26 जनवरी 2026,

सोमवार

Patrika LogoSwitch to English
icon

मेरी खबर

video_icon

शॉर्ट्स

epaper_icon

ई-पेपर

कोरोना के चलते इस नवरात्र देवी मंदिरों में नहीं दिखेगी रौनक, कलश स्थापना का यह है शुभ मुहूर्त

- 25 मार्च से शुरू हो रहे हैं नवरात्र- कोरोना वायरस के चलते मंदिरों के कपाट रहेंगे बंद- आचार्य सतीश पांडेय ने बताया कलश स्थापना का शुभ मुहूर्त

2 min read
Google source verification
navratri kalash sthapana

कोरोना वायरस के प्रकोप को देखते हुए लोगों से कहा जा रहा है कि वह अपने घरों से ही उगते सूर्य को अर्घ्य देंगे।

सुलतानपुर. कोरोना वायरस के चलते और कोरोना वायरस से बचने के लिए सोशल डिस्टेंस जरूरी होने के कारण बुधवार 25 मार्च को शुरू हो रहे नवरात्र व्रत इस बार रौनक विहीन होंगे, क्योंकि इस बार कोरोना वायरस के चलते मन्दिरों के कपाट बंद रहेंगे। जिसके चलते देवी मंदिरों में नहीं नवरात्र पर्व एवं व्रत की रौनक नहीं दिखेगी।

25 मार्च से शुरू होने वाले नवरात्र व्रत एवं पर्व पर कोरोना वायरस का खौफ लोगों की श्रद्धा और आस्था पर भारी पड़ेगा। कारण साफ है कि कोरोना वायरस से बचने और सुरक्षित रखने के लिए जरूरी सोशल डिस्टेंस की वजह से सरकार के एडवाइजरी के कारण मन्दिरों को 31 मार्च तक बंद किया गया है। इससे श्रद्धालुओं, देवी भक्तों को देवी मां की पूजा अर्चना और आराधना अपने घर पर ही करनी होगी। आस्था और श्रद्धा का पर्व नवरात बुधवार 25 मार्च से जरूर शुरू हो रहा है लेकिन, इस बार मंदिरों में पर्व की रौनक नहीं दिखेगी। कोरोना वायरस की वजह से शहर भर के देवी मंदिर 31 मार्च तक बंद कर दिए गए हैं। मंदिरों में पूजा आरती तो की जाएगी लेकिन कपाट बंद रहेंगे।

ब्रह्ममुहूर्त में करें कलश स्थापना
बुधवार 25 मार्च से शुरू होने वाला नवरात्र पर्व पर भक्तों के लिए कलश स्थापना करने के बारे में आचार्य सतीश पांडेय ने बताया कि कलश स्थापना का सर्वोत्तम समय ब्रह्म मुहूर्त सुबह 5:00 बजे से 6:30 बजे तक का है। यदि देवी मां के भक्तजन इस ब्रह्ममुहूर्त में कलश स्थापना न कर सकें हो तो इसके बाद सुबह 8:30 से दोपहर 12:45 तक भी कलश स्थापना कर सकते हैं। इसके बाद भी जो भक्त उस समय कलश स्थापित न कर पाएं हों तो वह कलश स्थापना एवं कलश पूजन दोपहर 3:50 तक कर सकते हैं। 25 मार्च को ही नव विक्रम संवत शुरू होता है। पंडित आचार्य सतीश कुमार पांडेय ने बताया कि 2077 का नव संवत्सर प्रमादी नाम से जाना जाएगा। इस बार कोरोना वायरस के प्रकोप को देखते हुए लोगों से कहा जा रहा है कि वह अपने घरों से ही उगते सूर्य को अर्घ्य देंगे।