
सोलर पैनल मुफ्त देने का दावा छलावा साबित हुआ
श्रीगंगानगर.
महंगाई के दौर में बिजली के भारी भरकम बिल से मुक्ति दिलाने के लिए सरकार सोलर पैनल मुफ्त बांटने लगे तो इससे अच्छे दिन भला और क्या होंगे। लेकिन हकीकत कुछ और है। सोशल मीडिया पर पिछले कई दिन से वायरल हो रहे ऐसे दावे को खारिज करने के लिए अब ऊर्जा मंत्रालय को सफाई देकर स्पष्ट करना पड़ा है कि केन्द्र सरकार की ऐसी कोई योजना नहीं जिसमें आवेदन करने पर सोलर पैनल मुफ्त मिल जाए। सोशल मीडिया प्लेटफार्म वाट्सएप पर पिछले कई दिन से एक संदेश तेजी से वायरल हो रहा है।
भारत सरकार के ऊर्जा विभाग की ओर से कथित तौर पर जारी इस संदेश में प्रधानमंत्री के 'अब हर घर होगा रोशन वाक्य के साथ सोलर पैनल मुफ्त प्राप्त करने के बारे में बताया गया है। भारत सरकार की नीति चूंकि सौर ऊर्जा को बढ़ावा देने वाली है, इसलिए लोगों ने इस पर विश्वास कर बड़ी संख्या में रजिस्ट्रेशन करवा दिए। यह सिलसिला अभी भी जारी है।
रजिस्ट्रेशन की प्रक्रिया
वाट्सएप पर वायरल संदेश में सोलर पैनल प्राप्त करने के लिए ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन का तरीका भी बताया गया है। संदेश के साथ एक लिंक दिया गया है जिस पर नाम पता और अन्य जानकारी देने पर मोबाइल फोन पर एक संदेश आता है, जिसमें इस लिंक को दस और लोगों में साझा करने का निर्देश होता है। ऐसा करने के बाद अधिकांश लोगों को यही जवाब मिलता है कि आपने दस लोगों में लिंक साझा नहीं किया। संदेश में यह भी कहा गया है कि रजिस्ट्रेशन होने के बाद आपको तहसील से नि:शुल्क सोलर पैनल मिल जाएगा।
मंत्रालय हुआ गंभीर
इस संदेश के आधार पर रजिस्ट्रेशन करवाने वाले लोगों ने जब तहसील कार्यालयों में मुफ्त सोलर पैनल के बारे में जानकारी मांगी तो उन्हें पता चला कि केन्द्र सरकार की ऐसी कोई योजना नहीं। उसके बाद लोगों ने ऊर्जा मंत्रालय से संपर्क किया तो वहां से भी यही जवाब सुनने को मिला। देशभर से ऐसी जानकारी मांगने वालों का तांता लगने पर अब नवीन और नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय की अवर सचिव सुनीता धेवाल ने संदेश को फर्जी बताया है और कहा कि संदेश में जिस वेबसाइट लिंक का उल्लेख है उसका मंत्रालय से कोई संबंध नहीं। दोषियों की पहचान करने और लिंक को ब्लॉक करने की कार्रवाई मंत्रालय की ओर से की जा रही है।
डेटा जुटाने का प्रयास
सोशल मीडिया के माध्यम से लोगों के व्यक्तिगत डेटा जुटाने का काम भी कई लोग कर रहे हैं। इसके लिए वह ऐसी किसी लोकलुभावन योजना का सहारा लेते हैं, जिससे कि लोग स्वयं से संबंधित तत्काल उपलब्ध करवा दे। इसे सोशल मीडिया का छल कहा जाए तो अतिश्योक्ति नहीं होगी। व्यक्तिगत डेटा जुटाने वाले लोग कुछ राशि खर्च कर बड़ी कमाई करते हैं। व्यक्तिगत डेटा को वह लोग निजी कंपनियों को प्रचार के लिए अथवा राजनीतिक दलों को चुनाव के समय फायदा उठाने के लिए बेचते हैं। राजनीतिक दलों की ओर से पार्टी के प्रचार और चुनावी माहौल बनाने के लिए लोगों के व्यक्तिगत डेटा जुटाने के कई मामले सामने आ चुके हैं।
Published on:
01 Jun 2018 08:24 am
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