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अंदर ही अंदर सुलग रही है यह जेल, खूंखार कैदियों में कभी भी हो सकता है संग्राम

2007 में प्रदेश का दिल दहला देने वाली घटना सुल्तानपुर जिला कारागार में ही घटी थी...

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Prisoners bad condition in Sultanpur district jail UP news

अंदर ही अंदर सुलग रही है यह जेल, खूंखार कैदियों में कभी भी हो सकता है संग्राम

सुल्तानपुर. जिला कारागार में मानक से अधिक बंदी भरे हुए हैं। इन सबके बीच सजायाप्ता कैदियों को भी विचाराधीन बंदियों के साथ रखा जा रहा है। यहां पर जेल मैनुअल की धज्जियां उड़ाई जा रही हैं। बंदीरक्षकों की मिलीभगत से प्रतिबन्धित सामान भी जेल के भीतर पहुंच रहे हैं। मामूली मारपीट की घटनाओं को भी जेल अधिकारी नजरअंदाज कर देते हैं। माना जा रहा है कि अगर यही ढुलमुल रवैया रहा तो साल 2007 की तरह हुई घटना की पुनरावृत्ति हो सकती है।

खूंखार कैदियों की लंबी फेहरिस्त

जिला कारागार में इन दिनों खूंखार बंदियों की लम्बी फेहरिस्त है। यहां के अधिकारियों को सिर्फ जेब भरने से मतलब रह गया है। जेल में मानक से कई गुना ज्यादा बंदी मौजूद हैं। सूत्रों के मुताबिक खूंखार बंदी वर्चस्व को लेकर दूसरे बंदियों से भिड़ा करते हैं। ऐसा नहीं है कि इसकी शिकायत जेलर या जेल अधीक्षक तक नहीं होती। बावजूद इसके कोई कार्रवाई नहीं करने से खूंखार बंदियों का मनोबल बढ़ता जा रहा है। सूत्रों के मुताबिक बैरक नंबर-सात में तीन सजायाफ्ता कैदी बन्द हैं। जिनके द्वारा आए दिन लोगों से भिड़ने की घटनाएं सामने आती रहती हैं। शिकायत के बावजूद भी कोई कार्रवाई नहीं की गयी। नतीजा यह रहा कि अन्य बंदियों में आक्रोश की स्थिति पैदा हो रही है। कहा जा रहा है कि वर्चस्व को लेकर भी साल 2007 में प्रदेश का दिल दहला देने वाली घटना इसी जिला कारागार में घटी थी। जिसमें कई बंदीरक्षक और बंदियों की हत्या कर दी गयी थी।

यहां की चाय होटल ताज से भी है मंहगी

जिला कारागार में चल रही कैंटीन के सामानों के दाम आसमान छू लेने वाले हैं। सूत्रों का दावा है कि पानी, चाय, पूड़ी सब्जी आदि के दाम कई गुना ज्यादा हैं। इन सबसे होने वाली कमाई का बड़ा हिस्सा जेल के कुछ अधिकारियों तक भी पहुंचता है।

बैठकी और पहरा के नाम पर बंदियों से होती है वसूली

जिला कारागार में जब कोई बंदी पहुंचता है तो उसकी बैरक कटाई जाती है। इसके एवज में डेढ़ से दो हजार रूपये तक की वसूली होती है। इसके बाद भी बंदी का पीछा नहीं छूटता है। पहरा न लगे और काम न करना पड़े इसके लिए भी मोटी रकम वसूली जाती है। जेल सूत्रों के मुताबिक मोबाइल चलाने के नाम पर भी लम्बा खेल खेला जाता है।

छापे की सूचना पर अलर्ट कर दिए जाते हैं बंदी

वैसे तो जिला कारागार सुल्तानपुर कैदियों के मोबाइल चलाने के नाम पर बदनाम हो चुकी है। सूत्रों के मुताबिक जब जेल प्रशासन छापा मारता है तो कई मोबाइल बरामद होते हैं। लेकिन जब जिला प्रशासन छापा मारता है तो उसे एक चम्मच तक नहीं मिलता है। वजह यह बताई जा रही है कि जिला प्रशासन के छापे की सूचना जेलकर्मी बंदियों तक पहुंचा देते है। ऐसे में मोबाइल और अन्य आपत्तिजनक सामान नहीं मिलने की वजह से जेल अधिकारियों की बदनामी भी नहीं होती।

क्या कहते हैं जेलर

वहीं इस मामले पर जेलर का कहना है कि जेल में किसी सजायाप्ता कैदी द्वारा किसी को परेशान नहीं किया जाता है। आपत्तिजनक सामानों पर अंकुश लगाने के लिए बंदियों पर निगरानी रखी जाती है। जेल अधीक्षक ने बताया कि 50 से 55 बंदी रक्षक का मानक है। लेकिन 20 से 25 ही बंदी रक्षक जेल प्रशासन को मिले हैं। इस बीच 200 से ढाई सौ बंदियों के रखवाली एक-एक बंदीरक्षक करते हैं। जब जैमर के बारे में बात की कई गई तो जेल अधीक्षक ने खुलासा किया की जेल के अंदर 2G और 3G नेटवर्क के लिए जैमर लगे हुए हैं। लेकिन इस समय मार्केट में 4G और 5G नेटवर्क चल रहे हैं। जेल प्रशासन ने उच्च अधिकारियों से जेल में लगे हुए जैमर को बदलने की मांग की है। जल्द से जल्द जैमर को सही कर लिया जाएगा।