
GUJARAT ATS : लॉक-डाउन से पहले ही गुजरात आ गए थे तीनों संदिग्ध नक्सली
सूरत. गुजरात में पत्थलगड़ी मुहिम को शुरू कर सती-पति संप्रदाय और स्थानीय आदिवासियों को सरकार के खिलाफ हिंसक आंदोलन के रूप में जोडऩे के प्रयास में पकड़े गए तीन संदिग्ध नक्सलियों की कोविड-19 रिपोर्ट एटीएस को नहीं मिली है। रिर्पोट मिलने पर उन्हें अदालत में पेश कर रिमांड की प्रक्रिया शुरू की जाएगी।
आंतकवाद निरोधक दस्ते एटीएस के पुलिस निरीक्षक सीआर जाधव ने बताया कि झारखंड के खूंटी जिले के बुटीगरा गांव निवासी बिरसा औरेया (28) व सामू औरेया (20) व रांची जिले के हुन्द्रु गांव निवासी एक महिला बबिता कच्छप (28) तीनों कोरोना को लेकर देश भर में शुरु हुए लॉक डाउन से पहले ही गुजरात आ गए थे। बिरसा व उसके भाई सामू ने व्यापारा के निकट सती-पति संप्रदाय के गढ़ कटासवाण में छिपे थे।
उन्होंने खुद को खेत मजदूर बता कर एक वाडी में काम हासिल किया था। धीरे-धीरे वे जल, जमीन और जंगल पर सिर्फ सती-पति आदिवासियों को हक की बात कर उन्हें भडक़ाने का प्रयास कर रहे थे। उन्हें पत्थलगढ़ी मुवमेंट से जुड़ी किताबें, पैम्पलेट, हस्तलिखित पत्र व अन्य साहित्य भी बता रहे थे।
उन्होंने करीब डेढ़ सौ लोगों को जोड़ा था। सरकार के खिलाफ अपनी इस मुहिम को आगे बढ़ाने के लिए वे फंड भी जुटा रहे है। वहीं बबिता के बारे में बताया जाता है कि वह संतरामपुर रोड़ पर झालबैरा गांव से पकड़ी गई थी। वह आदिवासी इलाकों के अलग-अलग गांवों में धूम कर लोगों को पत्थलगढ़ी मुवमेंट से जोडऩे का प्रयास कर रही थी।
वह सोशल मीडिया पर भी सक्रीय थी। इनके सीधे तौर पर नक्सलवादियों से जुड़े होने के सवाल पर जाधव कहा कि लेपटॉप, मोबाइल आदि को फोरेन्सिक जांच के लिए भेजा गया है। इनसे अभी विस्तृत पूछताछ नहीं हो पाई है।
जो सामग्री मिली है उसकी छानबिन भी जारी है। उनके और कितने साथी सक्रिय और कौन कौन लोग इनके संपर्क में थे। इसकी पड़ताल की जा रही है। यहां उल्लेखनीय है कि मुखबिर से पुख्ता सूचना मिलने पर एटीएस के दो अलग अलग टीमों ने उन्हें हिरासत में लिया था। तीनों झारखंड में वांछित थे।
पत्थलगड़ी मूवमेंट का बड़ा चेहरा है बबिता
बबिता कच्छप, बिरसा और सामू झारखंड के खूंटी जिले से शुरू हुई पत्थलगड़ी मूवमेंट का बड़ा चेहरा है। आदिवासी परम्परा में मृतकों के स्मारक और सीमा चिन्हों के रूप में चल रही पत्थलगड़ी के जरिए कई ग्राम सभाओं ने अपनी गांवों पर पत्थलगड़ी की। जिसमें व्यवस्था विरोधी संदेश लिखे।
अपना मालिकाना हक बताते हुए बाहरी लोगों के प्रवेश पर प्रतिबंध लगा दिया। कुछ समय ग्रामिणों ने एक विधायक को बंध बना दिया था। उसने छुड़ाने गए पुलिस अधिकारी समेत 200 सुरक्षा बलों को भी बंधक बना लिया था। बाद में बातचीत कर उन्हें छुड़ाया गया। इस तरह की घटनाओं व कुछ हिंसक घटनाओं को लेकर हजारों लोगों के खिलाफ मामले दर्ज हो चुके है। जिनमें तीनों आरोपी भी शामिल है। इन गावों ने मुख्यधारा से अलग होकर अपनी व्यवस्था बना ली है। वहीं इस मूवमेंट को नक्सलियों का नया पैंतरा भी बताया जाता हैं।
Published on:
27 Jul 2020 04:38 pm

बड़ी खबरें
View Allसूरत
गुजरात
ट्रेंडिंग
