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श्री गंगानगर

अफसरों के तबादले पर हावी कोर्ट का स्टे ऑर्डर

Stay order of the court dominates the transfer of officers- अब सीएमएचओ के एपीओ आदेश पर लगाई रोक

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श्रीगंगानगर। जिला मुख्यालय पर किसी न किसी सरकारी महकमे में ऊंचे ओहदे पर कार्यरत अधिकारियों ने अपने तबादले रुकवाने के लिए जनप्रतिनिधियों से सिफारिश कराई लेकिन पार नहीं पड़ने पर स्थानान्तरण के आदेश की पालना करने की बजाय हाईकोर्ट की चौखट पर पहुंच गए। जिला मुख्यालय पर राजकीय जिला चिकित्सालय में पीएमओ और कलक्ट्रेट परिसर में रसद विभाग में डीएसओ की कुर्सी पिछले सवा दो महीने में खूब सुर्खियों में रही है। अब सीएमएचओ का मामला भी हाईकोर्ट पहुंचा। इलाके में मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डा. मनमोहन गुप्ता को आखिरकार राजस्थान उच्च न्यायालय ने अंतरिम राहत दे दी है।

राज्य के चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग ने पिछले दिनों सीएमएचओ रहे डा. मनमोहन गुप्ता को एपीओ कर दिया था। डा.गुप्ता अपने प्रतीक्षा नियुक्ति के आदेश के खिलाफ राजस्थान उच्च न्यायालय जोधपुर की शरण ली। स्थगन याचिका में डा. गुप्ता ने चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग के राज्य शासन सचिव, चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग और पंचायत राज स्वास्थ्य के संयुक्त सचिव,चिकित्सा एवं स्वास्थ्य सेवाएं जयपुर के निदेशक और इसी विभाग के संयुक्त निदेशक बीकानेर को पक्षकार बनाया।
वकील देवीलाल रावला के अनुसार इस याचिका में डा. गुप्ता का कहना था कि वह चूरू जिले के तारानगर सीएचसी के प्रभारी के तौर पर कार्यरत था, जिसे सरकार ने 3 अगस्त 2022 को उसे श्रीगंगानगर सीएमएचओ के पद पर नियुक्त किया गया था। लेकिन 1 मार्च 23 को उसे प्रतीक्षारत पदस्थापना आदेश में रखा गया है। इस एपीओ के आदेश करने में कोई कारण नहीं बताया गया। यह आदेश राजस्थान सेवा नियम, 1951 के नियम 25-ए के तहत दिए गए निर्देशों के विपरीत है। हाईकोर्ट जस्टिस ने आगामी सुनवाई होने तक एपीओ आदेश के प्रभाव और संचालन पर रोक लगाने के आदेश जारी किए।

विदित रहे कि राजकीय जिला चिकित्सालय में पीएमओ की कुर्सी भी विवादों में रही। जब पीएमओ डा. बलदेव सिंह चौहान को यहां से नागौर जिले के जायल उपजिला चिकित्सालय के लिए तबादला किया गया तो वे हाईकोर्ट की चौखट तक पहुंच गए। वहीं जिला कलक्टर ने डा.केएस कामरा को कार्यवाहक पीएमओ बना दिया। हाईकोर्ट से स्टे मिलते ही चौहान फिर चिकित्सालय में अपनी कुर्सी पर आकर बैठ गए। लेकिन राज्य सरकार ने अपनी किरकिरी को साफ करते हुए कामरा को पीएमओ के रूप में अधिकृत आदेश जारी कर दिया। अब चौहान को भी जायल की बजाय जिला मुख्यालय पर चिकित्सालय में चिकित्सक के पद पर कार्य करने के लिए सरकार ने आदेश जारी किए है।
वहीं, पिछले महीने जिला रसद अधिकारी राकेश सोनी को हाईकोर्ट से अभयदान मिला था। डीएसओ की कुर्सी को लेकर प्रवर्तन अधिकारी सुरेश कुमार और राकेश सोनी के बीच विवाद कोर्ट तक पहुंचा था। पहले प्रवर्तन अधिकारी सुरेश कुमार को स्टे मिला तो उन्होंने कार्यवाहक डीएसओ के पद हासिल कर लिया। वहीं राज्य के खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति विभाग ने सोनी का तबादला हनुमानगढ़ कर दिया था। इस आदेश के खिलाफ सोनी भी हाईकोर्ट की शरण में चले गए थे। कानूनी दावपेंच के दौरान आखिरकार हाईकोर्ट ने इन दोनों के बीच विवाद का निपटारा करते हुए निर्णय दिया था कि सोनी फिर से जिला रसद अधिकारी और सुरेश कुमार को प्रवर्तन अधिकारी बने रहेंगे।