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श्रीगंगानगर. चूनावढ़ थाने के हिस्ट्रीशीटर कुलजीत उर्फ राणा की हत्या का मामला फिल्मी स्टाइल से किया गया था। उसकी हत्या की जांच कर रहे अफसरों की टीम ने अब तक जांच में यह पहलू सामने आया है। जांच टीम की माने तो अनूपगढ़ जेल में बंद हिस्ट्रीशीटर गुरजंट सिंह उर्फ जंटा का हिस्ट्रीशीटर कुलजीत उर्फ राणा बाबा के साथ पुरानी रंजिश चल रही थी, ऐसे में जंटा ने राणा को ठिकाना लगाने के लिए पूरी फिल्मी कहानी का रूप में पटकथा लिखी और ऐसे में उसने गुरजीत सिंह उर्फ सरपंच का बुलाया था। राणा पर 18 दिसम्बर की रात को हमला करने से छह घंटे पहले अनूपगढ़ जेल में जंटा और गुरजीत सिंह उर्फ सरपंच के बीच वार्ता हुई थी, उस दिन आरोपी सरपंच करीब बीस लोगों को लेकर अनूपगढ़ गया था। पूरी प्लानिंग बनाई गई। करीब पांच-छह घंटे के उपरांत इस वारदात को अंजाम दिया गया। जांच अधिकारियों ने बताया कि इस पूरे खेल में अनूपगढ़ निवासी गौरू उर्फ गौरा नामक युवक ने अहम किरदार निभाया था। गौरू दोनों गुटों का कॉमन दोस्त था। गौरू की दोस्ती कुलजीत उर्फ बाबा और गुरजंट सिंह उर्फ जंटा के साथ थी। जंटा ने गौरू को मुखबिरी करने के लिए राजी कर लिया था। गौरू ने केन्द्रीय बस स्टैंड पर कुलजीत उर्फ राणा बाबा से मिलने का नाटक किया। इस किरदार ने खुद को पुरानी आबादी में पीजी तक कार में लिफ्ट देने की बात कही थी। ऐसे में राणा बाबा और राणा के चचेरे भाई चूनावढ़ क्षेत्र गांव ढींगावाली जाटान 11 एचएच हाल अम्बे बिहार वैशाली चौक बालाजी धाम निवासी गुरुराज्यवर्धन पुत्र रघुवीर सिंह मजबीसिंह की कार में बैठकर पुरानी आबादी में ट्रक यूनियन पुलिया के पास पीजी में ले गया। इस दौरान गौरू उर्फ गौरां ने हमलावरों को लोकेशन बताते हुए मुखबिरी कर डाली। इधर, कुलजीत उर्फ राणा को चाय का ऑफर दिया लेकिन राणा ने अपने गांव वापस जाने की बात कही तो गौरू ने सेल्फी के बहाने उसे रोकने का प्रयास किया। इस प्रयास में वह सफल भी रहा। मोबाइल फोन सेल्फी के दौरान दस मिनट का समय बीत गया था। इतने में कार व बाइक पर आए गुरजीत सिंह सरपंच जटसिख, हमजोत, जश्न बराड, आकाश, गौरी, बब्बू भाट, गौरू, सलीम मलेकिया खान आदि ने घेराबंदी कर ली और राणा पर प्रहार करने शुरू कर दिए। मुखबिर करने वाले इस गौरू का नाम मृतक राणा के चचेरे भाई गुरुराज्यवर्धन की ओर से दर्ज कराई गई एफआइआर में अंकित कराया है।