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साइकिल से स्कूल तक सफर करने में शिक्षक भी पीछे नहीं, नियमित साइकिलिंग से युवा भी होने लगे प्रेरित

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 cycling to school

साइकिल से स्कूल तक सफर करने में शिक्षक भी पीछे नहीं, नियमित साइकिलिंग से युवा भी होने लगे प्रेरित

श्रीगंगानगर। नियमित साइकिल चलाने से पूरे शरीर का व्यायाम हो जाता है। यह न केवल सर्वोत्तम व्यायाम है, अपितु खर्च भी बचाता है। बहुत से लोग चाहकर भी साइकिल नहीं चला पाते। लोग क्या कहेंगे, क्या सोचेंगे आदि बातों की कल्पना करते हैं। वे साइकिल चलाने का इरादा छोड़ देते हैं। साइकिल चलाने को एक व्यायाम के रूप में अपनाइए तो इसके ढेर सारे लाभ होते हैं। जिनके घुटने के जोड़ दु:खते हैं या शरीर में जकडऩ महसूस होती है, वे अनिवार्य रूप से एक घंटे साइकिल चलाएँ।

जरूरी नहीं है कि सडक़ों या मैदानों में जाकर ही यह कार्य करें। चाहें तो घर के किसी कमरे में साइकिल को स्टैंड पर खड़ी करके सीट पर बैठ जाएँ तथा पैडल मारें, इससे घुटनों का अच्छा व्यायाम हो जाता है तथा जोड़ खुलने लगते हैं। पैरों की पिंडलियों की मांसपेशियाँ भी मजबूत बनती हैं। साइकिल की सवारी बच्चे से लेकर बुजुर्ग तक मनपंसदीदा सवारी है। साइकिल चलाने के लिए लाइसेंस की जरूरत नहीं पड़ती और यह बाकी साधनों से कहीं ज्यादा सुरक्षित है। इलाके में चुनिंदा लोगों ने साइकिल को दुपहिया या चौपहिया वाहनों से अधिक महत्व मानते हुए उसकी सवारी अब तक नहीं छोड़ी, विश्व साइकिल दिवस पर ऐसे चुनिंदा लोगों से साइकिल सवारी के बारे में अनुभव सांझा किए है।
सूरतगढ़ क्षेत्र गांव 1 डीबीएन बी निवासी शिक्षक इन्द्राज की आयु 55 साल हो चुकी है। नियमित रूप से गांव भगवानगढ़ के राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय में अध्यापन के लिए साइकिल से आवाजाही करते है। इस शिक्षक का कहना है कि पहले तो परिवारिक सदस्य और पड़ौसी साइकिल से आवाजाही को सिरदर्द मानते थे लेकिन उनके स्वास्थ्य के लिए यह सवारी कारगर साबित हुई है। गांव से स्कूल की दूरी चार किमी है, आवाजाही में आठ किमी का सफर हो जाता है। पहले गोलूवाला क्षेत्र और सूरतगढ़ क्षेत्र के गांव के सरकारी स्कूल तक पहुंचने के लिए वे चार किमी पैदल दूरी तय करते थे।
इसी इलाके के गांव ढाबां झल्लार निवासी राकेश गोदारा भी गांव भगवानगढ़ के राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय में शिक्षक है। पिछले दो सालों से वे भी इस स्कूल से अपने घर तक आवाजाही के लिए साइकिल से दूरी तय करते है। वर्ष 2008 में जैसलमेर में पहली पोस्टिंग मिली तो वहां भी ग्रामीण क्षेत्र के सरकारी स्कूल तक आठ किमी का सफर साइकिल से करते थे। तबादले के बाद यहां अपने गांव आए लेकिन साइकिल के पैडल मारना नहीं भूले है।
इधर, उम्र 75 साल के बुजुर्ग होने के बावजूद साइकिल से सवारी से मोह भंग नहीं हो पाया है। ऐसा है शख्स है श्रीगंगानगर जिला मुख्यालय पर विनोबा बस्ती निवासी और व्यापारी द्वारका प्रसाद सारस्वत। इनकी आयु 75 साल हो चुकी है लेकिन साइकिल की सवारी से मोह नहीं छोड़ा है।
इस बीच भरतनगर निवासी गुरदीप सिंह पिछले करीब चालीस साल से साइकिल की सवारी नियमित करते है। अंग्रेजी दवाईयों की होलसेल दुकान के संचालक होने के कारण उनको शहर में अलग अलग इलाके से दवाइयों की दुकान से ऑर्डर लाने के लिए रोजाना निकलना पड़ता है।

प्रतिदिन चार से सात घंटे की सवारी होने से वे साठ किमी का सफर कर लेते है। कॉलेज शिक्षा के दौरान साइकिलिंग में नेशनल स्तर की प्रतियोगिता में हिस्सा ले चुके गुरदीप सिंह अपने अनुभवों के बारे में बताया कि वे साइकिल पर चार बार बीकानेर का सफर पूरा चुके है। श्रीगंगानगर से बीकानेर की ूदूरी साइकिल पर उन्होंने 7 घंटे 27 मिनट में पूरी की है।