18 जनवरी 2026,

रविवार

Patrika LogoSwitch to English
icon

मेरी खबर

video_icon

शॉर्ट्स

epaper_icon

ई-पेपर

अंतरराष्ट्रीय मातृभाषा दिवस 2020 : सरकार इनकै कुर्बानी जरा याद करा

ई बतावा कि शहीदन कै चिता पै यइसे लागे हर साल मेलाहीयां 19 दिन तक शेरशाह सूरीउ आपन लाव- लश्कर लइके ठहरा रहा

2 min read
Google source verification
अंतररष्ट्रीय मातृभाषा दिवस 2020 : सरकार इनकै कुर्बानी जरा याद करा

अंतररष्ट्रीय मातृभाषा दिवस 2020 : सरकार इनकै कुर्बानी जरा याद करा

सुलतानपुर। जब बात सुलतापुर जिला के लोगन के देशप्रेम और देश कै आजादी मा सहादत कै बात आवत थै तौ जिला कै स्वतंत्रता इतिहास मा हसनपुर रियासत कै नाव बरबसै लोगन का याद आय जात है।

इस भाषा को सुनकर आप अचानक चौंक गए होंगे। क्योंकि यह ठेठ हिंदी भाषा नहीं है। यह सुलतानपुर शहर की स्थानीय भाषा है। अंतररष्ट्रीय मातृभाषा दिवस हम आपके लिए इलाकाई भाषा में समाचार को दे रहे हैं। भारत के बारे में एक कहावत प्रचालित है जो हमारे देश में भाषा के महत्व को समझाने के लिए काफी है। कहावत कोस पर बदले पानी, चार कोस पर बानी...। पूरे विश्व में आज का दिन यानी 21 फरवरी को, 'अंतरराष्ट्रीय मातृभाषा दिवस' के रूप में मनाया जाता है। वर्ष 1999 में यूनेस्को ने पहली बार अंतरराष्ट्रीय मातृभाषा दिवस मनाने की घोषणा की थी। बांग्ला भाषा बोलने वालों के मातृभाषा के प्यार की वजह से ही आज विश्व में अंतरराष्ट्रीय मातृभाषा दिवस मनाया जाता है। इस साल 20वां 'अंतरराष्ट्रीय मातृभाषा दिवस' मनाया जा रहा है।

अब शुरू हो गई है, सुलतानपुर में बोली जाने वाली आम इलाकाई हिन्दी। ई रियासत जिले का 1857 मा अंग्रेजन कै कब्जा से मुक्त करावै खातिर आपन सैकड़न सैनिकन कै कुर्बानी दै देहे रहेन । यहि जिला कै गभड़िया नाला पै फ़िरंगीयन से जंग करत की हसनपुर रियासत कै राजा राजा हुसैनअली खान अउर उनकै जवान बेटवा शहीद होइ गा रहा। रियासत अउर उनकै सैनिकन कै पराकरमै कै ई नतीजवा रहिस कि सन 1947 मा वहै समय कै गवर्नर राजा अहमद अली खान का लेफ्टिनेंट का पद दइके तोप का लाइसेंस दै दीन रहा ।ई अपने आप मा अविस्मरणीय औ गौरवपूर्ण रहा। लोग बतावत थेंन कि ई शायद राजघरानन कै वीरता कै इतिहास मा हसनपुर रियासत देश कै इकलौती रियासत रही ,जहां कै राजा का तोप कै लाइसेंस अंग्रेजन कै गवर्नर देहे रहेन।
मैनुअल ऑफ टाइटल गवर्नमेंट गजेटियर मा इ लिखा बा कि अंग्रेजन सुलतानपुर का ग़ैर चिरागी बनाय देहे रहेन अउर अंग्रेजय जिला पै चढ़ाई करै कै तैयारिव कै लेहे रहेन , मुला हसनपुर रियासत के वैह समय कै राजा हुसैनअली खान आपन 700 सैनिकन का लइके अंग्रेजन से लोहा लेय खातिर निकलि गा रहेन । अंग्रेजन से ई लड़ाई शहरवा के एक्दम नजदिकव्य गोलाबारिक से शुरू भा अउर कादूनाला तक 60 किमी दूर तक चली रही । अंग्रेजन के साथे भै यहि युद्ध मा राजा हुसैन अली औ उनकय जवान बेटवा दुइनौ जने मारि डारा गा रहेन । यहि जंग मा अंदाजन 750 सैनिकन का आपन जान गंवावै का पड़ा रहा । जिनकै स्मृतियां आजव जिंदा बाटै । यहि लड़ाई मा अंग्रेजवन बहुत बुरी तरह हारि गा रहेन । वहै लड़ाई मा जेतना शहीद होइ गा रहें सब सैनिकन का बन्धुआकला रेलवे स्टेशन के पास दफनाय दीन गा रहा ।

अंग्रेजन कै दांत खट्टा कै देय वाले अमर शहीदन कै मजारे पै झाड़-झंखाड़ के सिवाय कुछ नाहीं बा। तबौ इहां कै लोगन शहीदन क याद कइके गर्व का अनुभव करथेंन। देशप्रेम कै ज्वालय कै ई असर बाटै कि क्षेत्र कै 4 दर्जन से ज्यादा नवजवान थलसेना, वायुसेना, जलसेना (नेवी), पुलिस,सीआरपीएफ, सीआईएसएफ औऱ पैरामिलिट्री फोर्स मा देशप्रेम कै जज्बे के साथे सेवा करत बाटेन। स्वाधीनता आंदोलन कै गवाह हसनपुर रियासत कै किला खंडहर होत चला जात बा। इ ऐतिहासिक धरोहर का सहेजय मा पुरातत्व विभाग औ कवनव जनप्रतिनिधि ध्यान नाय देत बाटेन । सन 1857 मा जौन स्वाधीनता आंदोलन भा रहा ओहमा हिआँ कै राजघराने कै राजा हुसैन अली का बहुत योगदान रहा। एतनै नाय रहा ,हीयां शेरशाह सूरीउ हसनपुर रियासत मा 19 दिन तक अपने लाव-लश्कर के साथे ठहरा रहा ।