
पुरानी धानमंडी की 100 दुकानों के पिड़ आवंटन पर आखिर लगी मुहर
श्रीगंगानगर. आखिरकार पिछले छह साल से पुरानी धानमंडी की एक सौ दुकानों के पिड़ों के आवंटन का रास्ता बहाल हो गया है। राज्य सरकार ने जयपुर में एम्पायडज़् कमेटी में इस आवंटन को हरी झंडी दे दी। नगर परिषद आयुक्त सचिन यादव खुद इस कमेटी के समक्ष पेश हुए थे।
उन्होंने बताया कि जिन दुकानदारों ने राशि जमा कराई थी उसमें से दस दुकानों के आवंटन का मामला इस कमेटी के समक्ष पहुंचा था। इस कारण जयपुर में इस कमेटी की बैठक में वे खुद पेश हुए।
यादव ने बताया कि कमेटी ने अब तक जमा कराई गई राशि संबंधित दुकानदार और अन्य शेष रहे दुकान संचालकों को पिड़ों के आवंटन करने की मंजूरी दे दी गई है। इस संबंध में अगले दो दिनों में मिनट्स आएंगे।
इसके आधार पर ही आवंटन की प्रक्रिया शुरू की जाएगी। इससे नगर परिषद के सरकारी खजाना को करीब 70 करोड़ रुपए का राजस्व मिलने की उम्मीद है।
छह साल पहले नगर परिषद प्रशासन ने 33 दुकानदारों की ओर से जमा कराई गई राशि करीब 6 करोड रुपए के बावजूद पट्टे जारी नहीं किए। दुकानदार सेल डीड जारी करने पर अड़े थे जबकि शिकायतकताज़् का कहना था कि नियमानुसार लीज डीड जारी होनी चाहिए।
लीज डीड से हर साल दुकानदार लीज राशि करीब पचास हजार रुपए जमा करवाने के लिए पाबंद रहेंगे। इस संबंध में आयुक्त यादव ने भी स्वीकारा कि इस पहलू के संबंध में एम्पायडज़् कमेटी ने इसके लिए स्वायत्त शासन विभाग को अधिकृत किया है।
डीएलबी से ही सेल डीड या लीज डीड के आदेश आएंगे। इस बीच, पुरानी धानमंडी में पिड़ों के आवंटन के नाम पर दुकानदारों से लिए गए रुपयों का मामला प्रधानमंत्री ऑफिस तक पहुंचा हुआ है।
पूवज़् पाषज़्द गौड़ ने पीएमओ को ज्ञापन प्रेषित कर अवगत कराया था कि नगर परिषद के अधिकारियों ने पुरानी धानमंडी के पिड़ों के आवंटन के नाम पर दुकानदारों से अवैध रूप से रुपए वसूल किए हैं।
जबकि नगर परिषद के पास पुरानी धानमंडी के पिड़ों के आवंटन से संबंधित किसी भी प्रकार के दस्तावेज या उच्चाधिकारियों के आदेश मौजूद नहीं था। गौड़ ने डीएलबी और एसीबी में भी शिकायतें कर रखी है।
इधर, पुरानी धानमंडी में पिड़ों के आवंटन की प्रक्रिया शुरू होने के बाद करीब चार साल पहले नगर परिषद के तत्कालीन आयुक्त करतार सिंह पूनियां ने दावा किया था कि पुरानी धानमंडी के पिड़ नगर परिषद की संपति है।
इस संपति को बिना अनुमति इस्तेमाल नहीं किया जा सकता। इस कारण उन्होंने नगरपरिषद के अधिकारियों की टीम बनाकर पुरानी धानमंडी में करीब 57 दुकानों के आगे पिड़ों की पैमाइश कर वीडियोग्राफी कराई।
साथ ही दुकानदारों से कहा भी गया कि दुकानों के आगे पिड़ों पर रखे सामान को हटा लें अन्यथा नगरपरिषद की ओर से जल्द ही दुकानों के आगे रखे सामान को जब्त किया जाएगा।
इन दुकानदारों ने अपना सामान तो नहीं हटाया लेकिन सरकार ने आयुक्त का जरूर तबादला कर दिया था। वहीं, पुरानी धानमंडी की इन दुकानों के आगे 16 फीट में बरामदे बनाए हुए है। इन बरामदों के एवज में नगर परिषद अब डीएलसी की दर से वसूल करेगी।
ये बरामदे लोगों की आवाजाही के लिए बनवाए गए थे लेकिन दुकानदारों ने अपनी संपति बना लिए थे। आयुक्त ने बताया कि एम्पयाडज़् कमेटी ने बरामदों के एवज में राशि वसूलने के निदेज़्श जारी किए है।
दुकानों के आगे चालीस फीट का पिड् का आवंटन भी दुकानदारों को दिया जाएगा।
इधर, नगर परिषद आयुक्त सचिन यादव ने बताया कि पुरानी धानमंडी के पिड़ों के आवंटन का मागज़् प्रशस्त हो गया है।
इन पिड़ों के आवंटन से करीब 60 से 70 करोड़ रुपए का राजस्व मिल सकेगा। दुकानदारों को लीज डीड या सेल डीड देने के संबंध में डीएलबी को यह अधिकार दिया है।
डीएलबी से आदेश आने के बाद ही संबंधित दुकानदारों को सेल या लीज डीड जारी कर सकेंगे। स्टेट लेवल की एम्पायडज़् कमेटी में लंबे समय बाद पिड़ों का आवंटन में अटके कानूनी पहलूओं को दूर किया गया है।
Published on:
01 Oct 2021 05:01 pm
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