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सपा छोड़कर शिवपाल के साथ हुई यह महिला नेता, संभाला मोर्चा

विधानसभा चुनाव के पहले जिले की समाजवादी पार्टी को बड़ा झटका लगा है।

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सपा छोड़कर शिवपाल के साथ हुई यह महिला नेता, संभाला मोर्चा

सुल्तानपुर. विधानसभा चुनाव के पहले जिले की समाजवादी पार्टी को बड़ा झटका लगा है। अब समाजवादी पार्टी को अलविदा कहकर जिले की एक मजबूत महिला नेता और पूर्व मुख्यमंत्री एवं समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव की नजदीकी सपा नेता कमला यादव समाजवादी सेकुलर मोर्चा में शामिल हो गई। समाजवादी सेकुलर मोर्चा का झण्डा थामने के बाद कमला यादव ने एक प्रेस कांफ्रेंस बुलाकर कहा कि पूर्व मंत्री और सेकुलर मोर्चे के राष्ट्रीय अध्यक्ष शिवपाल सिंह यादव ही एक ऐसे नेता हैं जो सामंतवाद, गुंडाराज, भ्रष्टाचार और अत्याचार को खत्म कर सकते हैं।


सपा से सेकुलर मोर्चा की नेता कमला यादव ने कहा कि सामंतवाद का खात्मा प्रगतिशील समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष शिवपाल यादव ही कर सकते हैं। बताते चलें कि कमला यादव इसौली विधानसभा क्षेत्र के मयांग मझवारा गांव की हैं। समाजवादी पार्टी की मजबूत महिला राजनीतिक नेता के तौर पर कमला यादव का चेहरा लगभग एक दशक से सुर्खियों में है ।

वर्ष 2010 से शुरू हुआ कमला का राजनीतिक सफर

वर्ष 2010 में प्रधानी के चुनाव का दौर चल रहा था। मझवारा के निवासी कमला यादव के पति लेखपाल रहे रामकुमार यादव ने चुनाव लड़ने की हिम्मत की थी। उसी समय 25 अक्टूबर 2010 को फैजाबाद के बीकापुर से रामकुमार का अपहरण हो गया था। उनकी लाश मझवारा गांव के पास मिली थी। इस हत्याकांड में मायंग गांव के यशभद्र सिंह मोनू सहित कई लोग नामजद किए गए थे । यहीं से इस क्षेत्र की सियासत ने करवट बदली और अभी हाल ही में भाजपा छोड़कर बसपा में शामिल हुए चन्द्रभद्र सिंह सोनू और यशभद्र सिंह मोनू और कमला यादव के बीच ताकत की आजमाइश शुरू हुई। रामकुमार यादव की हत्या के बाद मझवारा में समाजवादी पार्टी के नेताओं से लेकर कांग्रेस पार्टी के बड़े बड़े नेताओं का तांता लगा था । इसी बीच कमला यादव ने प्रधानी का पर्चा भरा और चुनाव जीत लिया था। अब इसौली विधानसभा क्षेत्र में राजनीति की दो धुरी दिखने लगे । एक पक्ष पूर्व विधायक चंद्रभद्र सिंह सोनू का तो दूसरा कमला देवी यादव का। प्रशासन के लिए भी दोनों गांव किसी चुनौती से कम नहीं कभी नहीं रहा । हालत यह है कि चुनाव छोटा हो या बड़ा, या फिर कोई आयोजन रहा हो प्रशासन यहां सिर के बल खड़ा होने को मजबूर रहता है ।

लेखपाल रामकुमार यादव की हत्या के पहले धनपतगंज ब्लॉक के दर्जनों गांवों में प्रधानी भी निर्विरोध हो जाती थी । बीते दो साल पहले जिला पंचायत के चुनाव में धनपतगंज ब्लाक के वार्ड 22 से कमला यादव ने ताल ठोंकी तो 24 नंबर वार्ड से यशभद्र सिंह मोनू दोनों ने अपने-अपने चुनाव जीत लिए ।, जब जिला पंचायत अध्यक्ष चुनने की बारी आई तो एक बार फिर दोनों में राजनैतिक जोर आजमाइश दिखाई देने लगी । कमला यादव ने जिलापंचायत अध्यक्ष उषा सिंह का साथ दिया तो भाजपा प्रत्याशी के रूप में यशभद्र मोनू को हार का सामना करना पड़ा था ।

अब दोंनो के बीच एक बार फिर दिलचस्प मुकाबला दिखाई देने लगा । अब जबकि 2019 के होने वाले लोकसभा चुनाव से पहले चन्द्रभद्र सिंह सोनू व यश भद्र सिंह मोनू ने भाजपा को अलविदा कहकर बसपा का दामन थामा लिया तो दूसरी ओर कमला यादव ने समाजवादी पार्टी से नाता तोड़कर पूर्वमंत्री शिवपाल सिंह यादव के सेकुलर मोर्चे में शामिल होकर साथ देने का मन बना लिया । कमला यादव ने कहा कि हमे इस जनपद से सामन्तवाद को खत्म करना है । जिसको शिवपाल यादव ही खत्म कर सकते है इसलिये हमने समाजवादी पार्टी को छोड़ कर शिवपाल यादव की पार्टी से नाता जोड़ा । मैंने सेकुलर मोर्चा से लोकसभा का चुनाव लड़ने का मन बनाया है।


सपा न होती तो हम न होते

कमला यादव ने यह भी कहा कि सपा न होती तो हमारे बच्चे भी न होते । सपा की ही देन है जिससे कि आज हमारे बच्चे अच्छे स्कूल में पढ़ रहे है । उन्ही की देन है जो मुझे गनर मिला है । सपा पार्टी ने हमारे लिये बहुत कुछ किया है।