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जेल में पहुंंचा निरक्षर, अब लिखने लगा भजन, बजाने लगा हार्मोनियम बाजा

- दूसरे बंदियों को भी कर रहा साक्षर

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जेल में पहुंंचा निरक्षर, अब लिखने लगा भजन, बजाने लगा हार्मोनियम बाजा

जेल में पहुंंचा निरक्षर, अब लिखने लगा भजन, बजाने लगा हार्मोनियम बाजा

भेड़- बकरियां चराते हुए हत्या के मामले में सात साल पहले जेल पहुंचा अंगूठाटेक बलराम आज भजन लिखना और हार्मोनियम बाजा बजाना सीख गया। अब बंदी कृष्ण भक्त बनकर भजन-कीर्तन कर रहा है। इसके जीवन में ऐसा बदलाव जेल में चलाए जा रहे साक्षरता कार्यक्रम व जेल अधीक्षक के मोटिवेशन से आया।


जेल में बंद विचाराधीन बंदी बलराम पुत्र लालचंद नायक निवासी 3 बीजीएम घमूडवाली महिला उत्पीडऩ व हत्या के मामले सात साल पहले जेल में बंद चल रहा है। बंदी बलराम निरक्षर व अनपढ़ आया था और इससे पहले वह भेड़-बकरियां चराने का कार्य करता था। जेल में निरक्षर बंदियों को साक्षर करने के लिए विशेष अभियान चलाया जा रहा है। जिसमें बंदियों को साक्षर किया जाता है।


बलराम ने दिखाई साक्षर होने में रुची
- बंदी बलराम ने जेल में चलाए जा रहे साक्षरता कार्यक्रम के तहत साक्षर होने के लिए काफी रुची दिखाई। बलराम प्रतिदिन समाचार पत्र पढऩे व उनमें से कुछ बातें लिखने का प्रयास करने लगा। इसके बाद उसने जेल प्रशासन ने रजिस्ट्रर व पेन की मांग की। जेल प्रशासन ने उसको यह उपलब्ध करवाया।


लिखने लगा भजन
- रजिस्ट्रर में बलराम ने कृष्णजी, हनुमानजी, रामदेवजी व देवी मां के भजन व चौपाई लिखने का अभ्यास जारहा है। भजन लिखने व जेल में आयोजित कार्यक्रम होने पर के समय भजन व गीत गाने लगा। यहीं वह हारर्मोनियम बाजा बजाने लगा।


अन्य बंदी हुए प्रेरित
- बंदी बलराम की कार्यप्रणाली व लगन तथा मेहनत से अन्य बंदियों को प्रेरणा मिली। जिससे अन्य बंदी भी जेल में रहकर अपने खाली समय का अच्छे कार्य में उपयोग करने लगे। इससे जेल के बंदियों में सकारात्मकता का वातावरण रहने लगा है। बंदी बलराम ने जहां जेल अंधेरी कोठरी में रहकर खुद के जीवन में उजाला किया, वहीं अन्य बंदियों में भी अलख जगाई है।


इनका कहना है
- जेल में बंदियों के लिए साक्षरता कार्यक्रम चला जाता है। जिसमें बंदियों व स्टाफ के सहयोग रहता है। लेकिन बलराम अनपढ़ होने के बाद भी पढऩा सीखा और भजन लिखना तथा बाजे पर गाना शुरू किया। उसकी इच्छाशक्ति से उसका जीवन रोशन तो हुआ ही है लेकिन अन्य बंदियों में उसने सीखने की ललक जगाई है। जेल में बलराम का यह कृत्य प्रशंसनीय है।
- डॉ. अभिषेक शर्मा, जेल अधीक्षक श्रीगंगानगर


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