
है। पूर्वी उत्तर प्रदेश के ग्रामीण क्षेत्रों में कृष्ण जन्मोत्सव के व्रत मनाने को डोल खड़ी करना भी कहा जाता है
सुलतानपुर. भाद्रपद मास की कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि (Shri Krishna Janmashtami 2020) के दिन भगवान विष्णु के आठवें अवतार कृष्ण का जन्म हुआ था। भगवान कृष्ण का जन्म अष्टमी तिथि को रोहिणी नक्षत्र में हुआ था इसलिए इस तिथि का सनातन धर्म में विशेष महत्व है। इस दिन लोग व्रत, पूजन और उत्सव मनाते हैं। कहीं भगवान की पालकी सजाई जाती है तो कहीं झांकी निकाली जाती है। पूर्वी उत्तर प्रदेश के ग्रामीण क्षेत्रों में कृष्ण जन्मोत्सव के व्रत मनाने को डोल खड़ी करना भी कहा जाता है।
आचार्य डॉ. शिव बहादुर तिवारी ने बताया कि इस कृष्ण जन्माष्टमी और कृष्ण जन्मोत्सव की तिथियों को लेकर भगवान कृष्ण के वैष्णव धर्म के भक्तों और गृहस्थ आश्रम के भक्तों में असमंजस की स्थिति बनी हुई है। इस साल कृष्ण जन्माष्टमी 11 और 12 अगस्त को मनायी जा रही है। आचार्य बताते हैं कि भगवान कृष्ण का जन्म रोहिणी नक्षत्र में हुआ था। लेकिन इस बार ऐसी स्थिति नहीं बन पा रही है। कारण कि अष्टमी तिथि और रोहिणी नक्षत्र दोनों का संयोग एक ही दिन और एक ही समय नहीं हो पा रहा है। इस बार भी कृष्ण जन्म की तिथि, समय, ग्रह और नक्षत्र एक साथ नहीं मिल रहे हैं और न ही एक साथ होने का संयोग बन पा रहा है।
13 अगस्त को दिन में लग रहा है रोहणी नक्षत्र
आचार्य डॉ. तिवारी ने बताया कि 11 अगस्त को सुबह 9 बजकर 07 मिनट के बाद अष्टमी तिथि का आरंभ हो जाएगा, जो 12 अगस्त को 11 बजकर 17 मिनट तक रहेगी। वहीं, रोहिणी नक्षत्र का आरंभ 13 अगस्त को सुबह 03 बजकर 27 मिनट से 05 बजकर 22 मिनट तक रहेगा।
11 अगस्त को गृहस्थ वाले रखें व्रत
आचार्य तिवारी ने कहा कि कृष्ण जन्मोत्सव/जन्माष्टमी में गृहस्थ आश्रम के भक्तों और वैष्णव धर्म के भक्तों के लिए उलझनों के लिए शास्त्रों में एक आसान सा उपाय बता गया है कि गृहस्थों को उस दिन व्रत रखना चाहिए जिस रात को अष्टमी तिथि लग रही है। पंचांग के अनुसार, 11 अगस्त दिन मंगलवार को गृहस्थ आश्रम के लोगों को जन्माष्टमी का पर्व मनाना सही रहेगा, क्योंकि 11 की रात को अष्टमी है। गृहस्थ लोग रात में चंद्रमा को अर्घ्य दें, दान और जागरण कीर्तन करें और 12 अगस्त को व्रत का पारण करें और कृष्ण जन्मोत्सव धूमधाम से मनाएं, जोकि श्रेष्ठ एवं उत्तम रहेगा।
12 अगस्त को वैष्णव वाले रखें व्रत
जो लोग वैष्णव व साधु संत हैं उनको 12 अगस्त को व्रत रख सकते हैं। 12 अगस्त को सुबह 11 बजकर 17 मिनट तक अष्टमी तिथि रहेगी और उसके बाद नवमी तिथि लग जाएगी। इस दिन अष्टमी और नवमी दोनो रहेंगी। साथ उस दिन कृतिका नक्षत्र बन रहा है। इस दिन कृष्ण जन्मोत्सव का पर्व मनाया जाएगा। दरअसल कृष्ण जन्माष्टमी का व्रत तथा जन्मोत्सव दो अलग-अलग तिथियां हैं।
Updated on:
10 Aug 2020 01:28 pm
Published on:
10 Aug 2020 01:25 pm
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