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पिता की मौत के गम में बेटे ने भी त्यागे प्राण

पिता और बेटे का स्नेह जगजाहिर है। बेटा जब चलना सीखता है तब पिता की ही अंगुली पकड़ता है। पिता उसे कंधों पर बिठाता है, उस पर बेपनाह स्नेह उंडेलता है।

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father and sun death

सादुलशहर.

पिता और बेटे का स्नेह जगजाहिर है। बेटा जब चलना सीखता है तब पिता की ही अंगुली पकड़ता है। पिता उसे कंधों पर बिठाता है, उस पर बेपनाह स्नेह उंडेलता है। उसे विश्वास होता है कि बेटा ही उसके बुढ़ापे की लाठी बनेगा। पिता, पुत्र का सखा भी होता है। समय बीतने के साथ इस रिश्ते में और अधिक प्रगाढ़ता आ जाती है। ऐसे मामले भी सामने आए हैं, जब पिता ने बेटे की जान बचाने के लिए अपनी जिंदगी तक दांव पर लगाई है। यह अनूठा रिश्ता कितना स्नेहिल हो सकता है, इसका अंदाजाशुक्रवार को सादुलशहर में हुई एक घटना से लगाया जा सकता है।

पिता की मृत्यु पर बेटा इतना गमजदा हुआ कि कुछ घंटों बाद वह भी परलोक गमन कर गया। एक ही घर में एक ही दिन दो अर्थियां उठी तो परिजनों पर दु:खों का पहाड़ टूट पड़ा। वहां मौजूद सभी की आंखें नम थीं और एक ही बात थी कि 'श्रवण पुत्र था जो पिता की सेवा के लिए साथ ही चला गया। सादुलशहर के वार्ड नं. 16 निवासी अग्रवाल परिवार में शुक्रवार दो अर्थियां उठी, पिता की सुबह और पुत्र की शाम को। बस स्टेण्ड के पास मोबाइल की दुकान करने वाले सुरेन्द्र कुमार तायल (60) के 80 वर्षीय पिता जगननाथ तायल का शुक्रवार सुबह देहांत हो गया।

परिजन और आस पड़ोसी उनका अन्तिम संस्कार कर घर पहुंचे तो सुरेन्द्र कुमार तायल पिता की जुदाई का गम सहन नहीं कर सका और उसे हार्ट अटैक हो गया। सुरेन्द्र कुमार को सादुलशहर के एक निजी चिकित्सालय में ले जाया गया, जहां प्राथमिक उपचार के बाद उन्हें श्रीगंगानगर ले जाया जा रहा था। उसी दौरान रास्ते में ही उनकी मौत हो गई। एक साथ दो परिजनों के जाने से परिवार पर कहर टूट पड़ा। प्रबुद्ध नागरिक दिनेश गोयल, बाबा सतपाल, कुलदीप गोयल आदि ने परिवार को ढांढस बंधाया। शाम को सुरेन्द्र तायल का गमगीन माहौल में अन्तिम संस्कार कर दिया गया। होनी का खेल देखिए कि एक दिन में पिता और पुत्र की अर्थियां उठ गईं।


1989 में सादुलशहर आया था परिवार
जगन्नाथ तायल सन 1989 में परिवार के साथ अपना पैतृक गांव केसरीसिंहपुर छोड़कर सादुलशहर आ बसे थे। केसरीसिंहपुर में जगन्नाथ तायल खेतीबाड़ी करते थे। उनके दो पुत्र थे जिनमें बड़ा सुरेन्द्र कुमार व छोटा सोमनाथ थे। सादुलशहर में उनके पुत्रों ने साइकिल मरम्मत का कार्य शुरू किया। धीरे-धीरे कारोबार बढ़ता गया, वे टैक्सी भी किराए पर चलाने लगे। साथ-साथ टेलीकॉम का व्यापार भी शुरू कर दिया। सुरेन्द्र तायल के दो पुत्र हैं, जिनमें एक बड़े पुत्र की शादी हो चुकी है। इनके परिवार के शुभम अग्रवाल, दिनेश गोयल व पड़ौसी आदि बताते हैं कि पिता-पुत्र में मित्र जैसा स्नेह था। पिता-पुत्र के एक साथ निधन से हर कोई स्तब्ध है।

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