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साइबर फ्रॉड: प्रतिबिम्ब एप पर मिली पांच हजार से अधिक एफआइआर

- एसपी ने दो घंटे किया मंथन, बारह सदस्यीय टीम गठित, कर्नाटक के बैंकों के खातों खंगालने जाएगी पुलिस

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श्रीगंगानगर। साइबर फ्रॉड करने वाली टेकेबल टेक” नामक कंपनी के संचालकों की शिकंजा कसने के लिए अब पुलिस प्रशासन ने सख्त कदम उठाने का निर्णय किया है। पुलिस अधीक्षक गौरव यादव ने गुरुवार को पुलिस लाइन में अपने अधीनस्थ पुलिस अधिकारियों की बैठक की। इस ठगी के बड़े प्रकरण की जांच को विस्तृत करने के लिए बारह सदस्यीय टीम गठित की है। इसमें सीओ सिटी आईपीएस बी आदित्य, प्रशिक्षु आईपीएस अजेयसिंह राठौड़, साइबर थाने के प्रभारी डीएसपी कुलदीप वालिया, सदर सीआई सुभाष चन्द्र, पुरानी आबादी एसएचओ ज्योति नायक के अलावा पुलिस अधीक्षक ऑफिस और साइबर सैल से जुड़े अधिकारियों व कार्मिकों को शामिल किया गया है। यह टीम कर्नाटक के बैँक खातों को खंगलाने के लिए कर्नाटक के कई जिलों के बैकों में जाकर जांच करेगी। एसपी यादव ने बताया कि अब तक की पुलिस जांच में यह प्रकरण साइबर फ्रॉड का सबसे बड़ा मामला हैं। इस प्रकरण के मुख्य आरोपी अजय आर्य, सौरभ चावला, सलोनी चावला, कर्मजीत सिंह, बलजीत सिंह और राजेंद्र सिंह ने वर्ष 2022 में कर्नाटक के विजयपुरा जिले में “टेकेबल टेक” नामक कंपनी खोली थी। इस कंपनी के माध्यम से करोड़ाें रुपए की ठगी को अंजाम दिया। इन आरोपियों के मोबाइल नम्बर को प्रतिबिंब एप में फीड कर किया गया तो वहां पांच हजार से अधिक एफआइआर सामने आई है। प्रतिबिंब एप में दर्ज एफआइआर में प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से इन आरोपियों की शिकायतें है। इन पांच हजार में से मोटी रकम की ठगी की सूची बनाई जा रही है, प्रत्येक एफआइआर का विश्लेषण किया जा रहा है और कर्नाटक पुलिस से सहयोग लेकर इन आरोपियोें के बारे मेें जानकारी जुटाई जाएगी।
प्रोपर्टी सीज करने की अपनाई जाएगी प्रक्रिया
एसपी ने बताया कि इस ठगी के कारोबारियों ने अपने नाम या अपने रिश्तेदारों या परिचितों के नाम से काफी प्रोपर्टी खरीदी गई है। इन संपतियों को कुर्क या सीजर की प्रक्रिया बीएनएसएस की धारा 107 के तहत अदालत में इस्तगासा दायर किए जाएंगे। संपत्तियों की जब्ती की प्रक्रिया अपनाने के लिए कानूनी पहलूओं के लिए एक टीम को विशेष तौर पर लगाया जा रहा है। वहीं गिरफ़तार आरोपी लाजपत राय आर्य और दीपक आर्य से पूछताछ के साथ साथ उनके आवास से बरामद किए गए दस्तावेजों का परीक्षण किए जाएंगे ताकि चल और अचल संपत्ति का पूरा डाटा सामने आ सके।
डिजिटल फोरेंसिक एक्सपर्ट की मदद लेगी पुलिस
पुलिस अधीक्षक ने बताया कि इस प्रकरण में डिजिटल फोरेंसिक एस्कपर्ट की मदद लेगी। ये एक्सपर्ट इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्य को इकट्ठा करने, उसका विश्लेषण करने, कम्प्यूटर, मोबाइल डिवाइस और अन्य डिजिटल स्टोरेज मीडिया से डेटा रिकवर करने में पुलिस के सहयोगी बन सकेंगे। ऐसे एक्सपर्ट की सेवाएं ली जाएगी ताकि समय रहते आरोपियों की ओर से इस ठगी की गुत्थी को सुलझाया जा सके।