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एमएसपी की राह में अटकी फसल,मंडियों में इंतजार करते किसान

इस प्रकार दोनों जिलों में कुल उत्पादन 25.25 लाख मीट्रिक टन के आसपास पहुंच गया। इसके विपरीत भारतीय खाद्य निगम (एफसीआई) और अन्य खरीद एजेंसियां अब तक केवल 13.50 लाख मीट्रिक टन गेहूं की ही खरीद कर सकी हैं।

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Sri Ganganagar. Pile of wheat lying under the shed in the new grain market of Sri Ganganagar

Sri Ganganagar. Pile of wheat lying under the shed in the new grain market of Sri Ganganagar

श्रीगंगानगर.देश के प्रमुख अन्न भंडारों में शामिल श्रीगंगानगर-हनुमानगढ़ क्षेत्र में इस बार गेहूं की बंपर पैदावार हुई, लेकिन सरकारी खरीद की रफ्तार किसानों की उम्मीदों पर खरी नहीं उतर पाई। खेतों में लहलहाई फसल अब मंडियों और गोदामों के बीच अटक गई है। हजारों किसान ऑनलाइन पंजीकरण कराने के बावजूद अपनी उपज एमएसपी पर बेचने का इंतजार कर रहे हैं।कृषि विभाग के अनुसार श्रीगंगानगर जिले में करीब 11 लाख मीट्रिक टन और हनुमानगढ़ जिले में 14.25 लाख मीट्रिक टन गेहूं का उत्पादन हुआ है। इस प्रकार दोनों जिलों में कुल उत्पादन 25.25 लाख मीट्रिक टन के आसपास पहुंच गया। इसके विपरीत भारतीय खाद्य निगम (एफसीआई) और अन्य खरीद एजेंसियां अब तक केवल 13.50 लाख मीट्रिक टन गेहूं की ही खरीद कर सकी हैं।

किसानों को प्रति क्विंटल 200 से 300 रुपए का फटका

किसानों का आरोप है कि करीब 60 हजार किसानों का लगभग 40 प्रतिशत गेहूं अभी भी एमएसपी पर बिकने से वंचित है। सरकार ने इस वर्ष गेहूं का न्यूनतम समर्थन मूल्य 2585 रुपए प्रति क्विंटल निर्धारित किया है, जिस पर 150 रुपए बोनस मिलाकर कुल 2735 रुपए प्रति क्विंटल का भुगतान किया जाना है। वहीं खुले बाजार में गेहूं 2400 से 2500 रुपए प्रति क्विंटल के बीच बिक रहा है। ऐसे में किसानों को प्रति क्विंटल 200 से 300 रुपए तक का आर्थिक नुकसान उठाना पड़ रहा है।

पिछले वर्ष 30 से 40 प्रतिशत गेहूं व्यापारियों ने सीधे खरीदा

पिछले वर्ष स्थिति कुछ अलग थी। तब एमएसपी और बाजार भाव के बीच अंतर कम था,इसलिए 30 से 40 प्रतिशत गेहूं व्यापारियों ने सीधे खरीद लिया था। किसानों ने भी ऑनलाइन पंजीकरण,तौल और भुगतान प्रक्रिया की औपचारिकताओं से बचने के लिए निजी व्यापारियों को उपज बेचना बेहतर समझा था। यही कारण रहा कि वर्ष 2025 में 15.41 लाख मीट्रिक टन के लक्ष्य के मुकाबले खरीद अपेक्षा से कम रही। इस बार बाजार और एमएसपी के बीच बड़ा अंतर होने के बावजूद बड़ी मात्रा में गेहूं खरीद केंद्रों तक नहीं पहुंच पाया है। किसान संगठनों का कहना है कि यदि शेष उपज की शीघ्र खरीद नहीं हुई तो किसानों को मजबूरन कम कीमत पर गेहूं बेचना पड़ेगा, जिससे उनकी आय पर सीधा असर पड़ेगा।

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