
judo gold medalist sumandeep
अनूपगढ़(श्री गंगानगर) अन्तरष्ट्रीय स्तर पर गोल्ड मेडल लाकर देश का नाम रोशन करने वाली प्रतिभाए सरकारी सुविधाए नही मिलने के कारण दम तोड़ रही है। ऐसा ही एक प्रतिभा के सरकारी सहायता नही मिलने के मामला अनूपगढ क्षेत्र में भी प्रकाश में आया है। तहसील क्षेत्र के गांव 27 एपीड़ी में गरीब किसान की बेटी सुमनदीप ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर जुडो में गोल्ड मेडल लेकर परचम लहराया है।
लगातार 4 वर्षों से सुमनदीप इस क्षेत्र में कड़ी मेहनत कर रही है उनकी इस मेहनत रंग लाई और पिछले वर्ष उन्होंने जुडो में गोल्ड मेडल जीत कर परिवार इलाके तथा देश का नाम रोशन किया। परिवार गरीब होने के कारण सुमनदीप अपनी प्रतिभा के साथ न्याय नही कर पा रही थी,जिसकी जानकारी कम्बोज समाज को मिली तो यू एस ए में कार्यरत एक परिवार ने उसे एक लाख रुपए सहायता राशि दी जिसके बाद सुमनदीप थाईलैंड खेल खेलने गई और सबकी उम्मीदों पर खरा उतरटे हुए उसने गोल्ड लाकर देश का नाम रोशन किया।
अब सुमनदीप रेसलर बनना चाहती है लेकिन साधन समपन्न नही होने के कारण गरीबी सुमनदीप की राह में रोड़ा बन रही है। समनदीप ने लगाई केंद्रीय मंत्री के समक्ष गुहार केंद्रीय मंत्री अर्जुन राम मेघवाल के अनूपगढ़ आगमनपर अनुदान हेतु मांगपत्र दिया गया था। लेकिन सरकार द्वारा अभी तक कोई सहायता नही दी गई है। यह तय है किअगर सरकार द्वारा या किसी संस्था द्वारा आर्थिक सहायता दी जाती है।तो वह विश्व में देश का नाम रोशन करेगी।
खेलकूद के प्रशिक्षण में बिके घर के गहने सुमनदीप के पिता ने बताया कि सुमनदीप का गोल्ड मैडल जितने का सपना था। इसलिए उन्होंने घर के गहने व अन्य सामान बेचकर समनदीप की इच्छा की पूर्ति के लिए सुमनदीप को प्रशिक्षण दिलवाया। इसके बाद सुमनदीप को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर खेलने हेतु भेजा। परन्तु सुमनदीप सिल्वर मैडल ही ला पाई।इस बार समाज के सहयोग से सुमनदीप को भेजा गया।इस बार सुमनदीप ने अपना सपना सच कर दिखाया है।
बेटी के लिए काफी कठनाइयों का सामना कर चुके गरीब किसान बलविंद्र सिंह सुमनदीप की दास्तां बताते हुए काफी भावुक हो गए। क्या पूरे नही होंगे सुमनदीप के अरमान इसके अलावा सुमनदीप पढ़ाई व खेलकूद के साथ साथ अपने पिता के साथ खेती का काम भी करती है। अपनी माता के साथ घर के काम मे भी हाथ बंटाती है। सुमनदीप ने आठवी तक कि पढ़ाई गांव के ही सरकारी स्कूल में की है। सुमनदीप जंगल मे से होकर चार किलोमीटर पैदल चलकर स्कूल जाती थी।
सुमनदीप बच्चों को जुडो कराटे सिखाकर स्नातक की पढ़ाई कर रही है। सुमनदीप ने बताया कि अब वह रेसलर बनना चाहती है। परंतु उसकी तैयारी हेतु फीस काफी है। जिसे वह भरने में असमर्थ है। क्या सरकारी सुविधाए नही मिलने के कारन सुमनदीप की प्रतिभा दब कर रह जाएगी ? क्या सुमनदीप की प्रतिभा के साथ न्याय नहीं होगा? क्या सुमनदीप खेल के क्षेत्र में अपना लोहा मनवाने के बाद भी घर का चौका चूल्हा संभालेगी।
सुमनदीप का खेल जीवन हाल ही में 30 जनवरी 2018 को हैंडो फेडरेशन ऑफ इंडिया साउथ चैंपियन शिप द्वारा थाईलैंड में आयोजित 9 देशों की प्रतियोगिता में देश का प्रतिनिधित्व करते हुए सुमनदीप ने अफ गानिस्तान की खिलाड़ी को चित कर गोल्ड मेडल हासिल किया था। इससे पूर्व वर्ष 2013-14 में थाइलैंड में आयोजित हैंडो फेडरेशन ऑफ इंडिया वल्र्ड़ चैम्पियनशिप में कांस्य पदक लिया पाया था।
अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर खेलने के बावजूद सुमनदीप कौर को कोई सरकारी सहायता नही प्राप्त हुई, इसके बावजूद गोल्ड मेडल लेने के सपने के साथ सुमनदीप कौर ने अपना अभ्यास जारी रखा। और २०१७-१८ में सुमनदीप को हैंडो फेडरेशन ऑफ इंडिया में गोल्ड मेडल लेने का दुबारा मौका मिला। थाइलैंड में ही आयोतिज इस प्रतियोगिता में गोल्ड मेडल लेकर देश तथा समाज का नाम रोशन किया। अब सुमनदीप रेसलर बनने के लिए तैयारी कर रही है।
Published on:
26 Apr 2018 01:49 pm
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