
सुल्तानपुर. राजनीति में बहुत कम लोग ऐसे मिलते हैं, जो ज़मीन से उठकर ऊँचाई पर पहुंचे हैं, उनमें अब एक नाम जुड़ चुका है AAP नेता सांसद संजय सिंह का। इंजीनियरिंग के स्टूडेंट रह चुके शरी सिंह ने धनबाद में जॉब शुरु किया और उसे छोड़ कर वो घर आ गए। यहां सोशल वर्कर का उन्होंंने काम शुरु किया, फुटपाथ पर लाइफ बिताने वालों की आवाज़ में उन्होंंने आवाज़ मिलाई। इस मेहनत ने रंग दिखाया अन्ना आंदोलन के वक़्त अरविंद केजरीवाल यहां आये और संजय सिंह मंच से उनके साथ हुए उसने उन्हें सड़क से सदन तक पहुंचा दिया।
1998 में हुई पाल्टिकल कैरियर की शुरुआत
संजय सिंह के साथियों में शुमार रवींद्र तिवारी ने बताया कि सोशल वर्कर के साथ-साथ संजय सिंह ने अपने पॉलिटिकल करियर की पारी 28 सितम्बर 1998 से शुरु की है। ज़िला पंचायत कैम्पस में बने मीटिंग हाल में शहीद भगत सिंह की याद में प्रोग्राम आर्गनाइज़ किया गया था। नेशनल लोकतांत्रिक पार्टी के नेशनल प्रेसीडेंट रघु ठाकुर भी इस प्रोग्राम में मौजूद थे। संजय सिंह की उनसे बातचीत हुई और उन्होंंने संजय सिंह को डिस्ट्रिक्ट प्रेसीडेंट बना दिया।
इस पूर्व MLA के इलेक्शन कैम्पेन से लेकर मैनेंजिंग तक किया हैंडल
ज़िले की सुल्तानपुर सीट से दो बार 2007-2012 में MLA रह चुके सपा नेता अनूप संडा का संजय सिंह का अच्छा साथ रहा है। 2006 के निकाय इलेक्शन में अनूप संडा ने नेशनल लोकतांत्रिक पार्टी के सिम्बल पर चेयरमैन पद के लिये लड़े। बाइचांस ही था कि कम मार्जिन से वो इलेक्शन हार गए। अनूप संडा बताते हैं कि इलेक्शन कैम्पेन से लेकर मैनेंजिंग तक की ज़िम्मेदारी संजय सिंह के ही पास थी।
यही नहीं इस इलेक्शन के नेक्स्ट ईयर 2007 में असेम्बली का इलेक्शन आया और लास्ट मूमेंट पर अनूप संडा सपा के सिम्बल पर मैदान में आये। शरी संडा बताते हैं कि इस इलेक्शन में भी डीलिंग संजय सिंह के हाथों में थी और हम इलेक्शन जीत गये। हमारे जीतने के बाद संजय सिंह को सपा युवजन सभा का प्रदेश सचिव बनाया गया।
40 बार डोनेट किया ब्लड, काम आई ये दुआ
ज़िले में सोशल वर्कर्स के आयडियल पर्सन के रूप में मानें जानें वाले करतार केशव यादव बताते हैं कि सालों तक संजय सिंह ने उनके साथ रहकर सोशल वर्कर बनने का सही फॉर्मूला जाना। बताते हैं कि संजय के इस मुक़ाम तक पहुंचने में लोगों की दुआ और प्रार्थना शामिल है।अब तक अलग-अलग लोगों की जान बचाने के लिये उन्होंने 40 बार ब्लड डोनेट किया है।
फुटपाथ पर बिजनेस करने वालों के हैं मसीहा
टीचर निज़ाम खान बताते हैं कि संजय सिंह ने 1997 में सुल्तानपुर सेवा संगठन के नाम से NGO बनाई, बाद में 1998 में इसका नाम चेंज कर उन्होंंने आज़ाद सेवा समिति कर दिया। आज भी वो इसके प्रेसीडेंट हैं, और हर साल दिसम्बर महीने में खुदी राम बोस की पुण्य तिथि पर वो गरीबों को कम्बल बांटते हैं।
शरी खान बताते हैं कि 1998 में शहर के बीचों-बीच तहसील कैम्पस के फुटपाथ पर लगने वाली दुकानें शार्ट-सर्किट से राख हो गई थीं, दर्जनों से ज़्यादा दुकानों के मालिक भुखमरी की कगार पर थे, तब संजय सिंह उनकी आवाज़ बनकर उभरे।उन्होंंने प्रशासन से मुआवज़े की डिमांड रखी। इसके बाद से तो वो शहर के हर गली-मोहल्ले में फुटपाथ पर बिजनेस करने वालों के मसीहा बन गये थे। आज भी इनमें से किसी को कोई परेशानी होती है और संजय सिंह घर पर होते हैं तो ये यहां जाते हैं। दिल्ली में हुए तो मोबाइल पर मदद की गुहार लगाते हैं।
Published on:
17 Jan 2018 05:09 pm
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