
who is next chairman
श्रीगंगानगर.
इस महीने के अंतिम सप्ताह में नगर परिषद बोर्ड का कार्यकाल दो साल का पूरा होने जा रहा है। एेसे में सभापति अजय चांडक के खिलाफ अविश्वास की सुगबुगाहट हो चुकी है। 18 पार्षदों ने धड़ेबंदी कर जाल बुनना भी शुरू किया है लेकिन सभापति की कुर्सी पर बैठाया किसे, यह सवाल यक्ष प्रश्न के रूप में बना हुआ है। चांडक को पटखनी देने के लिए 37 पार्षदों की संख्या बल चाहिए लेकिन इतने पार्षदों को एक मंच पर लाने के लिए फाइनेंस के लिए किसी ने हामी नहीं भरी है।
पार्षदों के मन में यही सवाल है कि एक बार अविश्वास प्रस्ताव लाने की कवायद तो शुरू हो जाए, इससे चार दिन अच्छी खासी आवगत भी हो सकेगी। वहीं सुविधा शुल्क और मनमाने रेट पर निर्माण कार्य करने की छूट सहित कई शर्तो पर समझौते हो जाएंगे तो अगले दो साल में उनकी काया बदल सकती है।
लेकिन यह खर्चा करेगा कौन, इस पर बात अटकी हुई है। हालांकि यह दौड़ शुरू करने के लिए कई प्रभावशाली पार्षद सक्रिय भी हुए हैं। लेकिन मौजूदा स्थिति को देखते हुए पार नहीं पड़ रही है। चांडक के खिलाफत खेमे ने राज्य सरकार पर मुंह धो रखा है ताकि बिना किसी कवायद से तख्ता पलटा जा सके।
गर्म हवाओं का बदला रुख
सभापति ने भी अपनी रणनीति में बदलाव करते हुए उन पार्षदों को तवज्जो दी जिनके कारण अब तक उनको फजीहत झेलनी पड़ी थी। उनके वार्डों में जमकर निर्माण कार्य करवाकर यह बोलती बंद करवा दी। सभापति ने अपने विरोधी खेमे में सर्जिकल स्ट्राइक एेसी कि चारों खाने चित्त हो गए।
खिलाफत का गर्म हवाओं का बदल दिया है। हालांकि 25 नवम्बर तक राजनीति अभी गर्माए जाने की उम्मीद है। चांडक खेमे ने पिछले छह महीने में ब्लॉक एरिया, जवाहरनगर एरिया के पार्षदों से दूरियां कम करते हुए अपने खेमे में शामिल करने का प्रयास किया है।
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