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प्रत्या​शियों को चमकाने के लिए फिक्स होते है सीन

Scenes are fixed to make the candidates shine- सोशल मीडिया पर रील वायरल करने के दौरान बच्चों को दुलारना पहले से तय

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प्रत्या​शियों को चमकाने के लिए फिक्स होते है सीन

प्रत्या​शियों को चमकाने के लिए फिक्स होते है सीन

#Rajasthan Assembly Elections 2023 एक समय था, जब चुनाव प्रचार जनसंपर्क, बैनर-पोस्टर से चल जाता था, लेकिन अब स्थिति काफी बदल गई है। अब जनसंपर्क के साथ ही सोशल मीडिया के जरिए लोगों के बीच नायक बनने का प्रयास नेताजी कर रहे हैं। राजनीतिक दलों के अधिकांश नेताओं ने छवि चमकाने का काम सोशल मीडिया पर प्रचार करने वाली टीम को सौंप रखा है। इस टीम के कर्मचारी इमोशनल गानों की रील्स के साथ ही पोस्टर आदि बनाकर मतदाताओं के बीच वायरल कर रहे हैं। नेताजी का उदारवादी चेहरा दिखाना उनकी प्राथमिकता में है। प्रचार के दौरान नेताजी का बुजुर्गों का पैर पड़ना, बच्चों को दुलारना आदि पहले से ही तय रहता है। नेताजी के साथ चल रहा वीडियोग्राफर तुरंत इस पल को क्लिक करता है और उसमें गाने समेत कई चीजों को एड कर नायक की रील वायरल कर दी जाती है।
एक प्रत्याशी के सोशल मीडिया का काम देख रहे शिवम बताते हैं, उम्मीदवार की गतिविधियां उनके वोटरों तक पहुंचाने के लिए बकायदा लाइव तक किए जाते है। प्रत्याशी जिस क्षेत्र का है, उस क्षेत्र के लोगों की लोकेशन के आधार पर बंच तैयार होता है, फिर उन्हें पोस्ट भेजी जाती है। इन लोगों तक पोस्ट पहुंचाने के लिए फेसबुक को भुगतान करते हैं। चुनाव प्रचार के मुकाबले यह राशि कम होती है।
युवाओं की टीम संभाल रही जिम्मेदारी
चुनावी दौर में युवाओं की सोशल मीडिया टीमें काफी एक्टिव है। इस टीम के सदस्यों के पास लैपटॉप, कम्प्यूटर से प्रत्याशियों के वीडियो एडिट कर रहे हैं, मीम्स बना रहे हैं। वीडियोग्राफर-फोटोग्राफर सुबह से उम्मीदवार के साथ हो जाते हैं। उनकी पूरी गतिविधि को कैद करते हैं। जो फोटो, वीडियो बनते हैं, उन्हें एडिट कर सोशल मीडिया के जरिए वायरल करने का काम टीम व उम्मीदवार के समर्थक करते हैं। बार बार सोशल मीडिया प्लेटफार्म पर प्रत्याशी के पक्ष में नुक्कड़ सभाओं को जनसभाओं के रूप में दिखाया जा रहा है। राजनीतिक दलों के स्टार प्रचारकों के वीडियो या रील के माध्यम से प्रत्याशी का नाम जोड़कर वायरल करने का खेल लगातार चल रहा है।
समर्थन देने का थमा नहीं दौर
प्रत्याशियों और उनकी टीमों ने अपने अपने क्षेत्र में सामाजिक, व्यापारिक, धार्मिक और छात्र संगठनों आदि से संपर्क कर उनको अपने पक्ष में लाने के लिए दावे किए जा रहे है। समर्थन देने के लिए बकायदा मंच सजाए जा रहे है। पूरा खर्चा प्रत्याशी की जेब से होता है लेकिन इसे संबंधित संगठन का नाम दिया जा रहा है ताकि चुनाव आयोग की नजर में यह खर्चा प्रत्याशी के खाते में नहीं जुड़ सके। इस समर्थन कार्यक्रम में ज्यादातर प्रत्याशी के कार्यकर्ता पहले से मौजूद होते है, प्रत्याशी के चुनाव निशान के पटका पहनाए जाते हे। सोशल मीडिया के जरिए प्रत्याशी की छवि चमकाने के लिए ऐसे समर्थन का बकायदा लाइव और रील बनाकर वायरल करने पर फोकस किया जाता है।
विरोधी प्रत्याशी पर हर पल निगरानी
सोशल मीडिया का काम देख रही परी शर्मा का कहना है कि उम्मीदवार की छवि को चमकाने के साथ ही उसे बचाना भी है। विरोधी के सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म को ट्रैक किया जाता है। जैसे ही वहां से उम्मीदवार की छवि खराब करने की पोस्ट डाली जाती है, तुरंत उसका काउंटर करती है। कुछ को तो लीगल नोटिस तक थमाए जा चुके हैं। उम्मीदवारों का ध्यान अपनी छवि पर है। छवि को साफ सुथरा व जनता के हितों की ओर ध्यान रखने वाला बताकर पेश किया जाता है। एक पोस्ट तुरंत हजारों लोगों तक पहुंच जाती है। काफी उम्मीदवार इस प्लेटफॉर्म का इस्तेमाल कर रहे हैं।