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दुनिया का सबसे खूबसूरत शब्द ”मां”

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 mother's day 2019

दुनिया का सबसे खूबसूरत शब्द ''मां''

मातृत्व दिवस विशेष......

-मिट्टी के चूल्हे बनाकर और सिलाई कर बेटों को किया कामयाब
-पति की सड़क हादसे में दुर्घटना के बाद बच्चों को कामयाब करने की संभाली जिम्मेदारी।

अनूपगढ.दुनिया का सबसे खूबसूरत शब्द, पता है क्या है... सृजन। और इस खूबसूरत शब्द को खूबसूरत आकार देती है, दुनिया की सबसे खूबसूरत कृति, जिसे हम मां कहते हैं। मां ही है, जो इस दुनिया में जीवन का सृजन करती है, और खुद भी नए रूप में सृजित होती है। ईश्वर ने इस महान कार्य के लिए सिर्फ औरत को चुना है, जो सृजन के बाद उस ईश्वर का ही रूप होती है, जन्मदाता बनकर। कई अवसरों पर औरत के सामने विपरीत परिस्थितियां आती हैं लेकिन उन विपरीत परिस्थितियों में भी हार नहीं मानकर अपने बच्चों को कामयाब करने के लिए लगातार प्रयासरत रहती है।

ऐसा ही एक उदाहरण श्रीगंगानागर जिले के अनूपगढ़ मे साक्षात् है।जहां एक महिला ने अपनी पति की सड़क हादसे में मृत्यु होने के बाद विपरीत परिस्थितियों का सामना किया और अपने दो बेटों को पढ़ा लिखा कर सरकारी नौकरी लगवाई।शहर के वार्ड नम्बर 21 निवासी जसवीर कौर के पति गुरजंट सिंह की 1994 में एक सड़क हादसे में मृत्यु हो गई थी। इस खबर ने पूरे परिवार को तोड़ सा दिया था। इस हादसे के समय इनके दो बेटियां तथा दो बेटे अभी अविवाहित थे।

इनमें से सबसे छोटा बेटा मात्र 11 वर्ष का और एक बेटा 16 वर्ष का था ।जसवीर कौर ने बताया कि उनके पति की मृत्यु से पहले उनकी फर्नीचर की दुकान थी तथा घर की आर्थिक स्थिति अच्छी थी लेकिन धीरे धीरे परिस्थितियां विपरीत होती गई और उन्हें दुकान बन्द करनी पड़ी।लेकिन उन्होंने इन विपरीत परिस्थितियों का प्रभाव उनके बच्चों पर नहीं पड़ने दिया।उन्होंने बच्चों की लगातार पढ़ाई जारी रखवाई।इस दौरान घर चलाने तथा बच्चों की पढ़ाई पूरी करने के लिए उन्होंने मिट्टी के चूल्हे बनाए तथा लोगों के कपड़ों की सिलाई की।

इस दौरान उन्हें बहुत विपरीत परिस्थितियों का सामना करना पड़ा।लेकिन उन्होंने हिम्मत नहीं हारी।उनकी मेहनत रंग लाई और उनके बड़े बेटे अमृतपाल पनेसर ने शारदा विद्या निकेतन में पढ़ाना शुरू किया और जसवीर कौर ने छोटे बेटे को पढ़ने के लिए शारदा विद्यालय में ही लगाया।लेकिन जसवीर कौर के लिए लक्ष्य अभी दूर था।

----घर मे आई खुशियां
जसवीर कौर के बड़े बेटे अमृतपाल पनेसर ने शारदा स्कूल में पढ़ाने के साथ शारदा स्कूल के प्रधानाचार्य राजबहादुर सिंह के निर्देशन में अध्यापक पद के लिए तैयारी की।जसवीर कौर की दुआएं तथा अमृतपाल की मेहनत रंग लाई 14 मार्च 2005 को इनका चयन तृतीय श्रेणी अध्यापक के लिए हुआ।लेकिन जसवीर कौर अपने बेटों को बड़े पद पर देखना चाहती थी।उन्होंने सदा ही अपने बेटों को पढाई के लिए प्रेरित किया।

अमृतपाल का चयन 5 मई 2005 को द्वितीय श्रेणी अध्यापक के लिए हो गया।इन्होंने प्रयास जारी रखे और 26 जुलाई 2007 को हिंदी के व्याख्याता बने और गांव 14 एपीडी में कार्यवाहक प्रधानाचार्य के पद पर भी रहे।जसवीर कौर ने अपने बेटों की तरक्की के लिए कड़ा संघर्ष किया। अमृतपाल 1 जनवरी 2013 को सर्व शिक्षा अभियान में जिला स्तरीय अधिकारी बने । 05 सितंबर 2018 को इन्हें जिला स्तर सम्मानित किया गया। 09 सितंबर 2019 को अमृतपाल ने प्रधानाचार्य पद पर पदोन्नति प्राप्त कर राउमावि आकली बाड़मेर में कार्यग्रहण किया। यहां इन्हें उपखण्ड स्तर पर सर्वश्रेष्ठ प्रधानाचार्य के रूप में सम्मानित किया गया।

स्काउट गाइड के लिए राष्ट्रपति से सम्मानित हुए।वर्तमान में जसवीर कौर के पुत्र अमृतपाल सूरतगढ़ में अतिरिक्त मुख्य ब्लाक शिक्षा अधिकारी के पद पर कार्यरत है।इसी बीच 2017 में जसवीर कौर के छोटे पुत्र अमरजीत पनेसर भी भौतिक विज्ञान के व्याख्याता बन गए ।इस समय अमरजीत बाड़मेर जिले के मालू राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय रामसर में बच्चों को शिक्षित कर रहे है।

----बेटों के साथ साथ बहू को भी पढ़ाया
बड़े बेटे अमृतपाल की शादी के समय उनकी पत्नी ने स्नातकोत्तर तक पढ़ाई की हुई थी।शादी के बाद ससुराल आकर राजनीति विज्ञान में एम ए किया,बी एड की तथा नेट की परीक्षा पास की।इस समय सुखदीप कौर भी फर्स्ट ग्रेड टीचर की तैयारी कर रही है।

----बहुत मुश्किल समय था वह
जसवीर कौर ने बताया कि 1994 से 2002 तक का समय बहुत मुश्किल था। अपने पति की मृत्यु के बाद उनके लिए उनके बच्चे ही सब कुछ थे।इनके लालन पालन के लिए वह मिट्टी के चूल्हे बनाकर बेचती थी उन्होंने बताया कि एक महीने में सिर्फ 12-15 चूल्हे बिकते थे इसके अलावा वह लोगों के कपड़े सिलती थी तथा खेतों में नरमा कपास की चुगाई भी की है लेकिन आज जब अपने बच्चों को कामयाब हुआ देखती है तो उन्हें अपने बच्चों पर गर्व होता है।

-----कभी पिता की कमी का नहीं होने दिया अहसास
जसवीर कौर के दोनों पुत्र बताते है कि 1994 में जब उनके पिता की मृत्यु हुई तो उनके घर पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा था।लेकिन उनके मां का संघर्ष ही था कि आज हम इस मुकाम पर पहुंचे है। अमृतपाल ने कहा कि मां ने विपरीत परिस्थितियों में मुझे एम ए अंग्रेजी,एम ए हिंदी,बीएससी ,बी एड नेट तथा सेट करवाई तथा उनके भाई को भी बीएड के साथ उच्च शिक्षा दिलाई।उन्होंने कहा कि उनकी मां ने कभी उन्हें पिता की कमी नहीं महसूस होने दी।

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