श्रीगंगानगर। राज्य के बजट में आंगनबाड़ी केन्द्र की कार्यकर्ता और आशा सहयोगिनों को नियमित नहीं करने पर आशा सहयोगिनी चिकित्सा सेवा कर्मचारी संघ और कार्यकर्ता संघ ने जिले में पैन डाउन हड़ताल करने का निर्णय लिया है। इससे पहले आशा सहयोगिनी संघ की प्रदेशाध्यक्ष सीता स्वामी की अगुवाई में आशा सहयोगिनों ने सीएमएचओ को ज्ञापन देकर अपनी मांगे दोहराई। वहीं राजस्थान महिला एवं बाल विकास संयुक्त कर्मचारी संघ की ओर से मुख्यमंत्री के नाम का ज्ञापन जिला कलक्टर को दिया। इस बीच स्वामी ने बताया कि राज्य सरकार ने इस साल के बजट में मानदेय कार्मिकों को सिर्फ पन्द्रह प्रतिशत मानदेय में इजाफा किया है जबकि वर्ष 2018 के चुनाव में कांग्रेस ने आंगनबाड़ी की मानदेय कार्मिकों को राज्य कार्मिक का दर्जा देने की घोषणा की थी लेकिन चार साल बाद बीत गए। इस बार आखिरी बजट में भी सरकार ने वादा खिलाफी कर दी। सरकार हर योजना के लिए आशा सहयोगिन और कार्यकर्ता पर अपना बोझ ढालती है। यहां तक कि एक एक लाख रुपए मासिक वेतन पाने वाले अफसरों की फील्ड में डयूटियां नहीं लगती।
ऑफिस में भी ऐसे अफसर और कार्मिक नदारद रहते है लेकिन महज तीन हजार रुपए मानदेय पाने वाली महिलाएं सुबह से शाम तक विभिन्न योजनाओं के लिए सर्वे और टीकाकरण आदि कार्य कर रही है लेकिन जब स्थायी कार्मिक का मुद़दा आता है तो सरकार आश्वासन देकर भूल जाती है। लेकिन इस बार ऐसा नहीं होने देंगे। बार बार अपमान का घूंट पीना नहीं पड़ेगा। सरकार ने हमारी मांगे नहीं मानी तो पोलिंग बूथों पर वोटों का पिटारा खाली मिलेगा। इस मुद़दे पर को जिले भर के आंगनबाड़ी केन्द्र की महिलाएं अपना कामकाज नहीं करेगी। वहीं दो मार्च को जयपुर विधानसभा पर प्रदर्शन किया जाएगा। ज्ञापन देने के दौरान महिलाओं ने प्रदर्शन भी किया। इस मौके पर शहर अध्यक्ष मनीषा तिवाड़ी, सरोज, नीलम, सीमा, ममता, पूजा, पूनम के अलावा मंजू स्वामी, छिन्द्रपाल कौर, सरलादेवी, रेखा यादव, संतोष महेन्द्रा, सुनीता अरोड़ा आदि मौजूद थी।