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2 करोड़ की अष्टधातु की मूर्ति के साथ 6 अरेस्ट, सौदा तय होने पर बेचने की फिराक में थे आरोपी

बीते साल 29 दिसंबर को हलियापुर थाना इलाके के चोरी हुई अष्टधातु की तीन मूर्तियों को पुलिस ने बरामद कर लिया है।

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SULTANPUR

2 करोड़ की अष्टधातु की मूर्ति के साथ 6 अरेस्ट, सौदा तय होने पर बेचने की फिराक में थे आरोपी

सुल्तानपुर. बीते साल 29 दिसंबर को हलियापुर थाना इलाके के चोरी हुई अष्टधातु की तीन मूर्तियों को पुलिस ने बरामद कर लिया है। पुलिस ने छह आरोपियों को अरेस्ट किया है। बरामद मूर्तियों की कीमत अंतरराष्ट्रीय बाजार में दो करोड़ बताई जा रही है।


घाटपुल पर घेराबंदी कर आरोपियों को पकड़ा

एसपी अनुराग वत्स ने बताया कि सूचना मिली कि दो शातिर अपराधी जगदीशपुर थाने के आमघाट पुल की तरफ से एक बाइक से आ रहे हैं। इस पर थानाध्यक्ष हलियापुर अशोक कुमार ने सिपाहियों के साथ आम घाटपुल के पास घेराबंदी कर बाइक से आ रहे दोनों अभियुक्तों को गिरफ्तार किया। पुलिस गिरफ्त में आए दोनों आरोपितों से जब पूछाताछ हुई तो एक ने अपना नाम सोनू सिंह पुत्र राम सिंह निवासी बसंतपुर थाना कोतवाली देहात तो दूसरे ने भास्कर दुबे पुत्र शशिकांत दुबे निवासी पुरे संगम थाना बल्दीराय बताया।

तलाशी के दौरान एक मूर्ति बरामद हुई

दोनों अभियुक्तों ने बताया कि राम जानकी मंदिर से 29 दिसंबर को अपने साथियों के साथ मूर्तियां चोरी की थी, जिसे वह बेचने के लिए जा रहे थे। बाकी साथी फैजाबाद रोड पर स्थित कूरेभार मोड़ पर खड़े हैं। पुलिस कूरेभार मोड़ पर खड़ी कार के पास पहुंची, तभी एक अभियुक्त भागने में सफल रहा और बाकी चार अभियुक्तों पुलिस की गिरफ्त में आ गए। उनके पास से अष्टधातु की दो मूर्ति बरामद हुई। पूछताछ में अभियुक्तों ने अपनी पहचान अवनीश त्रिपाठी पुत्र शेषमणि त्रिपाठी निवासी हरि का पुरवा थाना आसपुर देवसरा जनपद प्रतापगढ, संजय यादव पुत्र कन्हैया लाल यादव निवासी उत्तरगांवा थाना जफराबाद जनपद जौनपुर, प्रदीप कुमार यादव उर्फ शिव बालक पुत्र राम लगन यादव निवासी छतौना थाना केराकत जनपद जौनपुर, और सन्तलाल पुत्र मनोहर निवासी धरमापुर थाना गौरा बादशाहपुर जनपद जौनपुर बताया।

मूर्तियों केे हाथ काटकर हुआ था सौदा

अभियुक्तों ने पुलिस को बताया कि भास्कर दुबे त्रिपाठी ने इस मंदिर की रेकी की थी। कीमत अवनीश ने बताया था कि यह मूर्तियां 4 से 5 करोड़ में बिक जाएंगे। जिसको लेकर अपने साथी भास्कर, संतलाल संजय यादव के साथ चोरी करने की योजना बनाई गई और 29 दिसंबर की रात अपने साथी संजय यादव प्रदीप यादव अर्जुन निषाद विशाल निषाद महिंद्र के साथ जाकर मूर्तियों की चोरी की गई नमूने के तौर पर दो मूर्तियों के अलग-अलग हाथ काट कर सौदा तय किया गया। जिसको लेकर हम लोग बेचने जा रहे थे।