श्रीगंगानगर. अनूपगढ़ को नया जिला बनाने की घोषणा के बाद हर क्षेत्र में विकास होने के आसार बने हैं। वहीं लोगों को सस्ता और सुलभ न्याय मिल पाएगा। ऐसे में वकील समुदाय के लिए यह नई सौगात है। अनूपगढ़ जिले में नई अदालतों की स्थापना होगी। इससे कानूनीविदों की ज्यादा जरूरत पड़ेगी। कोर्ट को संचालित करने के लिए न्यायिक अधिकारियों और न्यायिक कर्मियों की भर्ती भी करनी होगी। वहीं, उन लोगों को भी राहत मिलेगी जिन्हें विशेष अदालतों में सुनवाई के लिए हर पेशी पर श्रीगंगानगर जिला मुख्यालय पर आना पड़ता था। ऐसे में करीब ढाई सौ किमी की दूरी तय करनी पड़ती थी। अब समय और धन की बचत होगी। अनूपगढ़ क्षेत्र के लोगों को अधिक राहत मिलेगी। इसके साथ साथ अधिकारियों को भी हर मीटिंग या सुनवाई या अन्य सरकारी कामकाज के लिहाज से अनूपगढ़ से श्रीगंगानगर के बीच दूरी तय करनी पड़ रही थी।
नए जिले अनूपगढ़ में 12 अदालतें संचालित हैं। इसमें अनूपगढ़ में पांच अदालतें हैं। एडीजे की दो कोर्ट, एसीजेएम, ग्राम न्यायालय व जेएम कोर्ट हैं। इसी प्रकार घड़साना में तीन अदालतें संचालित हैं। इसमें एडीजे, एसीजेएम और जेएम कोर्ट हैं। श्रीविजयनगर में एक मात्र जेएम कोर्ट है। वहीं, रायसिंहनगर में एडीजे कोर्ट, एसीजेएम कोर्ट और जेएम कोर्ट कुल तीन हैं। सीएम की घोषणा के अनुरूप रायसिंहनगर में एक और एडीजे कोर्ट खोलने की घोषणा की गई है, ऐसे में नए जिले में अदालतों की संख्या 13 हो जाएगी।
नए जिले में आगामी समय में जिला एवं सत्र न्यायालय, अपर जिला एवं सत्र न्यायालय, मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट, पोक्सो प्रकरणों की स्पेशल कोर्ट, मादक पदार्थों के मामलो की एनपीडीपीएस कोर्ट, महिला अत्याचारों के संबंध में स्पेशल महिला एवं उत्पीडऩ निवारण अदालत, अनुसूचित जाति जन जाति अत्याचार निवारण न्यायालय, मोटर दुर्घटना दावा अधिकरण, श्रम न्यायालय, कंज्यूमर फोरम कोर्ट, किशोर न्याय बोर्ड के अलावा चेक बाउंस प्रकरणों की स्पेशल कोर्ट आदि नई अदालतें खुलने का मार्ग प्रशस्त हुआ है। अदालतों में प्रकरणों की सुनवाई के लिए अपर लोक अभियोजकों, विशिष्ट लोक अभियोजकों, लोक अभियोजकों, संबंधित स्टाफ आदि की भर्तियां भी होंगी।
बार संघ के पूर्व अध्यक्ष चरणदास कम्बोज के अनुसार हर जिले की अपनी भौगोलिक स्थिति होती है। उसके अनुरूप कामकाज का क्षेत्र विभाजित होता हैं। लेकिन नया जिला बनने के बाद जिला स्तरीय अदालतों की स्थापना होने से श्रीगंगानगर जिला मुख्यालय पर केस कम आएंगे। यहां जिला मुख्यालय पर मौजूदा समय में विशेष अदालतों जैसे पोक्सो एक्ट, एससीएसटी एक्ट, बाल अपचारियों जैसे विचाराधीन प्रकरणों में करीब चालीस प्रतिशत अनूपगढ़, रायसिंहनगर, घड़साना और रावला क्षेत्र से संबंधित हैं। इन मामलो को अनूपगढ़ में सुनवाई शुरू हो जाएगी तो यहां के केस अंतरित हो जाऐंगे। ऐसे में संबंधित प्रकरणों की पैरवी कर रहे अधिवक्ता को यहां के बजाय अनूपगढ़ क्षेत्र में जाना पड़ेगा या पैरवी छोडऩी पड़ सकती है। इलाके के वकील समुदाय के लिहाज से यह नई चुनौती है। वहीं आमजन की बात करें तो नया जिला बनने से सस्ता और सुलभ न्याय मिल पाएगा।