
भविष्य की दिखी तस्वीर, घर-आंगन में बिखरी लाडो की मुस्कान
महेंद्र सिंह शेखावत
ाष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वेक्षण-5
श्रीगंगानगर. राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वेक्षण-5 के ताजा आंकड़ों में प्रदेश में प्रति हजार पुरुषों के पीछे महिलाओं की संख्या 1009 हो गई है, जो पांच साल पहले हुए सर्वे से 36 ज्यादा है। आधी दुनिया के आगे होने का यह ग्राफ प्रदेश के 33 में से 28 जिलों में हैं। सिर्फ तीन जिले ही ऐसे हैं जहां संख्या घटी है जबकि दो में यथावत रही है। सर्वाधिक लिंगानुपात के मामले में अकेले जिले की बात करें तो भीलवाड़ा सबसे आगे है, जहां प्रति हजार पुरुषों के पीछे 1069 महिलाएं हैं जबकि जयपुर सबसे पीछे है। यहां यह आंकड़ा 944 ही है। पांच साल के तुलनात्मक आंकड़ों के मामले में जोधपुर सर्वाधिक आगे है जबकि उदयपुर सबसे फिसड्डी रहा है। बाड़मेर एवं करौली जिलों में भी वृद्धि बाकी जिलों के मुकाबले कम हुई है।
टॉप पांच जिले
नाम 2019 2015 अंतर
-21 -16
जोधपुर 1042 952 90
हनुमानगढ़ 1015 928 87
धौलपुर 1002 917 85
बांसवाड़ा 1056 983 73
बूंदी 1002 930 71
फिसड्डी पांच जिले
नाम 2019 2015 अंतर
-21 -16
उदयपुर 998 1043 45
दौसा 986 1016 30
सवाईमाधोपुर 999 1001 02
टोंक 987 987 00
भरतपुर 970 970 00
(करौली एवं बाड़मेर में भी उल्लेखनीय वृद्धि नहीं हुई है। प्रति हजार पुरुषों पर करौली में पांच साल में आठ जबकि बाड़मेर में छह महिलाओं की संख्या बढ़ी है।)
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राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वेक्षण आंकड़ों को एकदम सच तो नहीं माना जा सकता है लेकिन यह सच के बेहद करीब हैं। 0 से छह वर्ष का लिंगानुपात भी सुधर रहा है। जागरुकता के कारण यह आंकड़ा सुधरा है। -राजन चौधरी, सामाजिक कार्यकर्ता,
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राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वेक्षण आंकड़ों को एकदम सच तो नहीं माना जा सकता है लेकिन यह सच के बेहद करीब हैं। 0 से छह वर्ष का लिंगानुपात भी सुधर रहा है। जागरुकता के कारण यह आंकड़ा सुधरा है। -राजन चौधरी, सामाजिक कार्यकर्ता,
Published on:
29 Dec 2021 07:01 pm
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