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सिस्टम पर खर्चे सवा दो करोड़, बचा एक बूंद भी पानी नहीं

-मुख्यमंत्री जल स्वावलंबन योजना में बनाए थे  

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harvesting system

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श्रीगंगानगर.

शहर में बारिश की एक-एक बूंद जल का संग्रहण कर इसका उपयोग किया जाए। इसके लिए मुख्यमंत्री जल स्वावलंबन योजना चल रही है।शनिवार को द्वितीय चरण के तहत शहरी क्षेत्र के अभियान को पदमपुर स्थित कैप्टन नवपाल सिंह राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय में प्रभारी सचिव शिखर अग्रवाल ने विधिवत रूप से शुरू किया। शहर में 29 सरकारी ऑफिस,स्कूल व कॉलेज, सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता विभाग, एसपी ऑफिस, कलक्ट्रेट ऑफिस परिसर आदि में रूफ टॉप वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम का निर्माण किया गया है। नगर परिषद ने 29 निर्माण कार्यों पर 2 करोड़ 37 लाख 13 हजार रुपए की राशि खर्च की है, लेकिन अभी तक एक भी रूप टॉप वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम से पानी की बूंद की भी बचत नहीं हुई है।


सेवानिवृत बीसीएमओ डॉ. बालकृष्ण पंवार का आरोप है कि श्रीगंगानगर-हनुमानगढ़ जिले में रूफ टॉप वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम कारगर नहीं है।यहां नहरी तंत्र है और सिंचाई पानी की इतनी ज्यादा कमी नहीं है। शहर में बारिश के पानी को संग्रहण कर पीने के काम में नहीं लिया जा सकता है। स्कूलों या कॉलेजों में भी इसका कोई उपयोग नहीं हो रहा है। राज्य सरकार इस योजना के नाम पर यूं ही लाखों रुपए बर्बाद कर रही है। जहां पर बारानी इलाका है, वहां पर योजना कारगर साबित हो सकती है।


आधा-अधूरा निर्माण कार्य
इस स्ट्रक्चर में बारिश का पानी छत से पाइप लाइन के माध्यम से डिग्गी में संग्रहण किया जाता है। डिग्गी का निर्माण कर इस पर एक हैड पंप लगाया जाता है। शहर में कई जगह अभी आधी-अधूरी डिग्गी व पाइप लाइन लिंक करने का काम किया गया है। ठेकेदारों का कहना है कि इस योजना में बजट नहीं मिला है। इस कारण कार्य कंप्लीट नहीं किया है। सार्वजनिक निर्माण विभाग को कार्यकारी एजेंसी बनाया गया है। जहां पर इनका निर्माण हुआ है, वहां के लोग भी इनकी उपयोगिता पर सवाल उठाते हैं। साथ ही इनमें गुणवत्ता का भी कोई ध्यान नहीं रखा गया है।


गमले रखने के लिए मिली जगह
रूफ टॉप वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम स्काउट व गाइड, एसई ऑफिस व कलक्ट्रेट में बना हुआ है। इसके अलावा चार नंबर स्कूल और अनूपम धींगड़ा स्कूल में यह बना है, जिसकी डिग्गी की छत पर गमले रख दिए गए हैं। इसके अलावा इस सिस्टम का कोई उपयोग नहीं हो रहा। वहीं इस मामले में नगर परिषद के सहायक अभियंता मंगत सेतिया का कहना है कि यह राज्य सरकार का अभियान है और विभाग के आदेशानुसार निर्माण कार्य करवाया जा रहा है।


अभी कम मिली है राशि
शहर में प्रथम चरण में 29 निर्माण कार्य मंजूर किए गए। इनमें 13 निर्माण कार्य पूर्ण हुए हैं और कुछ चल रहे हैं, कुछ का निर्माण कार्य अभी तक शुरू नहीं हुआ है। इसमें 52 लाख रुपए की राशि प्राप्त हुई थी। इस राशि का ठेकेदारों को भुगतान कर दिया है। शेष राशि का भुगतान विभाग से मिलने पर ही किया जाएगा।
सुनीता चौधरी, आयुक्त, नगर परिषद, श्रीगंगानगर।

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