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श्रीगंगानगर.
भले ही चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग की टीम पिछले करीब एक सप्ताह से सैंपल लेने की कार्रवाई कर मिलावट के खिलाफ अभियान चलाने का दम भर रही हो, लेकिन वास्तविकता कुछ और ही है। आलम यह है कि यह कार्रवाई शहर में बिक रहे अशुद्ध मावे और मिठाइयों तथा नमकीन के मुकाबले बेहद कम है। इस पर यदि इस कार्रवाई में किसी संस्थान का सैंपल भर भी लिया जाए तो रिपोर्ट जब तक आएगी तब तक संबंधित संस्थान इसी अशुद्ध मिठाई की बिक्री कर मोटा मुनाफा कमा चुका होगा।
ये अशुद्धियां मावे में
अधिकांश मिठाइयों में मावे का उपयोग होता है और सैंपल लेने की भी अधिकांश कार्रवाइयां मावे की हुई हंै। शहर में बिक रहे मावे की बात करें तो इसमें वनस्पति तेल की मिलावट रहती है। इसके साथ ही मावे में पाउडर दूध का अथवा क्रीम निकाले हुए दूध का उपयोग होता है। ऐसे में पर्याप्त गुणवत्ता नहीं रह पाती है। अधिकांशत: इससे मावे के रंग में अंतर आ जाता है। शहर में इस तरह का अशुद्ध मावा बीकानेर क्षेत्र के कुछ स्थानों से अथवा जयपुर से आ रहा है।
अधिकारी मजबूर
शहर में सैंपल लेने के बावजूद दिवाली तक अशुद्ध मिठाइयों के ही बिकने के बारे में जब अधिकारियों से बात की गई तो वे भी असहाय नजर आए। उनका कहना था कि सैंपल की रिपोर्ट आने में अभी करीब एक माह लगेगा। ऐसे में दिवाली तक तो इन दुकानदारों पर कोई कार्रवाई नहीं होगी।
रिपोर्ट में लगेगा एक माह
जिन खाद्य पदार्थों के सैंपल लिए गए हैं, उनमें से लैब टैस्ट में किसी खाद्य पदार्थ के स्वास्थ्य के लिए हानिकारक पाए जाने पर इसमें सजा तक का प्रावधान है, लेकिन यदि ये खाद्य पादार्थ मानकों के अनुरूप नहीं पाए जाते तो इतनी कठोर कार्रवाई नहीं है। इस मामले में लैब टैस्ट की रिपोर्ट की बात करें तो इसमें एक माह का समय लगेगा।
-डॉ. अजय सिंगला, टीम प्रभारी, खाद्य पदार्थ सैंपलिंग टीम
नहीं रोक सकते बिक्री
जब तक किसी संस्थान के खाद्य पदार्थ अशुद्ध सिद्ध नहीं हो जाते हैं, उनकी बिक्री पर रोक नहीं लगाई जा सकती। हां यह सही है कि रिपोर्ट आने में करीब एक माह का समय लगेगा, उसके बाद ही इन संस्थानों पर कार्रवाई हो सकेगी।
-डॉ. नरेश बंसल, सीएमएचओ, श्रीगंगानगर
Published on:
17 Oct 2017 09:41 pm
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