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Video: राजस्थान रोडवेज के अस्तित्व पर सवाल

- लोक परिवहन निगम की बढ़ती बसों तथा अवैध परिवहन से बढ़ता घाटा,- वर्ष 2014 के बाद नहीं मिली अनूपगढ़ आगार को नई बस

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question on roadways status

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अनूपगढ़, राजस्थान राज्य पथ परिवहन निगम के अनूपगढ़ आगार में पिछले कई वर्षों से बसों का इजाफा नहीं हुआ है। हालांकि कुछ समय पूर्व अनुबंध के तौर पर जरूर बसें अनूपगढ़ आगार को मिली हैं, लेकिन दूसरी ओर दर्जन भर से अधिक बसें नकारा घोषित कर दी गई हैं। इसके विपरीत क्षेत्र की आबादी नियमित रूप से बढ़ रही है, ऐसे में अगर यही स्थिति जारी रही तो आने वाले कुछ ही समय में रोडवेज बसें लोगों की नजरों से ओझल हो जाएंगी।

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इस मामले में एक सच यह भी है कि क्षेत्र के 29 ग्राम पंचायतों के सैंकड़ों गांवों में परिवहन की सुविधा उपलब्ध कराने के लिए अनूपगढ़ आगार की ओर से बसों का संचालन नहीं किया जाता। ग्रामीण क्षेत्र के लोग आज भी रोड़वेज सुविधा से वंचित हैं। जिसके चलते लोग अवैध वाहनों का सहारा लेकर गंतव्य स्थान पर पहुंच रहे हैं। चौंकाने वाली बात यह है कि 2013 के बाद अनूपगढ़ आगार में एक भी नई बस नहीं आई है, जबकि दर्जन भर बसें नकारा (15 बसें ) साबित कर दी गई हैं, ऐसे में आवाजाही के लिए रोड़वेज में सुरक्षित यात्रा पर भी सवालिया निशान खड़े हो गए हैं।

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लगातार घटती निगम की बसें

वर्ष 2014 में अनूपगढ़ आगार को मिली बसों को अनूपगढ़ से जम्मू, अनूपगढ़ से जयपुर , खाजूवाला से भ्ठिंडा तथा अनूपगढ़ से दिल्ली के रूट पर लगाया गया था। उसके बाद से निगम में नई बस नहीं आई हैं। इससे पूर्व लगातार अनूपगढ़ आगार को बस मिलती रही है। जानकारी के अनुसार अनूपगढ़ आगार में वर्ष 2008 मॉडल की 2 बसे, 2009 मॉडल की 7 बसें, 2010 मॉडल की 17 बसें, 2012 मॉडल की 12 बसें, 2013 मॉडल की 11 बसें, तथा 2014 मॉडल की 4 बसे हैं।

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हैरानी की बात यह है कि वर्ष 2013 में अनूपगढ़ आगार में 72 बसें थी, इनमें से केवल 2 बस अनुबंधित थी। इसके विपरीत वर्ष 2018 में अनूपगढ़ आगार में निगम के पास 68 बसें है, जिनमें 17 बसें अनुबंधित है। निगम की 15 बसें खटारा होकर डिपो में खड़ी हैं। आने वाले कुछ ही समय में 2 बसें और निर्धारित किलोमीटर पूरे करने वाली हैं, जिनकी जानकारी विभाग ने उ'चाधिकारियों को दे दी है। लगातार कम होती निगम की बसों से ऐसा लगता है कि आने वाले दिनों में रोडवेज की बसे सड़क पर दिखना बन्द हो जाएंगी और रोड़वेज का पूर्णतया निजीकरण हो जाएगा।

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