
ऐसा किसने बोला, मेरे सिंहासन की तरफ देखा तो उसकी खैर नहीं..
श्रीगंगानगर। ऋषि विश्वामित्र की तपस्या से जब क्रोधित हुए राजा इंद्र ने कहा मेरा लिए कोई गैर नहीं, मेरा किसी से बैर नहीं, अगर मेरा देखे सिंहासन की तरफ उसकी खैर नहीं। जैसे ही राजा इन्द्र अपने दरबार में आए तो उनके चेहरे पर राजा जैसा रूतबा नजर आया। इन्द्र का मंच पर आने आतिशबाजी से स्वागत किया गया।श्रीरामलीला सेवा समिति के तत्वावधान में सुखाडिया सर्किल के समीप सेठ गोपीराम गोयल की बगीची में मंचित हो रही रामलीला में राजा इंद्र की भूमिका कलाकार आशीष अरोड़ा निभा रहे हैं। उनके डॉयलाग को सुनकर पूरा पंडाल तालियां से गूंज उठा। नारद मोह, रावण-नंदी गन और रावण वेदवती प्रसंग को बेहद प्रभाव पूर्ण तरीके से मंचित किया गया।अयोध्यानगरी में भगवान राम और मिथिलानगरी में सीता का जन्म हुआ, चारों ओर खुशियां ही खुशियां छा गई। देवी देवताओं ने पुष्प वर्षा कर हर्ष जताया।इस हाईटेक रामलीला में भगवान राम और सीता मैय्या के जन्म के प्रसंगों को मंचित किया गया। रावण दरबार में मेघनाथ जैसे ही आए उनके मुकुट से रंग बिरंगे धुएं के गुब्बार फूटने लगे। चारों तरफ फूल बरसने लगे। दरबार में रावण और उनके परिवार के सदस्यों व मंत्रीगणों के ठहाकों व अट्टहास ने इस दृश्य को बहुत ही प्रभावपूर्ण बना दिया। मंच पर लगाई गई विशालकाय एलईडी स्क्रीन पर रामलीला के प्रसंगों के दृश्य उभरते रहे। दरबारियों से विचार विमर्श करते हुए रावण ने मेघनाथ को साधु सन्यासियों से कर वसूलने के लिए भेजा। साधु सन्यासी कर नहीं दे पाए तो मेघनाथ और उनके साथ आए राक्षसों ने कर के रूप में उनका रक्त निकाल लिया। इस रक्त को ले जाकर मेघनाथ ने मिथिलानगरी में दबा दिया।उसी जगह पर सीता का जन्म हुआ। उधर,अयोध्या नगरी में राजा दशरथ ने पुत्र की कामना से यज्ञ किया।उनके यहां भगवान राम का जन्म हुआ। सीता और राम के जन्म पर देवी देवताओं ने हर्ष जताते हुए पुष्प वर्षा की। इन दृश्यों को इतने सुंदर और सशक्त अभिनय के साथ कलाकारों ने प्रस्तुत किया जिससे ऐसा लगा कि रामलीला जैसे जीवंत हो उठी हो। राजा दशरथ और राजा जनक के दरबार दरबारों के प्रसंगों के बीच श्रवण वध का बेहद मार्मिक दृश्य मंचित किया गया। राजा दशरथ के बाण से श्रवण का वध हो जाने पर उसके बुजुर्ग माता-पिता की व्यथा और प्रलाप दर्शकों की आंखों को नम कर दिया। श्रवण के रूप में नरेश बॉस, राजा दशरथ के रूप में विपिन नारंग, राजा जनक के रूप में अनिल बेदी, रावण के रूप में भूपेंद्र ने अपने अभिनय की दर्शकों के दिल दिमाग पर अमिट छाप छोड़ी। इस रामलीला में वीआईपी जैसी सुविधा देखने को मिल रही है, पानी के लिए कैम्पर और बच्चों के झूलों की व्यवस्था की गई है। कलाकार को हाइटेक तकनीक से जोड़ा गया था ताकि अपना किरदार के दौरान पर्दे के पीछे से संवाद बोलने वाले का इंतजार नहीं करना पड़े।
Published on:
12 Oct 2018 01:40 pm
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