श्रीगंगानगर. देर रात इलाके में एकाएक मौसम बदल गया। जिला मुख्यालय पर गुरुवार रात सवा ग्यारह बजे तेज आंधी चलने से बिजली आपूर्ति ठप हो गई। आसमान में बादल छाए रहे। वहीं मौसम में आए बदलाव ने सूरतगढ़ तहसील के कई गांवों में हुई ओलावृष्टि ने खेतों में पकी किसान की उम्मीद धराशायी हो गई। कुदरत के इस कहर से पकाव की चौखट पर खड़ी सरसों, गेहूं और चने की फसल को दस-पंद्रह मिनट हुई ओलावृष्टि से काफी नुकसान हुआ है। प्रशासन ने ओलावृष्टि प्रभावित इलाके में सर्वे के आदेश संबंधित तहसीलदारों को दिए हैं।
इलाके में सुबह से आसमान पर बादलों का डेरा था। कभी बादल छितराए हुए दिखे तो कभी पूूरा आसमान बादलों से ढका नजर आया। मौसम में आए बदलाव का नजारा शाम को सूरतगढ़ तहसील में देखने को मिला। सिद्धूवाला व इसके आसपास के इलाके में पहले तेज हवा चली, जिससे गेहूं की फसल जमीन पर बिछ गई। उसके बाद ओलावृष्टि का दौर शुरू हुआ जो दस मिनट से भी ज्यादा समय तक चला। बेर के आकार के ओलों ने सर्वाधिक नुकसान सरसों की फसल को पहुंचाया। पकी हुई सरसों की फलियां ओलों की मार से जमीन पर बिखर गई।
आसमान पर बादलों की आवाजाही के बाद गुरुवार शाम को सूरतगढ़ सुपर तापीय परियोजना क्षेत्र में कहीं हल्की बारिश हुई तो कहीं ओलावृष्टि ने किसानों की उम्मीदों पर पानी फेर दिया। शाम 5 बजे के करीब निकटवर्ती गांव कालूसर की दक्षिणी रोही व एटा पंचायत सहित आसपास के खेतों में करीब दस मिनट तक चने के आकार के ओले गिरे। कालूसर के किसान काशी राम ने बताया कि 10 से 15 मिनट तक हुई ओलावृष्टि से खेतों में पककर खड़ी सरसों की फलियां बिखर गई। वहीं गेहूं की बलिया व चने की फसल को भी नुकसान हुआ है।इसके अलावा परियोजना की आवासीय कॉलोनी सहित निकटवर्ती गांव सोमासर, रायांवाली आदि में भी हल्की बारिश हुई है।
बीमा कंपनी को दें सूचना
ओलावृष्टि से जिन किसानों की फसलों को नुकसान पहुंचा है उनसे इसकी जानकारी बीमा कंपनी को देेने की अपील जिला कलक्टर सौरभ स्वामी ने की है। उन्होंने बताया कि प्रभावित किसानों को इसकी सूचना तीन दिन के भीतर बीमा कंपनी को उसके टोल फ्री नंबर पर या ऐप पर देनी होगी। ओलावृष्टि से बर्बाद हुई फसल की फोटो भी दे सकते हैं। सूचना मिलने के दस दिन के भीतर बीमा कंपनी के कर्मचारी सर्वे के लिए पहुंच जाएंगे।