श्रीगंगानगर। अखिल राजस्थान महिला एवं बाल विकास संयुक्त कर्मचारी संघ ने विभिन्न मांगों को लेकर आंगनबाडी केन्द्र की मानदेय कार्मिकों ने रोष मार्च निकाला और कलक्ट्रेट पर प्रदर्शन कर अपना हक मांगा। आशा सहयोगिन संघ की प्रदेशाध्यक्ष सीता स्वामी की अगुवाई में इन महिलाओं ने अभी अभी एर्जेन्ट करो, हमें परमानेंट करो के नारों से राज्य कार्मिक का दर्जा देने की मांग दोहराई। कलक्ट्रेट के अंदर पहुंचकर नारेबाजी का दौर जारी रहा। इसके बाद जिला कलक्टर सौरभ स्वामी, एडीएम प्रशासन डा. हरितिमा को ज्ञापन भी दिया। आंगनबाड़ी कार्यकर्ता संघ की जिलाध्यक्ष मंजू स्वामी का कहना था कि आंगनबाड़ी केन्द्रों पर पोषहार की आपूर्ति की जा रही है, वह करीब चार से पांच महीने देरी से हो रही है। जितना भी आंगनबाड़ी केन्द्रों पर पोषाहार आ रहा है वह घटिया क्वालिटी का है। इस पोषाहार को खाने से बीमार होने की अधिक आंशका बनी हुई है। पोषाहार के पैकेट में दलिया को जितना भी पानी में डालकर आग पर उबलो इसके बावजूद वह खाने लायक नहीं है। आधा पका रह जाता है। इस संबंध में कलक्टर को अवगत भी कराया, अब जांच की मांग की जा रही है।
इससे पहले प्रदेशाध्यक्ष सीता स्वामी ने रोष प्रकट करते हुए कहा कि राज्य की गहलोत सरकार ने वर्ष 2018 में आंगनबाड़ी केन्द्र में कार्यरत महिलाओं को राज्य कार्मिक का दर्जा देने का वायदा किया था। लेकिन अब सरकार आनाकानी कर रही है। करीब पौने दो लाख महिला कार्मिकों के परिवारिक सदस्य की संख्या जोड़ दी जाएं तो यह आंकड़ा चार से पांच लाख रुपए तक पहुंच जाएगा। चुनाव में समीकरण बनाने और बिगाड़ने जैसे हालात किए जा सकते है। वि भिन्न राज्यों में आंगनबाड़ी केन्द्र की महिलाओं को दस से पन्द्रह हजार रुपए मासिक मानदेय है, इसके अनुरुप अभी तक घोषणा नहीं की है। इसके अलावा महिला पर्यवेक्षकों के पदों में ग्राम साथिन के पचास प्रतिशत पद आर क्षित करने, एएनएम भर्ती में आशा सहयोगिन और आंगनबाड़ी कार्यकर्ता के लिए पन्द्रह प्रतिशत आरक्षण का कोटा तय करने, गर्म पोषाहार में 45 पैसे की जगह पचास रुपए करने, आशा सहयोगिनों के मानदेय में पन्द्रह प्रतिशत की वृदि्ध को लागू करने की मांग की गई।
इस मौके पर मंजू स्वामी, गीता स्वामी, कविता, नीलम, कांता, किरण, रोशनी, कुलविन्द्र, गुरप्रीत कौर, केसरदेवी, कुलविन्द्र कौर, चूनावढ़ की रमनदीप कौर, नीलम, परमजीत कौर, मोनिका, मंजू, रवीन्द्र पाल कौर आदि मौजूद थी।