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Video: तीन महीने से नहीं मिल रहा वेतन, अब आया मजदूरों में आक्रोश

- तीन माह से मजदूरी नही मिलने से श्रमिको ने की हड़ताल - वर्षो से नही दी सीपीएफ की जानकारी

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worker strike in suratgarh thermal

worker strike in suratgarh thermal

सूरतगढ़ थर्मल। निर्माण प्रक्रिया के अंतिम चरण में चल रही 660-660 मेगावाट की सातवीं आठवी सुपर क्रिटिकल इकाईयो में काम कर रहे मजदूरों को पिछले तीन माह से मजदूरी भुगतान नही किये जाने के विरोध में बुधवार को मजदूरों ने कार्य बहिष्कार करते हुये हड़ताल रखी एवम धरने पर बैठ गये। श्रमिको के बुलावे पर सुपर क्रिटिकल इकाई पहुंचे टिब्बा क्षेत्र संघर्ष समिति के संयोजक राकेश बिशनोई ने बताया कि निर्माण कम्पनियां मजदूरों का शोषण कर रही है। उन्होंने बताया कि परियोजना के निर्माण कार्यो में विभिन्न कम्पनियो में लगे करीब 3500 मजदूरों को विगत अक्टूबर माह से मजदूरी का भुगतान नही किया गया है।

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जिसके कारण उनको खाने पीने के लाले पड़ गए है। उन्होंने कहा कि स्थानीय मजदूर तो घर परिवार के सहयोग से गुजर बसर कर रहे है लेकिन अन्य प्रदेशों से आये मजदूरों की हालत दयनीय हो गई है। उधारी में राशन नही मिलने से परिवार के भूखे मरने की नौबत आ गई है। उन्होंने बताया कि इसके अलावा वर्षो से काम कर रहे श्रमिको की मजदूरी से हर माह कम्पनियो द्वारा सीपीएफ की राशि काटी जा रही है लेकिन आज तक उनको सीपीएफ खाता संख्या नही दी गई है।

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इसके अलावा वर्षो से मजदूरों को उनके सीपीएफ राशि की जानकारी उपलब्ध नही करवाई जा रही है। बिशनोई ने धरना स्थल पर मजदूरों को सम्बोधित करते हुए कहा कि इस अबकी बार ऐसी व्यवस्था की जाएगी जिसके तहत प्रत्येक मजदूर संघर्ष समिति को अपने बकाया भुगतान ओर सीपीएफ राशि की जानकारी उपलब्ध करवा दे। इसके पश्चात भेल एवम उत्पादन निगम प्रशासन द्वारा इनके भुगतान की पुख्ता व्यवस्था करने के बाद ही मजदूर वापस काम पर जाएगा।

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बंधुवा की तरहां लिया जा रहा है काम

श्रमिक नेता मांगी वर्मा ने धरना स्थल पर सम्बोधित करते हुए कहा कि अन्य प्रदेशों से आये मजदूरों के साथ बंधुआ मजदूरों का सा व्यवहार किया जा रहा है। महीनों मजदूरी भुगतान नही होने से मजदूर छोड़कर भी नही जा पाता। शिकायत करने पर उसकी मजदूरी जपत करने की धमकी दी जाती है। उन्होंने कहा कि स्थानीय मजदूरों को भी काम से हटाने की धमकी देकर डराया जा रहा है।इसके अलावा कार्य स्थल पर पर्याप्त सुरक्षा उपकरण उपलब्ध नही करवाने से मजदूर हादसे का भी शिकार होते है। फ़ोटो-सुपर क्रिटिकल इकाईयो में धरने पर बैठे मजदूर।

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