
गोरखपुर के जिला न्यायाधीश उमेश कुमार बने प्रदेश के प्रमुख सचिव न्याय व विधि परामर्शी
इलाहाबाद. गोरखपुर के जिला न्यायाधीश उमेश कुमार प्रदेश के प्रमुख सचिव न्याय एवं अपर विधि परामर्शी नियुक्त हुए हैं। इलाहाबाद हाईकोर्ट ने 31 अगस्त 17 को प्रति नियुक्ति पर प्रमुख सचिव की तैनाती की अधिसूचना जारी की है। पांच सितम्बर को लखनऊ के सचिवालय में कार्यभार संभालेंगे।
उमेश कुमार का जन्म आठ जुलाई 1960 को कोटवा नारायणपुर गांव जिला बलिया में बब्बन लाल के घर हुआ। पांच अगस्त 1985 में मुंसिफ न्यायिक सेवा में प्रोन्नति हुए। नौ मई 2001 को उच्च न्यायिक सेवा में प्रोन्नति हुई। उमेश कुमार प्रदेश के विभिन्न जिलों में कार्य करते हुए 10 साल तक विभिन्न पदों पर इलाहाबाद में बिताया। जून 2002 से सितम्बर 02 तक उत्तर प्रदेश लोक सेवा आयोग के संयुक्त सचिव विधि रहे। 2006 से 2009 तक उत्तर प्रदेश राज्य औद्योगिक विकास निगम कानपुर मंे महाप्रबंधक विधि पद पर तैनात रहे। 12 जुलाई 2014 में जनपद न्यायाधीश कौशाम्बी नियुक्त हुए। खलीलाबाद, हमीरपुर के बाद गोरखपुर में जिला न्यायाधीश के रूप में तैनात रहे और 31 अगस्त 17 को प्रदेश के प्रमुख सचिव न्याय एवं विधि परामर्शी नियुक्त किया गया।
हाईकोर्ट के रिटायर जज को गवाही में बुलाने पर रोक
इलाहाबाद उच्च न्यायालय के सेवानिवृत्त न्यायाधीश आरसी दीपक द्वारा दर्ज कराये गये आपराधिक मामले में उन्हें गवाह के रूप में तलब करने सहित मुकदमे की सुनवाई पर हाईकोर्ट ने रोक लगा दी है और विपक्षियों से जवाब मांगा है। यह आदेश न्यायमूर्ति विपिन सिन्हा ने आरसी दीपक की याचिका पर दिया है। याची ने 1989 में गोरखपुर में उनके साथ मारपीट करने की प्राथमिकी दर्ज करायी थी। मामले में तीन गवाहों में से एक की मौत हो चुकी है। एक लापता है तो कोर्ट ने याची को गवाही के लिए पेश होने का आदेश दिया। याची का कहना है कि उनकी उम्र अधिक हो गयी है। वह केस नहीं लड़ना चाहते हैं। याचिका पर वरिष्ठ अधिवक्ता रविकांत व प्रदेश सरकार की तरफ से अपर महाधिवक्ता विनोदकांत ने पक्ष रखा।
by Prasoon Pandey
Published on:
05 Sept 2017 11:00 am
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