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अब कभी लौटकर नहीं आएगा मुन्ना बजरंगी, उसी के साथ चले गए इन नेताओं के कई बड़े राज

मुन्ना बजरंगी के सियासी सम्बंध भी बेहद मजबूत हो चले थे या यूं कहें जाए कि वह नेताओं की जरूरत बन गया था...

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Unknown facts about Munna Bajrangi after murder in Baghpat Jail

अब कभी लौटकर नहीं आएगा मुन्ना बजरंगी, अपने पीछे छोड़ गया कई अनसुलझे राज

सुल्तानपुर. कुख्यात माफिया डॉन प्रेम प्रकाश उर्फ मुन्ना बजरंगी की अंतिम यात्रा के गवाह सुल्तानपुर जिले के भी सैकड़ों समर्थक बने। जनपद कारागार में बाहुबली मुन्ना बजरंगी तकरीबन सवा दो वर्ष रहा। जिला कारागार में रहते हुए मुन्नाबजरंगी ने अपनी जड़ें और भी मजबूत कर ली थी। मुन्ना बजरंगी के सियासी सम्बंध भी बेहद मजबूत हो चले थे या यूं कहा जाए कि डॉन आज के राजनीतिज्ञों की जरूरत बन गया था।

ये नेता करते थे मुन्ना से मुलाकात

यही कारण रहा कि जेल में शिफ्ट कराने में जौनपुर के पूर्व समाज कल्याण मंत्री का विशेष योगदान रहा। इस काम में सुल्तानपुर जिले के एक समाजवादी विधायक का भी अहम रोल रहा। इतना ही नहीं देवी पाटन मण्डल के माननीय जो उस समय अखिलेश यादव सरकार में महत्वपूर्ण विभाग के मंत्री थे, वे जिला जेल में आकर अक्सर मुन्ना बजरंगी से घण्टों मिलकर बात किया करते थे। इस मुलाकात की सबसे खास बात यह थी कि यह मुलाकात बिना किसी प्रोटोकॉल के बेहद गोपनीय होती थी। यह बात इसलिए अहम है क्योंकि मुन्ना दबंगई के साथ-साथ राजनीतिक ताना-बाना बुनने में मजबूत रहा। कारागार में रहने के दौरान यहां पर मुन्ना खुद को बेहद सुरक्षित मानता था। परिवारीजन भी हफ्ते में कई बार आकर मुन्ना से मिल जाते थे।

जेल में मुलाकात करने वालों का नहीं होता था रिकॉर्ड

मुन्ना बजरंगी की दो वर्ष पूर्व कोर्ट ने पैरोल स्वीकृत की थी।वह अपनी वृद्ध मां की तेरहवीं संस्कार में शामिल हुआ था।बख्तरबंद गाड़ी के पीछे दर्जनों वाहन काफिले में मौजूद रहे।सुल्तानपुर से जौनपुर तक उसके काफिले को देखकर बड़े से बड़ा माफिया भी हतप्रभ हो जाता था। दिन में ही उसे पुलिस अभिरक्षा में घर(जौनपुर)से वापस लौटना पड़ा था।डॉन के जिले में रहने के दौरान सुदूरवर्ती जेलों में बंद उसके फाइलें मित्रों के संग चिट्ठी चौपाटी जारी रही। वह खास मौकों पर फोन से बात करने के लिए परहेज करता था। कई प्रांतों का नेटवर्क उसके दर्जनों मोबाइल से जुड़े रहते थे। फोन रिसीवर भी उनके साथ बैठक में मौजूद रहते थे।

खास लोगों के आग्रह पर लेता था खुराक

कुछ खास लोगों के हाथ का दिया दाना-पानी ग्रहण करता था। उसके कई सेवक फर्जी मामलों में या जमानत उठवाकर बैरक में उसके साथ निरुद्ध रहते थे। लेकिन बदले भगवा निजाम में ऐसा हो ना सका।हनक इतनी कि जेल में छापे के दौरान बड़े से बड़ा अधिकारी बजरंगी की बैरक में जाने से परहेज़ करता था।

यहां भी पड़ा था बजरंगी को एंजाइना अटैक

माफिया मुन्ना बजरंगी का सुल्तानपुर जनपद में भी उपचार होता रहा उसे एंजाइना अटैक पड़ा था,जिसके रिकॉर्ड यहां फाइलों में कैद हैं कारागार के चिकित्सक के अलावा जिले के शहर के एक प्राइवेट डॉक्टर भी उसे बराबर देखने के लिए जाते थे।

