श्रीगंगानगर. अधीनस्थ पुलिस सेवा से जुड़े कांस्टेबल से लेकर निरीक्षक स्तर के कर्मचारियों के प्रमोशन परीक्षा के बजाय डीपीसी से करने की मांग उठती रही है। विभागीय अनुशासन के चलते मुखरता दिखलाई नहीं दे रही, लेकिन दस-बीस सालों से पदोन्नति से वंचित रहने का दर्द अब दिखने लगा है। ऐसे में हर पांच साल में आने वाली सरकार से अधीनस्थ पुलिस सेवा के कॉर्मिक उनका दर्द दूर करने की आस लगाए रखते हैं लेकिन सरकारें आती है और जाती है लेकिन कोई उनके दर्द की दवा करने की सोचता भी नहीं है।
राजस्थान पुलिस अधीनस्थ सेवा नियमों में प्रमोशन के लिए लिखित, फिजिकल, फिर तीन स्तर पर इंटरव्यू के बाद नतीजे पर निर्भर है। दूसरी ओर, पड़ोसी गुजरात सहित अन्य राज्यों पंजाब, दिल्ली, हरियाणा, यूपी, उत्तराखंड और कर्नाटक में डीपीसी से पदोन्नतियां हो रही हैं। राजस्थान में आरपीएस-आईपीएस अधिकारियों के प्रोमोशन ही डीपीसी से हो रहे हैं। अधीनस्थ सेवाओं में कार्यरत अधिकारियों-कर्मचारियों का कहना है कि प्रदेश में ही अन्य बेल्ट सर्विसेज वनपाल, वनरक्षक, मोटर व्हीकल एसआई के प्रोमोशन डीपीसी से है।
आर्मी, पैरामिलिट्री फोर्स में प्रोमोशन हर रैंक पर डीपीसी ऑर्डर से हो रहे हैं, लेकिन राजस्थान में उनके साथ ही सौतेलापन है। इस विसंगति को दूर करने की मांग जनप्रतिनिधियों ने विधानसभा में भी उठाई, लेकिन अब तक नतीजा सामने नहीं आया है। इससे असंतोष बढ़ रहा है और बेमन से सेवाओं का असर विभागीय कार्य प्रदर्शन पर भी दिखने लगा है। धीरे-धीरे अब यह दर्द बढ़ता जा रहा है और अधीनस्थ सेवा कॉर्मिक इस दर्द की दवा की आस लगाए बैठे हैं।
80 हजार से अधिक पुलिसकर्मियों को इंतजार
– विभाग में परीक्षा प्रणाली से पदोन्नति सुगम नहीं है। इस पर भी पिछले साल से और पैचिदा बना दिया गया। इससे कई अधीनस्थ पुलिसकर्मी तो समय बीतने के बाद अफसोस के साथ बिना प्रोमोशन रिटायर हुए हैं। परेशानी यह भी है कि अभी तक विभाग समय पर पदोन्नति परीक्षाओं का आयोजन तक नहीं करवा पाया है। फिर परीक्षा के जरिए प्रोमोशन की प्रक्रिया में मनमानी के आरोप भी उठते रहे हैं। प्रदेश में 80 हजार से ज्यादा अधीनस्थ अधिकारी-कर्मचारी इससे प्रभावित है।
पड़ोस में डीपीसी, हमारे यहां परीक्षा
– पुलिसकर्मियों ने बताया कि गत वर्ष कांस्टेबल से हेड कांस्टेबल पदोन्नति में 50 फीसदी पदोन्नति डीपीसी और 50 फीसदी परीक्षा के जरिए करवाए जाने का आदेश राजस्थान पुलिस अधीनस्थ सेवा नियमों में संशोधन के उपरांत जारी किया गया। इसके खिलाफ उच्च न्यायालय ने स्थगन आदेश जारी कर दिया। तब से कांस्टेबल से निरीक्षक स्तर की पदोन्नति परीक्षाओं पर रोक है।
हालांकि पड़ोसी मध्यप्रदेश में भी ऐसा ही कारण बनने पर संज्ञान लेते हुए मुख्यमंत्री ने मध्यप्रदेश अधीनस्थ पुलिस नियमों में संशोधन कर गजट नोटिफिकेशन जारी करवाया। इसमें अधीनस्थ सेवा की सभी पुलिसकर्मियों को एक रैंक ऊपर पदोन्नति अभिलंब दी गई। इससे 2018 से वहां पदोन्नति नियमित डीपीसी से हो रही है।
इनका कहना है
– कांस्टेबल से लेकर इंस्पेक्टर तक की परीक्षा से पदोन्नति के चलते काफी लोग बिना पदोन्नति के ही रिटायर्ड हो जाते हैं। अब तक जिनको एएसआई होना था लेकिन वे अभी तक कांस्टेबल है। उनका भी जल्द रिटायर्डमेंट हो जाएगा। इसके लिए सरकार को कदम उठाना चाहिए। जिससे करीब एक लाख पुलिसकर्मियों व उनके परिजनों को राहत मिल सके।
कांता सिंह, अध्यक्ष रिटायर्ड पुलिस कर्मचारी कल्याण संघ श्रीगंगानगर