Video: पांव छूए तो छलक पड़ी आंखें, आखिर चालीस साल बाद विवाद खत्म

- संपति विवाद में तीन भाईयों ने लोक अदालत में किया राजीनामा

By: सोनाक्षी जैन

Published: 10 Feb 2018, 04:18 PM IST

 

श्रीगंगानगर। सैशन कोर्ट में जब नरेश जैन ने अपने बड़े भाई विजय जैन के पांव छूएं तो उनकी आंखें छलक उठी। जैन पेट्रोल पंप के संचालक नरेश जैन और उनके दो भाईयों के बीच पिछले चालीस साल से पैतृक संपति विवाद कोर्ट में चल रहा था। शनिवार को राष्ट्रीय लोक अदालत में जिला एवं सत्र न्यायाधीश नरसिंह दास व्यास ने जब दोनों पक्षों के राजीनामे के फैसले पर अपनी मुहर लगाई तो यह परिवार एक दूसरे के गले मिलकर पिछली गलतियां और आरोप-प्रत्यारोप को भूलाने में लग गया।

 

सैशन जज व्यास के समक्ष ही जैन बंधुओं ने अपने पैतृक संपतियों का बंटवारा करने और भविष्य में मुकदमेंबाजी का संकल्प भी लिया। हालांकि इस परिवार के बीच राजीनामा पिछले साल हो चुका था लेकिन राजीनामे पर अंतिम मुहर नहीं लग पाई थी, इस कारण यह मामला फिर से अटक गया था। लेकिन शनिवार को जैसे ही सैशन जज ने डिक्री का फैसला किया तो पक्षकार नरेश जैन, विजय जैन और प्रदीप जैन तीनों भाई एक साथ गलबांहे डालते नजर आए।

 

साब, आप ही कुछ करो हमारी मदद

सैशन जज के समक्ष किसी वकील के माध्यम से अपनी बात करने की बजाय खुद ही गुहार लगाई। कोई अपने बिजली बिल अधिक आने के मामले को लेकर सैशन जज व्यास से अपनी बात कर रहा था तो कोई अपनी पैतृक संपति विवाद में अब तक आई अड़चन के संबंध में कानूनी हवाला देकर मार्गदर्शन ले रहा था।

 

शनिवार सुबह ग्यारह बजे से लेकर दोपहर तीन बजे तक यह सिलसिला जारी था। सैशन जज के साथ अधिवक्ता अजय मेहता और नरेन्द्र सकलानी भी सदस्य के रूप में सहयोग देने में लगे थे। इस दौरान आए पक्षकारों की बातें सुनकर उनको आपसी राजीनामे के लिए प्रेरित करने में कोई कसर नहीं छोड़ी जा रही थी।

 

 

पूरे परिवार ने एडीजे रणवाह का किया शुक्रिया

अपर जिला एवं सत्र न्यायालय संख्या एक में भी राष्ट्रीय लोक अदालत का आयेाजन किया गया। इस कोर्ट में अग्रसेननगर की एक प्रोपर्टी को लेकर एक ही परिवार के ११ सदस्येां में इतना विवाद था कि दो पक्ष हो गए और इन्होंने कोर्ट में वाद दायर कर दिया। इस परिवार को समझाने के लिए कई बार रिश्तेदारों ने समझाने का प्रयास भी किया लेकिन माने। आखिर शनिवार को एडीजे सुनील रणवाह ने जब इन पक्षकारों के बीच सुलह कराई तो चंद देर नहीं लगी।

 

इस परिवार ने अपनी जिद्द छोडक़र राजीनामे करने का प्रण लिया। उसी समय परिवार की महिलाअेां को कोर्ट में बुलाया गया। पूरे परिवार के साथ रिश्तेदारों का जमावड़ा लग गया। इस विवाद को निपटाने में परिवारिक सदस्यों ने एडीजे रणवाह का शुक्रिया अदा किया। इस पर सैशन जज ने भी एडीजे रणवाह की पीठ थपाकर उनको बधाई दी।

 

 

तलाक लेने आई थी, गृहिस्थी बसाने को किया राजी

फैमिली कोर्ट में कई महिलाएं अपने पति से तलाक लेने आई थी, इस संबंध में अलग अलग सात विवाह विच्छेद की याचिका भी दायर की हुई थी। इन पत्रावलियों को निस्तारण के दौरान फैमिली कोर्ट के स्पेशल जज एलडी किराडृ और काउसंलर परमजीत कौर ने जब समझाइश का दौर शुरू किया तो माहौल बदल गया।

 

इस कोर्ट में सात दंपतियो को राजीनामे के जरिए गृहस्थ जीवन बसाने के लिए आर्शीर्वाद दिया गया। स्पेशल जज किराडृ का कहना था कि आपसी बातचीत से ही समस्या का हल हो सकता है। एक दूसरे के खिलाफ आरोप प्रत्यारोप से उन बच्चों का भविष्य खराब हो जाता है जो दपंतियों के है। एेसे दपंती अपने व्यक्तिगत जिदद की बजाय परिवार के बारे में सोचे।

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