मुन्ना ने सुल्तानपुर जेल में गुजारे थे सवा दो साल

साल 2014 से 2017 के प्रारंभिक माह तक दो साल की मौजूदगी के दौरान यहां के धंधेबाज खूब फले-फूले। रोक के बावजूद रंगदारी वसूली, टावर कब्जेदारी का काम करने से बाज नहीं आते थे। इसकी जानकारी होने पर डॉन की नाराजगी जाहिर हो जाती थी। पूर्वांचल क्षेत्र के बड़े-बड़े टेंडर के उसके एक फोन पर मैंनेज हो जाते थे।वसूली के कारण करोड़ों रूपए के बझे निर्माण चुटकी में हल कर देना डॉन की अपार ताकत को दर्शाता था।जिले वासियों से डॉन का किस्सा छिपा नहीं था। रेलवे ,लोक निर्माण विभाग, हाई-वे आदि के अनसुलझे जाल दोनों पक्षों की मौजूदगी में हल हो जाते थे।

मुन्ना बजरंगी से मिलने वालों की चार चरणों मे होती थी तलाशी

जेल में मुन्ना से मिलने से वालों की चार चरणों में जामा तलाशी होती थी। तलाशी का जिम्मा लंभुआ क्षेत्र के दोहरे हत्याकांड के अभियुक्त पर थी, जो मुन्ना बजरंगी का बेहद करीब था। इस सेवा के एवज में बांदा-सोनभद्र आदि जिलों के खनन का जिम्मा जिले के लड़कों को भी मिला था। लेकिन योगीराज में झांसी जेल शिफ्ट होने के बाद सारी गणित गड़बड़ा गई।मुन्ना बजरंगी की बागपत जेल में हत्या होना बजरंगी के चहेतों के लिए दोहरे झटके से कम नहीं है।

शवयात्रा में शामिल हुए सुल्तानपुर के समर्थक

मुन्ना बजरंगी कभी लौटकर न आने वाली यात्रा पर चला गया। मुन्ना बजरंगी पंचतत्व में विलीन हो गये। यहां से उनके अंत्येष्टि में शामिल होने के लिए उसके सैकड़ों मायूस समर्थक जौनपुर पहुंचे थे।

इसी तर्ज पर जेल में हुई शुभकरन द्विवेदी की हत्या

2007 में छत्तीसगढ़ की अमबिकापुर जेल में पत्रकार शुभकरण दिवेदी की हत्या हो गई थी। लंबे समय तक राष्ट्रीय सहारा समाचार पत्र के जिला संवाददाता रहे। उन्हें कांग्रेस पार्टी के राजनीतिक सूरमा जय नरायन तिवारी का खास माना जाता था।लेकिन छत्तीसगढ़ के दलित मुख्यमंत्री रहे अजीत जोगी के रिस्तेदार की अपहरण और फिरौती उसके बाद हत्या के मामले में नामज़द होते ही वहां की जिला जेल में षड्यंत्र का शिकार हो गए और अगले सुबह जेल में ही उनकी लाश मिली, हालांकि पत्रकार स्वर्गीय श्री द्विवेदी ने अपनी हत्या की आशंका सबको बता दिया था।

माफिया मुन्ना बजरंगी को थी आशा...

यूपी में जरायम की दुनिया में सबसे बड़ी गैंगवार वर्ष 2005 में हुई थी। जिसमे बीजेपी विधायक कृष्णनंद रॉय की हत्या हुई थी। बताते हैं कि आज भी टाटा सूमो गाजीपुर के पास थाने में खड़ी है। इस सामूहिक हत्याकांड में रॉय समेत सात लोग मारे गए थे।कृष्णानंद राय की हत्या के बाद विपक्ष में रहे बीजेपी के कद्दावर नेता राजनाथ सिंह ने न्याय यात्रा निकाली थी। बताते हैं कि उसने दर्जनों गवाहों को पक्षद्रोही करने में सफलता हासिल कर ली थी।बजरंगी के छूटने की हवा भी पूर्वांचल में फ़ैल गयी थी।इस बात की चर्चा मुन्ना बजरंगी अमहट जेल में करने लगा था।कहा था कि कोर्ट जबरदस्ती सजा कर दे तो कह नहीं सकता वरना इस केस में सजा लायक कुछ रह नहीं गया है।