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बदलते मौसम की वजह से कोल्ड डायरिया की चपेट में आ रहे मासूम, ऐसे करें बचाव

कभी कोहरा तो कभी बदली के बीच बढ़ती ठंड और बदलते मौसम के मासूम बच्चे 'कोल्ड डायरिया' की चपेट में आ रहे हैं

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Cold Diarrhea

कुछ एहतियात बरतकर बदलते मौसम में बच्चों को कोल्ड डायरिया समेत तमाम छोटी-मोटी बीमारियों से बचाया जा सकता है।

सुलतानपुर. कभी कोहरा तो कभी बदली के बीच बढ़ती ठंड और बदलते मौसम के मासूम बच्चे 'कोल्ड डायरिया' की चपेट में आ रहे हैं। हर दिन कोल्ड डायरिया के शिकार 1से 5 वर्ष के सैकड़ों बच्चे अस्पतालों में पहुंच रहे हैं। सुलतानपुर जिला अस्पताल के वरिष्ठ बालरोग विशेषज्ञ डॉ. दिनेश ने 'पत्रिका' संवाददाता से बातचीत की और सर्दी के मौसम में बच्चों में सबसे ज्यादा हो रही बीमारी कोल्ड डायरिया और उसके बचाव के बारे में विस्तार से बताया। उन्होंने कहा कि कुछ एहतियात बरतकर बदलते मौसम में बच्चों को कोल्ड डायरिया समेत तमाम छोटी-मोटी बीमारियों से बचाया जा सकता है।

वरिष्ठ बालरोग विशेषज्ञ डॉ. दिनेश ने सर्दियों में दिन और रात का पारा लगातार गिर रहा है, जिसकी वजह से बच्चे कोल्ड डायरिया की चपेट में आ रहे हैं। डॉ. दिनेश कहते हैं कि सर्दियों में बच्चों की इम्युनिटी सामान्य दिनों की अपेक्षा कुछ अधिक कमजोर हो जाती है, जिसके चलते वह 'कोल्ड डायरिया' की चपेट में आ रहे हैं। डॉ. दिनेश कहते हैं कि ठंड के इस मौसम में डायरिया जैसी गम्भीर बीमारी से बचने के लिए बच्चों को प्रचुर मात्रा में पानी पिलाना चाहिए।

नार्मल बीमारी है कोल्ड डायरिया
डॉ. दिनेश बताते हैं कि जिस तरह लोगों को सामान्य डायरिया की बीमारी जकड़ती है, ठीक उसी तरह से बच्चों को कोल्ड डायरिया होती है। वरिष्ठ बाल रोग चिकित्सक बताते हैं कि सर्दी में 6 माह से 5 साल तक के बच्चों में सर्दी, जुकाम और खांसी होने के साथ ही डायरिया भी जकड़ लेता है। इसी कारण इसका नाम कोल्ड डायरिया रखा गया है। बीमारी की खास बात यह है कि कोल्ड डायरिया से पीड़ित बच्चे की जान नहीं जाती, बल्कि यह बीमारी शरीर को एकदम कमजोर कर देती है। इससे बच्चे अन्य बीमारियों की चपेट में भी आ जाते हैं।

कोल्ड डायरिया के लक्षण
बालरोग विशेषज्ञ डॉ. दिनेश ने बताया कि जब भी बच्चों को सर्दी, खांसी और जुकाम के साथ दस्त हो तो तुरंत यह समझ लेना चाहिए कि बच्चा कोल्ड डायरिया का शिकार हो गया है। ऐसी स्थिति में अभिभावकों को चाहिए कि वे बच्चों को एंटीबायोटिक दवाइयां न दें, क्योंकि एंटीबायोटिक दवाओं से बच्चों की इम्युनिटी कमजोर हो जाती है, वहीं शरीर पर भी बुरा असर पड़ता है। इससे बच्चों को कोल्ड डायरिया के अलावा अन्य बीमारियां घेर लेती हैं।

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डाइट में शामिल करें पतला खाना
डॉक्टर कहते हैं कि घर में बन रहे पतले खाने को बच्चों की डाइट में शामिल करना चाहिए। जैसे पतली दाल, ओआरएस का घोल, गर्म पानी, दही, खिचड़ी जैसी चीजें बच्चे को खिलाई जा सकती हैं।

डिहाइड्रेशन से भी बच्चों को बचायें
बाल रोग चिकित्सक डॉक्टर दिनेेश की मानें तो बच्चों को कोल्ड डायरिया के अलावा डिहाइड्रेशन से बचाना बेहद जरूरी होता है। वे कहते हैं कि ग्रोइंग ऐज में भी सर्दियों में भी बच्चों को अधिक पानी पीने की आवश्यकता होती है। डॉ. दिनेश कहते हैं कि बच्चों को कोल्ड डायरिया और सर्दी एक साथ होती है, इसलिए बच्चों के मां-बाप को लगता है कि बच्चे को प्यास नहीं लगी और वे बच्चों को पानी पिलाना जरूरी नहीं समझते। ऐसे में डिहाइड्रेशन बच्चों के लिए जानलेवा साबित हो सकता है।