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महिला दिवस पर विशेष स्टोरी: जैविक खेती की प्रेरणा बनी उर्मिला धारिणया

-महिला सशक्तीकरण की मिसाल,सरहदी गांव मदेरां में किया खेती में नवाचार

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  • श्रीगंगानगर.हर साल 8 मार्च को अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस मनाया जाता है, जो महिला सशक्तीकरण और उनकी उपलब्धियों को सम्मानित करने का एक अवसर है। इस वर्ष, हम आपको जिले के सरहदी गांव मदेरां निवासी उर्मिला धारिणया से मिलवाते हैं। उन्होंने जैविक खेती के क्षेत्र में एक नया अध्याय लिखा है, जिससे न केवल उनकी जिंदगी बदली, बल्कि उनके पूरे गांव में महिला सशक्तीकरण का उदाहरण भी प्रस्तुत किया है।उर्मिला ने 18 बीघा भूमि पर जैविक खेती करने का संकल्प लिया है,जो रासायनिक खादों और जहर से मुक्त है। उनका उद्देश्य उपभोक्ताओं को स्वस्थ और सुरक्षित कृषि उत्पाद प्रदान करना है। वे गेहूं, चना, सरसों, नरमा, मौसमी और माल्टा जैसी विभिन्न फसलों की जैविक खेती कर रही हैं। इसके साथ ही,उर्मिला विपरीत मौसम से निपटने के लिए सहजन और बरमा डेक के पेड़ भी लगा चुकी हैं, जो उनके खेतों को न केवल सुरक्षित रखते हैं, बल्कि पर्यावरण को भी शुद्ध करते हैं।

औषधीय फसलों की तरफ भी रूझान

  • उर्मिला का रुझान औषधीय फसलों की तरफ भी है। उन्होंने ऐलोवेरा के साथ-साथ विभिन्न प्रकार के फूलों जैसे गुलाब, गेंदे और गलेडियस की खेती भी कर रही है। इसके आलावा, वे देशी गायों का पालन, बकरी पालन और मुर्गी व बतख पालन भी करती हैं। गाय के गोबर से बनी केचुआं खाद का उपयोग वह खेतों में करती हैं, साथ ही बायोगैस का उपयोग अपने घर में भी करती हैं जो ऊर्जा की एक स्थायी और स्वच्छ स्रोत है।

ड्रिप सिंचाई पद्धतियों का उपयोग

  • उर्मिला ने अपने खेतों में सोलर पंप, डिग्गी और ड्रिप सिंचाई पद्धति का उपयोग करके न केवल पानी के खर्च को कम किया है,बल्कि उत्पादन भी बढ़ाया है। वे अपने खेतों में काम करने के लिए स्थानीय महिलाओं को प्राथमिकता देती हैं, जिससे ग्रामीण महिलाओं को रोजगार और आत्मनिर्भरता का एक नया अवसर मिल रहा है।

जैविक खेती के लिए किया सम्मानित

  • उनकी कड़ी मेहनत और नवाचार के लिए उर्मिला को मान्यता भी मिली है। उन्हें 2020-21 में जिला स्तर पर जैविक खेती के लिए सम्मानित किया गया और 2022 में स्वामी केशवानंद राजस्थान कृषि विश्वविद्यालय बीकानेर ने किसान सम्मान दिवस पर विशेष पुरस्कार से नवाजा।

महिला सशक्तीकरण की मिसाल

  • महिला दिवस पर उर्मिला धारिणया अपनी कार्यशैली और दृढ़ निश्चय के लिए एक प्रेरणा बनी हुई हैं। वे यह साबित करती हैं कि यदि सोच सही हो,तो किसी भी सांचे में ढलना संभव है। उनकी यात्रा न केवल महिला सशक्तीकरण की मिसाल पेश करती है, बल्कि जैविक खेती को भी एक नई दिशा देती है।

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