श्रीगंगानगर। इलाके में लगातार बरसात का दौर रहने से सड़कों पर लगाए पेचवर्क उखड़ चुके हैं तो कई जगह सीवर ठेका कंपनी एलएंडटी की ओर से मरम्मत के नाम पर सड़कें एकाएक धंसने लगी है। वाटर लाइन बिछाने की आड़ में चार से पांच महीने पहले बनी सड़कों को फिर से खोदा जा रहा है। The roads of the city again became dilapidated, the patchwork got washed away in the water
पुरानी आबादी के कब्रिस्तान से लेकर पटाखा फैक्ट्री एरिया में सड़कों को वाटर लाइन के नाम पर उखाड़ा जा रहा है। इधर, ब्लॉक एरिया और जवाहरनगर क्षेत्र में पेचवर्क उखड़ गए है। बरसाती पानी के ठहराव के कारण शहर के मुख्य मार्गो को खोदकर छोड़ा जा रहा है। गंगासिंह चौक से लेकर रेलवे स्टेशन तक सड़क पर वाटर लाइन बिछाई गई, इसके उपरांत वहां सड़क की मरम्मत भी कराई गइ लेकिन यह सड़क अब धंस चुकी है। यही हाल भगतसिंह चौक से गंगासिंह चौक तक का हाल है।
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रवीन्द्र पथ आरयूआईडीपी के लिए पिछले ढाई महीने से प्रयोगशाला बना हुआ है। भगतसिंह चौक से लेकर बीरबल चौक तक रवीन्द्र पथ के दोनों छोर पर खुदाई गई लेकिन इसे वापस मरम्मत करने की बजाय ठेका कंपनी ने भूला दिया है। इस रोड से जनप्रतिनिधियों के अलावा जिला प्रशासन, यूआईटी, नगर परिषद सहित कई महकमों के अधिकारी रोजाना आवाजाही करते है लेकिन सड़क की सुध लेने के लिए किसी को फुर्सत तक नहीं है।
गौशाला मार्ग, सुखाडि़या मार्ग, गगन पथ, अग्रसेननगर चौक एरिया, सेतिया कॉेलोनी, प्रेमनगर, बसंती चौक एरिया, पुरानी आबादी टावर रोड आदि क्षेत्र में सडक़ निर्माण सामग्री में डामर तो पानी लगते ही बिखर चुका है और वहां ग्रिट इस कदर बिखरी हुई है कि फिसलन से वाहन आए दिन वहां पलटते पलटते बचते है। सुखाडि़या सर्किल पर तो सडक़ के बीचोंबीच गड्ढे हो चुके है। यहां दुपहिया वाहन चालको के लिए दुर्घटना का सबब बन गई है। रात के समय स्ट्रीट लाइट खराब रहने पर इस रोड से गुजरना किसी जोखिम से कम नहीं है।
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इधर, इंदिरा कॉलोनी में पिछले छह माह से सड़क बनाने का लोग इंतजार कर रहे है। इस एरिया में सीवर ठेका कंपनी ने वाटर लाइन बिछाने के नाम पर सड़कें खोदी थी। लेकिन ठेका कंपनी की मनमर्जी अधिक हावी हो चुकी है कि जनप्रतिनिधियों की कई बार शिकायत के बावजूद सुनवाई नहीं हो रही। उधर, नेहरानगर में शहर के प्रथम चरण में बिछाई गई लाइनों का अब तक इस्तेमाल तक नहीं किया गया है तो वहीं दूसरे चरण में बिछाई जा रही सीवर लाइन के नाम अनियमितताएं अधिक है।
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करीब चार महीने पहले इंदिरा वाटिका के आगे से वाटर लाइन बिछाई गई। इंटरलोकिंग टाइल्स भी उखाड़ी गई लेकिन इसे दुरुस्त कराने के दौरान ठेकेदार ने इंदिरा वाटिका के कॉर्नर का एक गडढा दुरुस्त नहीं किया। इस गडढे से आए दिन दुर्घटना होने का अंदेशा बना रहता है। ऐसे में सडक़ों के बीच में जो चैम्बर डाले गये हैं, इन चैम्बरों का लेवल भी ठीक नहीं है। कई-कई जगह पर चैम्बर सडक़ से आधा फुट से लेकर डेढ़ फीट तक ऊंचे हैं, जिस कारण इन सडक़ों पर किसी भी प्रकार का आवागमन नहीं हो सकता है।