
कोहरे के आगोश में लिपटे बॉर्डर पर सजग हमारे प्रहरी
आसमान से टपकती ओस से भीगे वस्त्रों में भी करते हैं सीमा की रखवाली
श्रीगंगानगर. रात का सन्नाटा। कोहरा इतना घना कि हाथ को हाथ दिखाई नहीं दे। आसमान से टपकती ओस से सर्दी से बचाव के लिए मिला कंबल तर हो चुका है। हाथ में पकड़ी एसाल्ट रायफल बर्फ सी ठंडी। इसके बावजूद तारबंदी से कुछ गज दूर खुले में बैठे जवान की नजर उधर टिकी है जहां से राष्ट्रविरोधी तत्व कभी भी घुसपैठ कर सकते हैं।
रजाई में लिपटे हम जब नींद के आगोश में होते हैं तब सीमा सुरक्षा बल के जवान सीमा की रखवाली कर रहे होते हैं। कड़ाके की ठंड और कोहरे की परवाह किए बिना।
श्रीगंगानगर सेक्टर में इन दिनों सीमा सुरक्षा बल के जवानों के लिए कोहरा बड़ी बाधा बना हुआ है। रात में स्थिति ऐसी होती है कि हाथ को हाथ दिखाई नहीं देता। तारबंदी और उसके साथ लगी फ्लड लाइट कोहरे के आगोश में जाकर दिखाई देनी बंद हो जाती है। थर्मल इमेजर जैसे अत्याधुनिक उपकरण भी सीमा पार की गतिविधियों की जानकारी देने में विफल हो रहे हैं तब सीमा की सुरक्षा की जिम्मेदारी जवानों के कंधों पर ही है। घने कोहरे के बावजूद जवान अपने नाके पर बैठे सीमा की ओर नजर गड़ाए रहते हैं।
भीग जाते हैं कंबल
सीमा की सुरक्षा के लिए रात के समय लगने वाले नाकों पर जाने वाले जवानों को सर्दी और ओस से बचाव के लिए कंबल दिया जाता है। कंबल काफी भारी होता है। लेकिन कोहरे के साथ बरसती ओस के कारण आधी रात होते-होते कंबलों की हालत ऐसी हो जाती है जैसे उन्हें पानी में भिगोया गया है।
इसके बावजूद जवान अपने मोर्चे पर डटे रहते हैं। लक्ष्य एक ही होता है सीमा पार से कोई राष्ट्र विरोधी तत्व किसी भी सूरत में इस पार नहीं आ पाए। यहां यह उल्लेख करना जरूरी है कि रात्रिकालीन नाकों के दौरान रोशनी करने की मनाही होती है। ऐसे में ठंड से बचाव के लिए आग तापने जैसी सुविधा से भी जवानों को वंचित रहना पड़ता है।
चाय बनती सहारा
कोहरे और ठंड की परवाह किए बगैर रात्रि के समय सीमा की सुरक्षा में तैनात रहने वाले जवानों के लिए एकमात्र सहारा होती है चाय। सीमा चौकी से उन्हें रात में दो बार चाय की आपूर्ति होती है। चाय पीकर जवान अपने आपको तरोजाजा महसूस करते हैं। बल के अधिकारी बताते हैं कि जवान विषम परिस्थितियों में ड्यूटी के आदी होते हैं।
श्रीगंगानगर सेक्टर में कोहरे की समस्या है तो जैसलमेर सेक्टर में भीषण गर्मी और लू की। बांग्लादेश से सटी सीमा पर अलग परिस्थितियां। सीमा सुरक्षा बल में आने पर जवान को सबसे पहले सीमा की विषम परिस्थितियों से रूबरू करवाया जाता है और फिर उन्हें अलग-अलग परिस्थितियों में रहने के लिए तैयार किया जाता है।
Published on:
04 Jan 2019 12:23 pm
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