श्रीगंगानगर। करीब ढाई घंटे लगातार बैठक होने के बावजूद पट्टे बनाने की फाइलों की संख्या उतनी नहीं निस्तारित हुई जितनी उम्मीद की जा रही थी। प्रशासन शहरों के संग अभियान के तहत नगर परिषद परिसर में एम्पायर्ड कमेटी की बैठक में एक सौ पट्टों बनाने पर सहमति बनी। लेकिन अधिकांश फाइलों के ढेर लगे रहे। एक एक फाइल पर नियमानुसार मालिकाना हक देने के लिए अधिकारियेां ने चर्चा की। जिन भूखंडधारकों के पास दस्तावेज नहीं थे, उन फाइलों की छंटनी कर दी गई।
इस बैठक के दौरान 35 पट्टे कच्ची बस्ती और 65 पट्टे फ्री लीज होल्ड के लिए चयनित किए गए। इस अभियान के तहत नगर परिषद ने करीब 1600 पट्टे बनाए है। गत डेढ़ माह में लगभग ढाई सौ पट्टे बनाए जा चुके है। नगर परिषद आयुक्त विश्वास गोदारा, सभापति करुणा चांडक, वरिष्ठ नगर नियोजक फरसाराम बिश्नोई, पैरोकार प्रेम चुघ, यूडीसी चन्द्रभान, प्रवीण शिवाल आदि मौजूद थे।
इधर, आयुक्त के चैम्बर के बाहर लोग अपने पट्टे बनवाने के लिए इंतजार कर रहे थे। कोई बाबू से तो कोई सहायक कर्मचारी से अपनी फाइल को बिना अड़चन से निस्तारित करने के लिए बार बार पूछ रहा था। कई लोगों ने तो पार्षदों से एप्रोच लगवाई तो अपने परिचितों के माध्यम से अधिकारियों से जुगात करवा रहा था।
इस बीच, कच्ची बस्ती के पट्टे बनाने की प्रक्रिया ढीली होने पर पुरानी आबादी के वार्ड पार्षद बंटी वाल्मीकि और आयुक्त गोदारा के बीच नोंक झोंक हो गई। आयुक्त का कहना था कि सीमित स्टाफ होने के बावजूद पिछले चालीस दिनों में ढाई सौ से अधिक पट्टे बनाने में सफल रहे है।
इस पर पार्षद वाल्मीकि का कहना था कि पूरे शहर में नगर परिषद की ओर से करीब डेढ़ हजार पट्टे बनाए गए है, इसमें कच्ची बस्ती के सिर्फ 35 पट्टों को चयनित किया गया है, अन्य वार्डो की तुलना में यह अनुपात काफी कम हैं। शहर में 13 कच्ची बस्तियां है लेकिन अब तक सिर्फ 35 पट़टों पर सहमति बनी हैं। इस पार्षद के शोर मचाने से एक बारगी माहौल तनावपूर्ण हो गया। लेकिन बीच बचाव करते हुए समझाइश की गई।