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एक माह और बजाओ आचार संहिता की घंटी

Ring the code of conduct bell for one more month- करणपुर विधानसभा सीट पर अब चुनाव अगले माह

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एक माह और बजाओ आचार संहिता की घंटी

एक माह और बजाओ आचार संहिता की घंटी

#assembly elections पूरे प्रदेश में 199 विधानसभा क्षेत्र के लिए चुनाव सम्पन्न हो गए लेकिन एक सीट करणपुर विधानसभा क्षेत्र के लिए अब चुनाव आयोग ने चुनाव का टाइम टेबल जारी कर दिया हैं। इस विधानसभा क्षेत्र में चुनाव पांच जनवरी को होंगे, ऐसे में चुनाव आचार संहिता संबंधित विधानसभा क्षेत्र की बजाय पूरे जिले के लिए लागू की गई हैं। इससे आमजन के लिए मुश्किलें बढ़ गई हैं। इस आचार संहिता का असर सरकार की ओर से संचालित हो रही लोक जन कल्याणकारी योजनाओं पर अधिक पड़ा हैं। नए आवेदन स्वीकार्य नहीं किए जा रहे हैं। वहीं भूखंडों के मालिकाना हक के लिए पट़टे देने की प्रक्रिया भी थम गई हैं।विदित रहे कि करणपुर विधानसभा के चुनाव में कांग्रेस प्रत्याशी गुरमीत सिंह का निधन पन्द्रह नवम्बर को हो गया था, मतदान से पहले राष्ट्रीयकृत राजनीतिक दल के प्रत्याशी के निधन पर चुनाव की प्रक्रिया स्थगित करने का प्रावधान हैं, इसके तहत चुनाव आयोग ने करणपुर में पच्चीस नवम्बर को मतदान की प्रक्रिया स्थगित कर दी थी।

यहां दस जनवरी तक आचार संहिता

पूरे प्रदेश में विधानसभा चुनाव के लिए आचार संहिता 9 अक्टूबर को लागू की गई थी, यह आचार संहिता चार दिसम्बर को समाप्त हुई। लेकिन श्रीगंगानगर जिले में पांच दिसम्बर को करणपुर विधानसभा क्षेत्र के चुनाव के लिए फिर से आचार संहिता लागू कर इसकी समय अवधि अब दस जनवरी तक बढ़ा दी हैं।

सड़क मरम्मत से लेकर सरकारी सेवा मेें नियुक्त तक लगी ब्रेक

आचार संहिताफिर से एक माह की समय अवधि के लिए बढ़ने से जिले में कई कामकाज ठप हो गए हैं। इसमें भूखंडों के मालिकाना हक के लिए पट्टे देने पर रोक लगी रहेगी। सामाजिक पेंशन पाने के पात्र व्यक्तियों, खाद्य सुरक्षा योजना के पात्र परिवारों, मनरेगा कार्यो में नए श्रमिक का जॉब कार्ड बनाने, मस्टरोल जारी करने, शहरी मनरेगा के तहत नए कार्यो के लिए टास्क कार्य जारी करने, प्रधानमंत्री आवास योजना, स्वच्छ भारत मिशन के तहत शौचालय का निर्माण के कोई नया आवदेन स्वीकार्य नहीं किया जा रहा है। वहीं राहत संबंधित योजनाओं में भी पात्र व्यक्तियों को कोई भी भुगतान या सुविधा नहीं मिल पाएगी। इसके अलावा सड़क मरम्मत, सड़क निर्माण के लिए टैंडर, वर्क ऑर्डर जैसे प्रक्रिया भी शुरू नहीं की जा सकती। अनुकंपा के आधार पर आवेदन या नौकरी प्रक्रिया भी शुरू नहीं हो सकती। सरकारी सेवा के लिए चयनित हुए लोगों को ज्वाइनिंग भी नहीं दी जाएगी। दो लाख से अधिक कार्यो के लिए कोई भी अधिकृत अधिकारी अपने स्थानीय निकायों से कोटेशन कार्य नहीं करवा पाएंगे। इसके साथ साथ नए निर्माण पर पूर्णतया प्रतिबंध हैं।

जहां हैं वहां रहेंगे अधिकारी और कार्मिक

विधानसभा चुनाव को सफलतापूर्वक सम्पन्न कराने के लिए उच्च अधिकारियों ने आचार संहिता से पहले कई अधिकारियों को कार्यवाहक के रूप में लगाया था लेकिन आचार संहिता की समय अवधि एक माह और बढ़ने से अब संबंधित अधिकारी और कार्मिक ठाले बैठने को मजबूर हैं। जिला परिषद में सीइओ आईएएस मुहम्मद जुनैद का तबादला आचार संहिता लगने से पहले हुआ था, तब शुगर मिल के महाप्रबंधक आरएएस भवानी सिंह पंवार को कार्यवाहक सीइओ के पद पर लगाया था। लेकिन अब फिर से आचार संहिता लगने से उनको मूल विभाग में जाने पर रोक लग गई हैं। इसी प्रकार जिला परिषद में एसीईओ देसराज को पंचायत समिति श्रीगंगानगर का कार्यवाहक बीडीओ लगाया था। इस अधिकारी के वहां से रवानागी की प्रक्रिया अटक गई हैं। इधर, नगर परिषद में आयुक्त आरएएस यशपाल आहुजा भी चुनाव प्रक्रिया पूरा कराने के लिए आए थे लेकिन उनको भी रवानगी नहीं दी जा रही हैं। उधर, चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग में सीएमएचओ डा. मनमोहन गुप्ता भी चुनाव के उपरांत तबादले कराने की लाइन में थे लेकिन अब एक माह के लिए प्रक्रिया टल गई हैं। कलक्ट्रेट की चुनाव शाखा में लगाए गए कई शिक्षक और स्कूल स्टाफ को भी अब एक महीने और इंतजार करना होगा। वहीं महिला एवं बाल विकास के उपनिदेशक पद पर कार्यवाहक के रूप में सीडीपीओ अनिल कामरा भी अपने मूल स्थान से वापस लौटने से अटक गए हैं।


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