीगंगानगर जैसलमेर ट्रेन को बंद कर क्षेत्र के नागरिकों के साथ अन्याय किया है।
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रेलें रोकने और बाजार बंद की चेतावनी
व्यापारियों ने ज्ञापन देकर जैसलमेर के लिए सीधी रेल सेवा शीघ्र दोबारा शुरू नहीं होने पर बाजार बंद करने और रेलें रोकने की चेतावनी दी। गुस्साए नागरिकों ने कहा कि रेल प्रशासन पहले ही बाड़मेर कालका, सूरतगढ़ बठिंडा, बीकानेर बिलासपुर सहित चार ट्रेनों को बंद कर चुका है। अब श्रीगंगानगर जैसलमेर ट्रेन को भी बंद कर दिया गया है। दो वर्षों में कुल 5 ट्रेनें बंद हो चुकी है। अगर रेलवे ने श्रीगंगानगर जैसलमेर ट्रेन को जल्द ही वापस शुरू नहीं किया तो व्यापारी और नागरिक बाजार बंद और रेल रोकने का फैसला लेंगे।