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नाम में कुछ खास: राजस्थान के इस कस्बे के 46 लोगों का नाम है सुरेंद्र

शेक्सपीयर के चर्चित नाटक रोमियो-जूलियट से भला कौन अनजान होगा। नाटक की एक लाइन ‘नाम में क्या रखा है’ इतनी मशहूर है कि हमारे यहां भी गाहे-बगाहे आम बोलचाल में प्रयुक्त हो जाती है। हालांकि नीमकाथाना जिले के पौंख कस्बे के लोगों के लिए नाम में बहुत कुछ रखा है।

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महेन्द्र सिंह शेखावत

श्रीगंगानगर। पौंख कस्बे में लोगों की जुबान पर सुरेन्द्र नाम इस कदर चढ़ा है कि कस्बे के एक दो नहीं बल्कि 46 लोगों का नाम सुरेंद्र है। खास बात है कि इस नाम के लोगों में युवाओं से लेकर सीनियर सिटीजन तक शामिल हैं। मतलब यह है कि पुरानी पीढ़ी के साथ नई पीढ़ी भी इस नाम का मोह नहीं छोड़ पाई है। पौंख कस्बे की आबादी करीब नौ हजार है।

इनमें चालीस फीसदी आबादी राजपूत समाज की है और सर्वाधिक सुरेन्द्र भी इसी समाज से हैं। लोगों का मानना है कि सुरेंद्र नाम के लोग ज्यादा भाग्यशाली और समझदार होते हैं।

मजे की बात है कि कस्बे में किसी कार्यक्रम या शादी समारोह में सुरेन्द्र नाम के लोग ग्रुप फोटो करवाने से नहीं चूकते। कस्बे के लोग इनको "S ग्रुप" के नाम से पुकारते हैं। हाल में एक शादी में पांच सुरेन्द्र एक साथ टकरा गए तो ग्रुप फोटो करवा लिया।

पौंख निवासी एक सुरेन्द्रसिंह शेखावत कहते हैं कि दरअसल, हमारे दौर के सभी सुरेन्द्र पढ़ लिखकर अच्छी जॉब पा गए या सेटल्ड हो गए। इसी कारण लोगों में कहीं न कहीं यह धारणा घर कर गई कि सुरेन्द्र नाम के लोग ज्यादा सफल होते हैं। संभवत: इसी मानसिकता के चलते गांव में सुरेन्द्र नाम ज्यादा निकाले गए हैं। सुरेन्द्रसिंह शेखावत खुद गुरुग्राम में एक निजी क्षेत्र में मैनेजर एचआर के पद पर कार्यरत हैं।

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