
मानो थम गई हर धड़कन
विनीत शर्मा
सूरत. रविवार सुबह 11.32 बजे से 11.47 मिनट के बीच का समय शहर के लिए बेहद खास रहा। करीब 11.40 के आस-पास तो हर धड़कन मानो थम सी गई थी। पक्षियों (birds) की चहचहाहट (Tweet) रुक गई थी और पशु भी जहां थे वहीं ठहरकर जमीन पर बैठ गए। इस दौरान सूर्यनगरी सूरत (surat) के आसमान पर भले चंद्रमा (moon) ने सूर्य (sun) के 70 फीसदी हिस्से पर घेरा डाला हो, लेकिन बादलों (clouds) के बीच सन हेलो (sun halo) और क्लाउड फायर (cloud fire) ने लोगों को रोमांचित कर दिया।
सूर्य ग्रहण के दौरान वातावरण में अचानक प्रकाश की इंटेंसिटी (intensity) डाउन हो गई और पारा सात डिग्री तक गिर गया। अचानक प्रकाश की तीव्रता (intensity of light) घटने से पक्षियों और पशुओं में अचानक घबराहट होने से उनकी प्रतिक्रियाएं दिखने लगीं। सुबह 11.40 बजे के आसपास सूर्य ग्रहण सूरत में अपने शीर्ष पर था। इस दौरान पक्षियों ने चहचहाना बंद कर दिया और पशुओं ने अचानक प्रकाश की तीव्रता कम होने से अपनी गतिविधियां रोक दीं और जहां थे वहीं बैठ गए। वातावरण में भी अचानक अलग तरह की शांति (calm) छा गई थी। यह अनुभूति उन्हीं लोगों को हुई जो घरों से निकलकर उस समय बाहर थे।
हम डाटा एकत्र किए हैं
इस बार सूर्य ग्रहण के अध्ययन के लिए हमने दो टेलिस्कोप लगाए थे। सूर्य ग्रहण के कारण तापमान में गिरावट और प्रकाश की तीव्रता घटने समेत कई दूसरे डाटा एकत्र किए हैं। सन हेलो और फायर क्लाउड सूर्य ग्रहण के दौरान देखने को मिले। आमतौर पर ऐसा कभी-कभी होता है, जब ग्रहण के दौरान सन हेला और फायर क्लाउड देखने को मिले।
हिमांशु देसाई, खगोलविद, साइंस सेंटर सूरत
शहर में सूर्य ग्रहण से ठीक पहले बारिश होने के कारण एक बार लगा था कि सूर्य ग्रहण (solar eclips) पर बारिश (rain) ग्रहण डालेगी। लेकिन बाद में आसमान साफ होने से लोगों ने राहत की सांस ली। इस बार के सूर्य ग्रहण की खास बात यह रही कि लोगों ने सन हेलो देखा। इससे पहले शहर में सन हेलो करीब आठ साल पहले 18 अगस्त 2012 को पड़े सूर्य ग्रहण के दौरान देखने को मिला था। पिछली बार यह 80 किमी के दायरे में देखने को मिला था, लेकिन इस बार 20 किमी के दायरे में ही बना। इसके ऊपर क्लाउड फायर भी कभी कभी बनता है जो इस बार सूरत में दिखा। पत्तों के छेद और पानी की परछाई में भी लोगों ने सूर्य ग्रहण देखा है।
यह है फायर क्लाउड
यह एक अलग तरह का रेनबो है, जो एक ही बादल में बनता है। इसमें लाल, ऑरेंज और पीला रंग ज्यादा मुखरता से दिखता है, इसलिए इस बादल को क्लाउड फायर कहते हैं। सन हेलो आसमान में धरती से आठ किमी ऊपर दिखता है। यह मेघधनुष 360 डिग्री के घेरे में बनता है। इस बार बादलों के कारण यह पूरा देखने को नहीं मिला। सन हेला को कई जगह 22 डिग्री हेलो के नाम से भी जानते हैं। 70 फीसदी ग्रहण होने के कारण बैलीस बिड देखने को नहीं मिली। यह तभी संभव है, जब राजस्थान के सूरतगढ़ की तरह सूरत में भी सूर्य पर डायमंड रिंग बनती। ग्रहण के दौरान पृथ्वी जब सूर्य से दूर होती है, तभी बैलीस बिड बनती है। इस बार पृथ्वी ग्रहण के दौरान सूर्य से सबसे ज्यादा दूर थी।
अभी पानी से भरे हैं बादल
सन हेलो उसी वक्त दिखता है, जब बादलों में आइसी क्रिस्टल ज्यादा होते हैं। आमतौर पर बर्फ के यह कण नीचे आते-आते बारिश में बदल जाते हैं, लेकिन इस बार बादलों में बर्फ के क्रिस्टल मोटे होने के कारण सूर्यग्रहण से पहले बरसे नहीं। वैज्ञानिकों के मुताबिक यह आगामी दिनों में बारिश का संकेत है।
2034 में दिखेगा पूर्ण सूर्य ग्रहण
बीते कुछ वर्षों में सूरत दो बार पूर्ण सूर्यग्रहण का केंद्र बन चुका है। पहले वर्ष 1996 में पूर्ण सूर्यग्रहण हुआ था तो सूरत उसका केंद्र था। उस समय शाम करीब चार बजे पूरी तरह अंधेरा छा गया था। वर्ष 2009 में एक बार फिर सूरत पूर्ण सूर्यग्रहण का केंद्र बना। इस बार सुबह के समय सूर्य पर चंद्रमा ने घेरा डाला था। उस वक्त आसमान में छाए बादलों ने सूरतीयों को सूर्यग्रहण के इस अद्भुत नजारे को देखने से वंचित कर दिया था। वर्ष 2034 में दिखने वाला पूर्ण सूर्य ग्रहण सूरत में पूरा नहीं दिखेगा।
Updated on:
22 Jun 2020 07:48 pm
Published on:
22 Jun 2020 07:29 pm
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