
महाशिवरात्रि : पांच सौ साल पुराना शिव मंदिर, एक नहीं पूरा गांव है शिवभक्त
सुलतानपुर. महाशिवरात्रि का पर्व पूरे जोर शोर से मनाया जा रहा है। भगवान शिव की नगरी (काशी) से महज 140 किमी दूर स्थित जिले में देखा जाए तो लगभग हर गांव में भगवान शिव के मंदिर हैं। लेकिन जिले के विकासखंड भदैया में मुरारपुर एक गांव है जहां पूरे के पूरे गांव के लोग भगवान शिव के भक्त हैं और दिलचस्प बात यह है कि उस गांव के बाहर हनुमानगंज बाजार से शंभूगंज रोड पर मात्र दो किमी की दूरी पर बने शिवमंदिर (शिवाला) पर ही पूरे गांव के लोग भगवान भोले की पूजा-आराधना करते हैं।
वर्ष 1528 में बनकर तैयार हुआ था यह शिवालय :- इस शिवालय की पहचान इसकी प्राचीनता है। आम शिवालयों की तड़क-भड़क से दूर इस शिवालय (शिवमंदिर) को बाबरी मस्जिद बनने वाले साल यानी 1528 ई में मुरारपुर के सेठ दामोदर दास ने बनवाया था। हालांकि इस शिवमंदिर को बनवाने वाले सेठ दामोदर दास के परिवार में कोई सदस्य जीवित नहीं है। गांववालों का मानना है कि इस शिवमंदिर को जिस सेठ दामोदर दास ने बनवाया था,भगवान शिव की कृपा से सेठ दामोदर दास और उनके पूरे परिवार को बैकुण्ठ हो गया। उनके पूरे परिवार को इस संसार के आवागमन से छुट्टी मिल गई थी। ऐसी मान्यता है कि इस शिवमंदिर में स्थापित शिवलिंग की आभा का दर्शन करने से सारे कष्ट दूर हो जाते हैं और यहां स्थपित शिवलिंग के दर्शन से मन को बहुत सुकून मिलता है और मन प्रसन्नचित्त हो उठता है। इस गांव के अलावा अन्य गांवों के लोग भी कुछ भी काम करने से पहले यहां आकर भगवान शिव के सामने माथा टेकते हैं।
आचार्य ने कराया शिवमंदिर का जीर्णोद्धार :- करीब पांच सौ साल पहले बने इस शिवमंदिर की जर्जर हालत को देखते हुए यहां के पुजारी आचार्य दिनेश उपाध्याय ने इस प्राचीनतम शिवमंदिर के जीर्णोद्धार का वीणा उठाया। आचार्य के शिवमन्दिर के जीर्णोद्धार के लिए जब हाथ उठे तो उनके सहयोग में उसी गांव के ननकऊ विश्कर्मा भी साथ आ गए,फिर क्या देखते ही देखते पूरे गांव के लोग मंदिर के जीर्णोद्धार के लिए तैयार हो गए। गांववालों के सहयोग से जीर्ण-शीर्ण शिवमंदिर का जीर्णोद्धार कराया गया।
हर शिवरात्रि पर होता है अखण्ड रामायण :- भगवान शिव के इस प्राचीन मंदिर पर हर साल महाशिवरात्रि पर अखण्ड रामायण का आयोजन होता है। अखण्ड रामायण समाप्त होने पर विशाल भंडारा किया जाता है। जिसमें भक्तों का जमावड़ा लगा रहता है और सभी भक्त बिना किसी भेदभाव के प्रसाद ग्रहण करते हैं।
Published on:
21 Feb 2020 11:57 am
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