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लगातार तीसरी पीढ़ी भामाशाह बनकर निखार रही विद्यालय की आभा

-दादी ने पति की स्मृति में अपनी जमीन पर विद्यालय बनाकर प्रशासन को सौंपा तो पिता ने करवाया जीर्णोद्धार -अंग्रेजी विद्यालय के रूप में क्रमोन्नत होने पर उसी विद्यालय के जीर्णोद्धार की उठाई जिम्मेदारी

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भुवनेश चुघ

अनूपगढ़. आजादी के कुुछ वर्षों बाद जब क्षेत्र में पढ़ाई को लेकर क्षेत्र के नागरिक इतने गंभीर नहीं थे उस समय नागपाल परिवार की एक महिला ने शिक्षा के क्षेत्र में योगदान देना शुरु किया जो आज उनकी तीसरी पीढ़ी भी निभा रही है। नागपाल परिवार की महिला कौशल्या देवी ने सन 1971 में अपने पति सेठ बूलचंद नागपाल की स्मृति में अपनी ही भूमि पर विद्यालय बनाकर प्रशासन को सुपुर्द किया था। इसके बाद 1994 में इस विद्यालय को उच्च प्राथमिक स्तर पर क्रमोन्नत किया गया। विद्यालय में कमरों एवं अन्य व्यवस्थाओं की आवश्यकता पड़ी तो इस बार कौशल्या देवी के पुत्र चिरंजी लाल नागपाल ने भामाशाह की भूमिका निभाते हुए विद्यालय में आवश्यक विकास कार्य करवाए।

शिक्षा के क्षेत्र में करवाए गए कार्यों के बाद प्रशासन की तरफ से उन्हें भामाशाह पुरस्कार से सम्मानित किया गया। अब वर्तमान में उक्त विद्यालय को महात्मा गांधी राजकीय अंग्रेजी माध्यम विद्यालय के रूप में चुना गया है। अब भी इसी परिवार से चिरंजी लाल नागपाल के पुत्र विद्यालय की सभी आवश्यक चीजों को पूरा करवाने में आर्थिक सहयोग करेंगे।

——-नामांकन कम होने की वजह से कर दिया गया था मर्ज—

कांग्रेस नेता प्रकाश सिंह जोसन ने बताया कि विभाग की तरफ से महात्मा गांधी विद्यालय के रूप में उक्त विद्यालय को चुने जाने के बाद जिला प्रमुख के निर्देशानुसार विद्यालय में व्यवस्थाएं देखी। उन्होंने बताया कि छात्र संख्या कम होने के कारण 2014 में इस विद्यालय को अन्य विद्यालय में मर्ज कर दिया गया तब से यह विद्यालय बंद पड़ा था। हालांकि इसके दो कमरों में दो वार्ड के आंगनबाड़ी केंद्र चलाए जा रहे थे,लेकिन अन्य कमरों का उपयोग नहीं लिया जा रहा था। विद्यालय में बने कमरों की छतें कमजोर हो गई और फर्श टूट गए। शौचालय की हालात भी बद से बदतर हुई पड़ी थी। जोसन ने बताया कि उन्होंने इस स्थिति से जिला प्रमुख को अवगत करवाया। उन्हीं के निर्देशानुुसार भामााशाहों से सम्पर्क करने की कड़ी में नागपाल परिवार के ही पवन नागपाल से सम्पर्क किया और उन्हें अवगत करवाया कि अब यह विद्यालय अंग्रेजी माध्यम के रूप में दुबारा शुरू किया जाएगा। विद्यालय के जीर्णोद्धार के लिए सहयोग की आवश्यकता है। उन्होंने सहर्ष प्रस्ताव को स्वीकार करते हुए न सिर्फ सभी व्यवस्थाएं करवाकर देने का भरोसा दिलाया बल्कि काम भी शुरू करवा दिया। जोसन ने बताया कि उनके एवं पवन नागपाल के साथ सीबीइओ ने भी विद्यालय का अवलोकन किया।

इस प्रकार निखरेगी विद्यालय की आभा

दानदाता पवन नागपाल ने बताया कि विद्यालय की सभी कक्षाओं के फर्श तथा छतों की मरम्मत करवाई जाएगी। विद्यालय परिसर में एक साइकिल स्टैंड़,पार्क,प्रार्थना स्थल बनाया जाएगा। विद्यालय में ठंड़े पानी,हवा बिजली की पर्याप्त व्यवस्थाएं माकूल करवाई जाएंगी। उन्होंने बताया कि काफी समय से इस भवन का उपयोग नहीं हो पा रहा था। खुशी की बात है कि उनकी दादी ने जिस उद्देश्य के लिए भूमि दान में दी थी वह पूरा हो सकेगा। अंग्रेजी माध्यम का विद्यालय बनने से गरीब वर्ग के लोग भी अपने बच्चों को अंग्रेजी माध्यम में शिक्षा दिलवा पाएंगे। विद्यालय के विकास में किसी प्रकार की कमी नहीं आने दी जाएगी।