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जीपीडीपी रिफ्रेशर प्रशिक्षण : खाने-खिलाने का चला दौर, विकास योजना गोल

ऐसे तो कैसे बनेगा ग्राम विकास की बेहतर योजना

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Food and feeding went round, development plan fail

Food and feeding went round, development plan fail

देर से आओ, लड्डू-बाटी खाओ, थोड़ी देर चर्चा करो और घर जाओ...। ये हकीकत जिले में ग्राम पंचायत विकास योजना निर्माण के लिए जीपीडीपी रिफ्रेशर प्रशिक्षण की है, जहां पर खानापूर्ति कर सरकारी धन बर्बाद किया जा रहा है। जिले में पंचायत समिति स्तर पर ब्लॉक स्तरीय अधिकारियों एवं पंचायत समिति सदस्यों के प्रशिक्षण की पड़ताल की तो यह सच्चाई खुलकर सामने आ गई।

पंचायत के जिन चुने हुए जनप्रतिनिधियों को बुलाया था, उनकी ही शत-प्रतिशत उपस्थिति नहीं रही। सरकारी अफसरों ने भी प्रशिक्षण से गच्चा मारकर शेष काम पूरा कर दिया। यहां पंचायत समिति बांसवाड़ा के दफ्तर में आयोजित प्रशिक्षण की सुबह से शाम तक हकीकत जानी तो कई खामियां सामने आई।

4 अफसर, 12 नेताजी, हो गया प्रशिक्षण


बांसवाड़ा पंचायत समिति क्षेत्र में कुल 23 पंचायत समिति सदस्य हैं, जिनमें से 12 ही पहुंचे। ब्लॉक स्तरीय अधिकारियों में भी संख्या चार ही थी। इसमें भी कृषि विभाग एवं आईसीडीएस के अधिकारी ही थे, वे भी दोपहर बाद निकल गए। चिकित्सा, बिजली, जलदाय, शिक्षा जैसे महत्वपूर्ण विभागों के अधिकारी ही नही पहुंचे। प्रशिक्षण में संदर्भ व्यक्ति का काम भी बीडीओ दलीप सिंह, सीडीपीओ उर्वशी व्यास, पंचायत प्रसार अधिकारी श्यामलाल धानका, अरविन्द भट्ट, जेईएन बीएस चौहान ने जानकारी देकर औपचारिकताएं पूरी कर दी।

12 बजे तक तो इक्का-दुक्का


प्रशिक्षण का स्थल टीएडी का सभागार तय था, लेकिन वहां अन्य बैठक होने से पंचायत समिति में ही प्रधान के कक्ष में कुर्सियां लगाकर प्रशिक्षण शुरू कर दिया। स्थल को लेकर भी दोपहर तक गफलत रही। बारह बजे तक तो गिनती के जनप्रतिनिधि व अफसर ही थे। यहां भी मिट्टी की जांच कैसे की जाए, चौदहवें वित्त आयोग के प्रावधान, आंगनवाडिय़ों की स्थिति जैसी जानकारियां तो दी गई, लेकिन जिस मकसद से ये प्रशिक्षण था, उसकी तस्वीर नजर नहीं आई। पंचायत समिति सदस्य चंद्रेश देवड़ा ने दोपहर बाद पहुंचे। उनसे पूछा तो बताया कि सुबह दस बजे आया था, लेकिन कोई था ही नहीं तो वापस लौट गया था।

चार बजे तक खाने-खिलाने का दौर


प्रशिक्षण में प्रधान दूधालाल भी नजर नहीं आए। यहां प्रोजेक्टर, एलसीडी, माइक जैसी कोई व्यवस्था नहीं थी। दोपहर करीब 2 बजकर 50 मिनट पर लंच शुरू हुआ, जिसके बाद करीब चार बजे तक खाने-खिलाने का दौर चला। 4 बजकर 23 मिनट पर प्रशिक्षण स्थल का जायजा लिया तो यहां गिनती के सदस्य एवं दो पीओ ही बैठे हुए थे। शेष कुर्सियां खाली पड़ी थी।

दो दिवसीय प्रशिक्षण ये बजट


- चाय-नाश्ता, भोजन- 130 रुपए प्रति व्यक्ति दो दिन।
-संभागियों व संदर्भ व्यक्तियों के आने-जाने का किराया- 50 रुपए प्रति व्यक्ति
-पठन, सामग्री, स्टेशनरी, फोल्डर, किट- 60 रुपए प्रति व्यक्ति
-संदर्भ व्यक्तियों का मानदेय- 500 रुपए प्रति व्यक्ति, 6 सदंर्भ व्यक्ति, दो दिन।
- आयोजन व्यय विविध- 6050 रुपए

इनका कहना है...


विकास अधिकारी दलीप सिंह ने बताया कि प्रशिक्षण के लिए सदस्यों एवं अधिकारियों को उपस्थित होने के लिए कह दिया था। दूरभाष से भी जानकारी दी थी। दूसरे दिन व्यवस्थाएं पुख्ता की जाएंगी।

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